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Hindi News ›   World ›   natural gas has become weapon of Russia for Europe all you need to know in Hindi

Ukraine Russia Conflict: प्राकृतिक गैस बन गई है रूस का हथियार, इसके आगे यूरोप है लाचार

Sun, 06 Feb 2022 02:50 PM IST
गौरव पाण्डेय डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, ब्रसेल्स
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, ब्रसेल्स Published by: गौरव पाण्डेय Updated Sun, 06 Feb 2022 02:50 PM IST
सार

यूरोप में गैस की कुल जरूरत का लगभग 40 फीसदी हिस्सा रूस सप्लाई करता है।

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natural gas has become weapon of Russia for Europe all you need to know in Hindi
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन - फोटो : पीटीआई (फाइल)

विस्तार

यूक्रेन के मसले पर ज्यादातर यूरोपीय देशों के दो टूक रुख न ले पाने की वजह उनकी अपनी ऊर्जा सुरक्षा की चिंता है। उन्हें अंदेशा है कि युद्ध की स्थिति में रूस प्राकृतिक गैस की आपूर्ति रोक देगा। यूरोप में गैस की कुल जरूरत का लगभग 40 फीसदी हिस्सा रूस सप्लाई करता है। यूरोप के लिए दूसरे पेट्रोलियम उत्पादों की सप्लाई का भी एक प्रमुख स्रोत रूस ही है।

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विश्लेषकों का कहना है कि यूरोप अभी भी कोरोना महामारी की मार से उबरने के दौर में है। बीते कई महीनों से यूरोपीय देशों में प्राकृतिक गैस की किल्लत रही है। ठंड में यूरोप में गैस का एक खास इस्तेमाल घरों को गर्म रखने के लिए होता है। इस सीजन में वहां गैस की मांग बढ़ जाती है। इसके अलावा बिजली उत्पादन में भी प्राकृतिक गैस का उपयोग बड़े पैमान पर होता है। इस साल ब्रिटेन और यूरोपियन यूनियन के सदस्य देशों में गैस अपेक्षाकृत महंगी मिल रही है। इस कारण बिजली के लिए उपभोक्ताओं को अधिक कीमत चुकानी पड़ी है।  
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रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ‘गैस-कूटनीति’ करने के साफ संकेत दिए हैं। पिछले हफ्ते हंगरी के राष्ट्रपति विक्टर ओरबान ने मास्को की यात्रा की थी। उस समय रूस ने हंगरी को सस्ती दर पर गैस देने की घोषणा की थी। राष्ट्रपति पुतिन ने ओरबान के साथ साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि हंगरी को अगले पांच साल तक गैस की कोई किल्लत नहीं होगी। हंगरी ईयू का सदस्य है, लेकिन विक्टर ओरबान का रूस के प्रति रुख अपेक्षाकृत अधिक दोस्ताना रहा है।
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यूक्रेन के मुद्दे पर बढ़ते टकराव के बीच कतर और अजरबैजान ने यूरोप के लिए गैस सप्लाई बढ़ाने का वादा किया है। लेकिन पेट्रोलियम मार्केट के जानकारों का कहना है कि रूस से जितनी मात्रा में प्राकृतिक गैस की आपूर्ति यूरोप को होती है, उसकी भरपाई करना बेहद कठिन है। बीसीएस ग्लोबल मार्केट्स नाम की एजेंसी के वरिष्ठ एनालिस्ट रॉन स्मिथ ने अमेरिकी वेबसाइट ब्लूमबर्ग से कहा- ‘रूसी कंपनी गैजप्रोम जितनी मात्रा में प्राकृतिक गैस की यूरोप को सप्लाई करती है, अगर उसकी भरपाई करनी हो, तो आपको एशिया में एनएलजी की अपनी आधी सप्लाई रोकनी होगी। उसका मतलब होगा कि पूरे एशिया में ऊर्जा की गंभीर किल्लत हो जाएगी। यानी आप यूरोप के ऊर्जा संकट का निर्यात एशिया को कर देंगे।’

कतर के ऊर्जा मंत्री साद-अल-काबी ने भी कहा है कि यूरोप को जितनी मात्रा में गैस की जरूरत है, उसकी आपूर्ति तभी की जा सकती है, जब दूसरे क्षेत्रों के लिए गैस सप्लाई को बाधित किया जाए। कतर के अधिकारियों ने कहा है कि गैस बिक्री के करार में शर्तें तय होती हैं। उन्हें पूरा करने की जिम्मेदारी सप्लायर देश की होती है। इसलिए किसी देश को अचानक आपूर्ति रोक कर किसी अन्य देश या क्षेत्र को उसे भेजना संभव विकल्प नहीं है।


इस बीच ब्रसेल्स स्थित थिंक टैंक ब्रुएगेल ने कहा है कि प्राकृतिक गैस में बढ़ी मांग से साफ है कि अभी गैस की महंगाई जारी रहेगी। उधर यूरोपीय विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर रूस ने गैस सप्लाई रोकी, तो उस हाल में यूरोप के उपभोक्ताओं को गैस वंचित करने के अलावा कोई चारा नहीं रहेगा। विश्लेषकों का कहना है कि ये सूरत रूस के माफिक बैठती है। इसीलिए वह यूरोपीय देशों के चेतावनियों पर ज्यादा ध्यान नहीं दे रहा है।

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