फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   myanmar Military Faces Allegations Of Conspiring Against Government

म्यांमार में सैनिक तख्ता पलट की अटकलों से बना भय का माहौल 

Sun, 31 Jan 2021 03:01 PM IST
अजय सिंह वर्ल्ड डेस्क, यंगून
वर्ल्ड डेस्क, यंगून Published by: अजय सिंह Updated Sun, 31 Jan 2021 03:01 PM IST
विज्ञापन
myanmar Military Faces Allegations Of Conspiring Against Government
म्यांमार में तख्ता पलट की अटकलें - फोटो : सोशल मीडिया

म्यांमार की सेना ने सफाई दे दी है कि देश में तख्ता पलटने का उसका कोई इरादा नहीं है, इसके बावजूद ऐसे कयासों का दौर यहां जारी है। दरअसल, शनिवार को ये स्पष्टीकरण सेना को इसीलिए देना पड़ा, क्योंकि कई दिनों से यहां ऐसी अटकलें लगाई जा रही थीं। गौरतलब है कि म्यांमार की नव निर्वाचित संसद की पहली बैठक सोमवार को होने वाली है। इसके ठीक पहले सेना के इरादे को लेकर संदेह पैदा हो गया है। हालात यहां तक पहुंचे कि अमेरिका और यूरोपियन यूनियन समेत एक दर्जन से अधिक दूतावासों ने यहां बयान जारी कर म्यांमार में सभी पक्षों से लोकतांत्रिक कायदों का पालन करने की अपील की। इसके पहले संयुक्त राष्ट्र ने भी ऐसी अपील की थी।

विज्ञापन

एक दशक पहले तक म्यांमार में सैनिक शासन था। ये सैनिक शासन लगभग 50 साल तक जारी रहा। इसलिए म्यांमार का लोकतंत्र अभी जड़ें नहीं जमा सका है। पिछले नवंबर में हुए संसदीय चुनाव में सत्ताधारी नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी (एनएलीडी) पर चुनावी धांधली करने के आरोप लगे थे। एनएलडी की भारी जीत हुई, लेकिन उसकी जीत को तब से संदेह की निगाह से देखा जाता रहा है।

विज्ञापन

इसी माहौल में पिछले हफ्ते सेना के प्रवक्ता ने सैनिक तख्ता पलट की संभावना से इनकार नहीं किया। प्रवक्ता से पूछा गया था कि क्या कथित राजनीतिक संकट के हल के लिए सेना अपने हाथ में सत्ता लेगी। तख्ता पलट का भय उस समय और बढ़ गया, जब सेनाध्यक्ष मिन आंग हलायंग ने पिछले बुधवार को यह कह दिया कि कुछ खास परिस्थितियों में देश के संविधान को रद्द किया जा सकता है। एक फरवरी से शुरू हो रहे संसदीय सत्र को देखते हुए पहले से ही यंगून में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था है। इसके मद्देनजर सेना के सत्ता हथिया लेने की अटकलें और मजबूत हो गई थीं।

विज्ञापन
विज्ञापन

शनिवार को सेना ने अपने बयान में कहा कि वह संविधान के अनुपालन के लिए प्रतिबद्ध है। एनएलडी ने इस बयान को उचित स्पष्टीकरण बताते हुए स्वीकार कर लिया है। आंग सान सू ची की पार्टी एनएनडी के प्रवक्ता मयो न्यूंत ने कहा कि उनकी पार्टी चाहती है कि सेना चुनाव के मामले में जनता की इच्छा को स्वीकार करने वाला संगठन रहे।

नवंबर के चुनाव में एनएलडी का मुख्य मुकाबला यूनियन सॉलिडरिटी एंड डेवलपमेंट पार्टी (यूएसडीपी) से हुआ था। यूएसडीपी को सेना का राजनीतिक संगठन माना जाता है। इस पार्टी ने फिर से चुनाव कराने की मांग की है। उसने चुनावी गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए लगभग 200 शिकायतें दर्ज कराई हैं। वह इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में ले गई है। म्यांमार में संविधान सेना ने ही तैयार कराया था। इसके तहत संसद में सेना के लिए 25 फीसदी सीटें रिजर्व रहती हैं। प्रमुख संस्थानों पर भी सेना का नियंत्रण है। इसके बावजूद 2015 और 2020 में हुए चुनावों में एनएलडी की भारी जीत हुई। इसलिए अतिरिक्त 25 फीसदी सीटें हाथ में रहने के बावजूद सेना नियंत्रित पार्टी सत्ता में आने लायक सीटें नहीं हासिल कर सकी।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि हालांकि सेना आज भी म्यांमार में राजनीतिक रूप से काफी मजबूत है, लेकिन सत्ता हथियाने की उसकी कोशिश को जनता का समर्थन मिलना अब मुश्किल है। यंगून स्थित तम्पादीपा इंस्टीट्यूट से जुड़े राजनीतिक विश्लेषक खिन जाव विन ने टीवी चैनल अल-जजीरा से कहा कि अगर ऐसा ने ऐसी कोशिश की, तो उसकी जनता में बहुत कड़ी प्रतिक्रिया होगी। लोगों के मन अभी भी सैनिक शासन की याद ताजा है और वे इसकी सोच से ही नफरत करते हैं। खिन ने कहा कि अगर सेना ने सत्ता हथियाई तो उसे सड़कों पर विरोध झेलना पड़ सकता है।

म्यांमार की संसद की 498 सीटों के लिए चुनाव कराए गए थे। इनमें से 396 सीटें एनएनडी ने जीतीं। जानकारों में इस बात पर एकमत हैं कि ये जनादेश इतना बड़ा है कि सेना के लिए इसकी अनदेखी करना आसान नहीं होगा। इसके बावजूद इस समय सैनिक तख्ता पलट का भय मंडरा रहा है।

 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed