फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   NASA's Mars mission: Meet The Scientist Who Will Spend A Year On Mars

NASA: नासा का मंगल पर रहने वाला घर तैयार, इसमें एक साल बिताएगी ये कनाडाई महिला

Sat, 27 May 2023 12:22 PM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन Published by: काव्या मिश्रा Updated Sat, 27 May 2023 12:22 PM IST
सार

ह्यूस्टन के जॉनसन स्पेस सेंटर में एक घर तैयार किया गया है। इसमें चार लोगों के रहने की व्यवस्था है। इस घर को मंगल ग्रह के हालात जैसा बनाया गया है।

विज्ञापन
NASA's Mars mission: Meet The Scientist Who Will Spend A Year On Mars
केली हेस्टन, जो मंगल की तर्ज पर बने घर में बिताएंगी एक साल। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

मंगल ग्रह पर इंसानों को बसाने की योजना पर काम शुरू हो गया है। अगर सब कुछ सही रहा तो अगले सात साल यानी 2030 तक वहां पर इंसानों को भेजा जाएगा। मंगल ग्रह पर इंसान कैसे रह पाएंगे, इसी को लेकर एक ट्रायल शुरू किया जा रहा है। इसके लिए नासा ने चार लोगों को चुना है, जिसमें कनाडाई जीवविज्ञानी केली हेस्टन भी हैं। 

विज्ञापन

मंगल ग्रह जैसा घर

रिपोर्ट के अनुसार, ह्यूस्टन के जॉनसन स्पेस सेंटर में एक घर तैयार किया गया है। इसमें चार लोगों के रहने की व्यवस्था है। इस घर को मंगल ग्रह के हालात जैसा बनाया गया है। केली जल्द ही इस घर में रहने वाली हैं। वे यहां पर ट्रेनिंग लेंगी और करीब एक साल तक इसमें रहेंगी। इस दौरान वो ना बाहर आ पाएंगी और ना ही कोई उस घर में जा पाएगा।

विज्ञापन

बचपन का नहीं सपना

केली हेस्टन ने अपने अनुभव पर बात करते हुए कहा कि मैंने कभी बचपन से लेकर आजतक मंगल पर जाने का सपना नहीं देखा था। उन्होंने कहा कि कभी-कभी ये झूठ लगता है, लेकिन जब मैं इसके बारे में सोचती हूं तो मुझे हंसी आती है। उन्होंने आगे कहा कि मैं बहुत उत्साहित हूं और चुनौतियों का सामना करने के लिए भी तैयार हूं।

विज्ञापन
विज्ञापन

सारी सुविधाएं ग्रह की तरह

रिपोर्ट के अनुसार, जून के अंत में चारों शोधकर्ता उसके अंदर जाएंगे और करीब 12 महीने तक वहां रहेंगे। घर के अंदर का माहौल एकदम मंगल की तरह है। वहां पर मिट्टी भी लाल रंग की रखी गई है। इसके अलावा अगर वो कंट्रोल सेंटर से संपर्क करते हैं, तो उनका मैसेज मिलने में 20 मिनट का समय लगेगा। इसके बाद कंट्रोल सेंटर का मैसेज उन तक पहुंचने में 20 मिनट लगेगा। वास्तव में मंगल से सिग्नल भेजने पर भी इतना वक्त लगता है।

मार्स वॉक की भी प्रैक्टिस

ये घर 3डी प्रिंटेड है और 160 वर्ग मीटर में फैला है। इसका नाम मार्स ड्यून अल्फा रखा गया है। वहां पर चार बेडरूम हैं। इसके अलावा जिम, किचन, रिसर्च सेंटर बनाया गया है। इस घर को एयरलॉक द्वारा अलग किया गया। वहां पर चारों मार्स वॉक की भी प्रैक्टिस करेंगे।

मेल की जरिए घर पर बात

इस घर में एक साल तक मंगल पर रहने, खाने, आपात स्थिति से निपटने आदि की प्रैक्टिस की जाएगी। चारों शोधकर्ता परिवार से भी दूर रहेंगे। वो सिर्फ मेल के जरिए बात कर पाएंगे। कभी-कभी वो वीडियो मैसेज भेज सकते हैं, लेकिन उनकी बात लाइव नहीं होगी। उसमें 20 मिनट का अंतर रहेगा। ऐसे में उनको पूरी तरह से महसूस होगा कि वे लोग मंगल ग्रह पर रह रहे हैं।  

हेस्टन ने बताया कि घर के अंदर जाते ही बहुत आश्चर्यजनक महसूस होता है। यह बहुत बड़ा है। इसमें एक बाहरी क्षेत्र भी दिया है, जिसमें स्पेसवॉक कर सकते हैं। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed