Bangladesh-Myanmar Relations: यूनुस सरकार रखाइन में मदद के लिए गलियारे पर सहमत, BNP बोली- 'गंभीर चिंता की बात'
बांग्लादेश में मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने म्यांमार के रखाइन राज्य में राहत सामग्री पहुंचाने के लिए मानवीय गलियारा खोलने पर सैद्धांतिक सहमति दी है। इस पर बीएनपी नेता मीरा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने कहा कि सरकार को ऐसा बड़ा फैसला लेने से पहले सभी राजनीतिक दलों से परामर्श लेना चाहिए था। उन्होंने कहा कि हम नहीं चाहते कि बांग्लादेश एक दूसरा गाजा बन जाए।
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बांग्लादेश में मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने म्यांमार के रखाइन राज्य में राहत सामग्री पहुंचाने के लिए मानवीय गलियारा खोलने पर सैद्धांतिक सहमति दे दी है। इस पर बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया की बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने गंभीर चिंता जताई है।
बीएनपी के महासचिव मीरा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने सोमवार को एक रैली को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसा बड़ा फैसला लेने से पहले सभी राजनीतिक दलों से सलाह-मशविरा करना चाहिए था, क्योंकि यह फैसला हमारी स्वतंत्रता, संप्रभुता और भविष्य में क्षेत्रीय शांति को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने कहा, 'रिपोर्ट ने हमें चिंतित कर दिया है।'
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विदेश मामलों के सलाहकार ने प्रस्ताव पर सहमति की घोषणा की
अंतरिम सरकार के विदेश मामलों के सलाहकार एम तौहीद हुसैन ने रविवार को घोषणा की कि बांग्लादेश ने संयुक्त राष्ट्र के उस प्रस्ताव पर सैद्धांतिक सहमति दी है, जिसमें म्यांमार में चल रहे गृहयुद्ध के बीच रखाइन राज्य में सहायता पहुंचाने के लिए बांग्लादेश के रास्ते एक मानवीय गलियारा बनाने की बात कही गई है। शर्तों के बारे में विस्तार से बताने से इनकार करते हुए उन्होंने कहा, 'मैं विवरण में नहीं जाऊंगा, लेकिन शर्तें पूरी होती हैं, तो हम निश्चित रूप से सहायता प्रदान करेंगे।'
हम नहीं चाहते कि बांग्लादेश एक दूसरा गाजा बन जाए: आलमगीर
संयुक्त राष्ट्र ने पहले आशंका जताई थी कि रखाइन में गृहयुद्ध के कारण अकाल जैसी स्थिति बन सकती है, जिससे रोहिंग्या और अन्य जातीय समुदायों के लोग बांग्लादेश में शरण लेने आ सकते हैं। इस मुद्दे पर बोलते हुए, बीएनपी नेता आलमगीर ने कहा, 'हम नहीं चाहते कि बांग्लादेश एक दूसरा गाजा बन जाए। हम किसी युद्ध में शामिल नहीं होना चाहते। हम नहीं चाहते कि कोई यहां आकर हमारे लिए और परेशानी खड़ी करे। हम पहले से ही रोहिंग्या के साथ एक गंभीर समस्या में फंसे हैं।'
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संकट में फंसे लोगों की मदद के लिए खिलाफ नहीं बीएनपी
आलमगीर ने आगे कहा कि बीएनपी संकट में फंसे लोगों की मदद करने के खिलाफ नहीं है, लेकिन कोई भी फैसला करने से पहले सभी राजनीतिक दलों के साथ परामर्श की आवश्यकता है, क्योंकि 'हम नहीं चाहते कि कोई भी हमारे क्षेत्र में आकर नई मुसीबत खड़ी करे।'
अराकान सेना से बचने के लिए बांग्लादेश में घुस रहे रोहिंग्या
बीएनपी की यह प्रतिक्रिया उन रिपोर्टों के बीच आई है, जिनमें कहा गया है कि म्यांमार के विद्रोही गुट अराकान सेना से बचने के लिए हर दिन अधिक से अधिक रोहिंग्या बांग्लादेश में घुस रहे हैं। डेली स्टार अखबार ने सूत्रों के हवाले से कहा कि रोहिंग्या लोगों को हत्या, यातना और जबरन गायब किए जाने का खतरा है। विद्रोही गुट उन्हें जुंटा बलों के खिलाफ मानव ढाल की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं।
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