Nancy Pelosi Taiwan Trip: पेलोसी की ताइवान यात्रा से हासिल क्या हुआ, अमेरिका में इस पर माथापच्ची
Nancy Pelosi Taiwan Trip: विश्लेषकों के मुताबिक पेलोसी की यात्रा से जो बाइडन प्रशासन के सामने अब उसके परिणामों से निपटने की नई चुनौती खड़ी हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने पिछले हफ्ते संवाददाताओं से बातचीत करते हुए कहा था कि पेलोसी का ताइवान जाना अच्छा विचार नहीं है...
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अमेरिकी संसद के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव की स्पीकर नैंसी पेलोसी की ताइवान यात्रा से क्या हासिल हुआ, इस बारे में अमेरिकी कूटनीतिक विशेषज्ञों के बीच गहरे मतभेद हैं। एक हिस्सा इस बात से जरूर खुश है कि चीन की चेतावनियों को नजरअंदाज कर पेलोसी ताइवान गईं, जिससे इंडो पैसिफिक क्षेत्र में अमेरिकी ताकत का प्रदर्शन हुआ है।
लेकिन एक दूसरे की हिस्से में राय में अब यह आशंका भी पैदा हो गई है कि चीन ताइवान जलडमरूमध्य और दक्षिण चीन सागर में यथास्थिति को बदलने की कोशिश कर सकता है। चीन ने ताइवान के आसपास बड़े पैमाने पर सैनिक अभ्यास का कार्यक्रम घोषित कर दिया है। इसे इस बात का ही संकेत माना गया है। साथ ही चीन ने ताइवान के साथ अपने कई आयात और निर्यात पर रोक लगा दी है। इसलिए पेलोसी की यात्रा से ताइवान को क्या फायदा होगा, यह सवाल भी यहां उठाया जा रहा है।
पेलोसी अमेरिकी सेना की सलाह की अनदेखी करते हुए ताइवान गईं। वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम के वॉशिंगटन ब्यूरो चीफ मासाहीरो ओकोशी ने अपने एक विश्लेषण में लिखा है- ‘सेना की सलाह को ठुकरा कर हुई पेलोसी की यात्रा से अमेरिका और चीन के बीच का संकट और करीब आ गया है। ऐसा उस समय हुआ है, जब ताइवान और जापान की तैयारी पर्याप्त नहीं है। इस यात्रा से क्या हासिल हुआ, इसे अगर अमेरिका-चीन संबंधों के व्यापक संदर्भ में देखा जाए, तो महसूस होता है कि पेलोसी की यात्रा में रणनीतिक पहलू का अभाव था।’
विश्लेषकों के मुताबिक पेलोसी की यात्रा से जो बाइडन प्रशासन के सामने अब उसके परिणामों से निपटने की नई चुनौती खड़ी हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने पिछले हफ्ते संवाददाताओं से बातचीत करते हुए कहा था कि पेलोसी का ताइवान जाना अच्छा विचार नहीं है। इसके बावजूद बाइडन प्रशासन पेलोसी को ताइवान न जाने के लिए समझा नहीं पाया। पर्यवेक्षकों ने इसे सत्ताधारी डेमोक्रेटिक पार्टी के सर्वोच्च नेतृत्व में संवादहीनता की निशानी माना है। उन्होंने ध्यान दिलाया है कि पेलोसी ने ताइवान का जाने का वह समय चुना, जब अमेरिकी कांग्रेस (संसद) अवकाश पर चली गई है। जब उसकी बैठक फिर शुरू होगी, तब तक नवंबर में होने वाले मिड टर्म चुनाव करीब आ चुके होंगे। आम समझ है कि इन चुनावों के बाद हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव में डेमोक्रेटिक पार्टी बहुमत गंवा देगी और पेलोसी के हाथ से स्पीकर पद चला जाएगा।
चीन ने पेलोसी के इस कदम को इस बात की पुष्टि माना है कि अमेरिका धीरे-धीरे वन चाइन पॉलिसी से मुकर रहा है। चीन की नजर में अमेरिका की यह नीति ही अमेरिका-चीन संबंधों की बुनियाद है। इसलिए आम समझ है कि पेलोसी की इस यात्रा से दोनों देशों के संबंधों को स्थायी नुकसान हुआ है।
मासाहीरो ओकोशी ने लिखा है- ‘बाइडन प्रशासन ने यह आकलन नहीं किया है कि पेलोसी से ताइवान से रवाना होने के बाद क्या होगा। उलटे इस यात्रा से चीन से तनाव घटाने का उसका दावा संदिग्ध हो गया है।’ वेबसाइट निक्कई एशिया के मुताबिक कई जापानी कंपनियां नए पैदा हुए संकट से निपटने के उपाय सोचने में जुट गई हैं। ऐसा ही कई अमेरिकी कंपनियों को भी करना पड़ सकता है। इस रिपोर्ट के मुताबिक यह पेलोसी की यात्रा का अवांछित परिणाम है।