Myanmar: रूसी विमान और हथियारों का गृह युद्ध में इस्तेमाल कर रहे हैं सैनिक शासक
Myanmar: मानव अधिकार संगठनों का आरोप है कि सैनिक शासक आम लोगों की बस्तियों को निशाना बना कर ‘युद्ध अपराध’ कर रहे हैं। इस संगठनों का आरोप है कि रूस इस ‘अपराध’ में म्यांमार का सहायक बना है...
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म्यांमार में सैनिक शासन विरोधी समूहों पर हो रही हवाई बमबारी में रूस से मिले लड़ाकू विमानों और अन्य हथियारों का इस्तेमाल बढ़ता जा रहा है। देश के कई अल्पसंख्यक नस्लीय समूह भी ऐसे हमलों का शिकार बन रहे हैं। एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक हाल के महीनों में म्यांमार की वायु सेना ने रूस मे बने याक-130 जेट विमानों और एमआई-35 हेलीकॉप्टरों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया है। इनके जरिए सरकार विरोधी गुटों के प्रभाव वाले इलाकों पर बमबारी की गई है, जिसका शिकार कई आम नागरिकों की बस्तियां भी बनी हैं।
मानव अधिकार संगठनों का आरोप है कि सैनिक शासक आम लोगों की बस्तियों को निशाना बना कर ‘युद्ध अपराध’ कर रहे हैं। इस संगठनों का आरोप है कि रूस इस ‘अपराध’ में म्यांमार का सहायक बना है। समझा जाता है कि म्यांमार के पास कम से कम 20 याक-130 लड़ाकू विमान हैं। दो सीटों वाले ये विमान वैसे तो पायलटों की ट्रेनिंग के लिए बनाए गए हैं, लेकिन म्यांमार के गृह युद्ध में इनका इस्तेमाल लगातार बढ़ता जा रहा है। बीते अक्तूबर में अमेरिकी थिंक टैंक जेन्स इन्फॉर्मेशन ग्रुप ने खबर दी थी कि उसे म्यांमार में रूसी हेलीकॉप्टरों के इस्तेमाल होने की सूचना मिली है। ग्रुप ने बताया था कि रूस में बने केमोव केए-29 टीबी हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल उत्तरी सगैन क्षेत्र में सैन्य शासन विरोधी समूहों के खिलाफ किया गया है।
पिछले वर्ष म्यांमार ने रूस के कई तरह के हथियार खरीदे। हाल ही में रूस ने उसे सुखोई एसयू-30 लड़ाकू विमानों की आपूर्ति की है, जिनका कई मकसदों से इस्तेमाल किया जा सकता है। बताया जाता है कि उन विमानों के साथ रूस ने अपने प्रशिक्षक और टेक्निशियन भी म्यांमार भेजे। म्यांमार के सैनिक शासन (जिसे स्टेट एडमिनिस्ट्रेशन काउंसिल यानी एसएसी के नाम से जाना जाता है) ने हाल के महीनों में अपने विरोधी संगठनों पर हमले लगातार तेज किए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इन हमलों को जारी रखने के लिए एसएसी पूरी तरह से रूसी सप्लाई पर निर्भर है।
वेबसाइट एशिया टाइम्स में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक एसएसी ने 2022 में रूस से अपने सैनिक संबंधों को खास मजबूती दी। इसका संकेत उसकी विदेश नीति में भी देखने को मिला है। उसने यूक्रेन पर रूस के हमले का खुल कर समर्थन किया है। एसएसी के प्रवक्ता मेजर जनरल जाव मिन तुन ने पिछले वर्ष फरवरी में यूक्रेन पर रूसी सैनिक कार्रवाई शुरू होने के बाद कहा था कि रूस ने अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए यह कदम उठाया है। साथ ही उन्होंने कहा था कि इस युद्ध से रूस ने ‘विश्व शक्ति’ के रूप में अपनी हैसियत की पुष्टि कर दी है।
विशेषज्ञों ने ध्यान दिलाया है कि म्यांमार के सैनिक तानाशाह जनरल मिन आंग हलायंग पिछले दो वर्षों के अंदर तीन बार रूस की यात्रा कर चुके हैं। जनरल मिन ने एक फरवरी 2021 को निर्वाचित शासन का तख्ता पलट कर म्यांमार की सत्ता अपने हाथ में ले ली थी। उसके बाद उन्होंने रूस से संबंध मजबूत किए, जिससे मिली मदद का इस्तेमाल वे सैन्य शासन विरोधी संघर्ध को दबाने में कर रहे हैं।