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Earthquake: म्यांमार पर चौतरफा मार... भूकंप के अलावा गृहयुद्ध, भुखमरी बड़ी चुनौती; सेहत के मोर्चे पर भी संघर्ष
Fri, 28 Mar 2025 10:40 PM IST
पवन पांडेय
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बैंकॉक
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बैंकॉक
Published by: पवन पांडेय
Updated Fri, 28 Mar 2025 10:40 PM IST
सार
Myanmar Earthquake: शुक्रवार को आए विनाशकारी भूकंप से पहले ही म्यांमार गृहयुद्ध की आग में जल रहा था। अब म्यांमार की स्थिति ऐसी है गृहयुद्ध के साथ-साथ उसे भूकंप के कारण हुई भीषण तबाही के बाद चौतरफा संकट का भी सामना करना पड़ेगा।
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म्यांमार में विनाशकारी भूकंप
- फोटो : PTI
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विस्तार
म्यांमार पहले से ही गृहयुद्ध और मानवीय संकटों से जूझ रहा था, अब एक शक्तिशाली भूकंप ने देश में हालात और बदतर बना दिया है। शुक्रवार को आए 7.7 तीव्रता के भूकंप और उसके बाद 6.4 तीव्रता के झटके ने देश के कई इलाकों में भारी तबाही मचाई है। मांडले के पास भूकंप का केंद्र था, जहां से भयंकर नुकसान की तस्वीरें सामने आई हैं। कई लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका है। वहीं देश में संचार व्यवस्था और आवाजाही पर सख्त नियंत्रण होने के कारण बचाव कार्य में कठिनाइयां भी आ रही हैं।
यह भी पढ़ें - Waqf Bill: 'बजट सत्र में ही पेश करेंगे वक्फ विधेयक', शाह बोले- प्रस्तावित कानून से डरने की जरूरत नहीं
म्यांमार में गृहयुद्ध और विस्थापन
म्यांमार 2021 से ही संकट में है, जब सेना ने आंग सान सू की की निर्वाचित सरकार को हटाकर सत्ता पर कब्जा कर लिया था। शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों को सेना ने हिंसक तरीके से दबा दिया, जिसके बाद बड़ी संख्या में लोग हथियार उठाने को मजबूर हो गए। आज देश के कई हिस्से गृहयुद्ध की चपेट में हैं। म्यांमार में चीन का भी प्रभाव है, जो 2023 के अंत में सीमा पर संगठित अपराध को रोकने की कोशिश में सैन्य गतिविधियों का समर्थन करता दिखा।
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करोड़ों लोगों को मानवीय सहायता की जरूरत
संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक, भूकंप से पहले ही 30 लाख से ज्यादा लोग अपने घरों से बेघर हो चुके थे। देश में 1.86 करोड़ लोगों को मानवीय सहायता की जरूरत है, लेकिन विदेशी सहायता में कटौती के कारण हालात और बिगड़ गए हैं। अमेरिका की तरफ से 90 दिनों के लिए विदेशी सहायता रोके जाने से म्यांमार के शरणार्थियों के लिए चिकित्सा सुविधाएं भी बंद हो गई हैं।
यह भी पढ़ें - Prisoners Release: 2014 के बाद विदेशी जेलों से 10 हजार भारतीय कैदियों को मुक्ति, जानिए किस देश से कितनी रिहाई
म्यांमार में भूखमरी की समस्या
वर्ल्ड फूड प्रोग्राम (डब्ल्यूएफपी) के अनुसार, म्यांमार में 1.52 करोड़ लोग अपनी बुनियादी खाद्य जरूरतें पूरी नहीं कर पा रहे हैं, जबकि 23 लाख लोग भुखमरी के गंभीर स्तर पर पहुंच चुके हैं। अप्रैल से खाद्य सहायता रोकने की चेतावनी दी गई है, क्योंकि फंड की कमी है। डब्ल्यूएफपी को राहत कार्य जारी रखने के लिए 60 मिलियन डॉलर (करीब 500 करोड़ रुपये) की जरूरत है। फिलहाल, केवल 35,000 जरूरतमंद लोगों को ही भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है।
दक्षिण-पूर्व एशियाई देश में स्वास्थ्य संकट
देश में स्वास्थ्य सेवाएं भी ठप होती जा रही हैं। यूएन मानवाधिकार परिषद के मुताबिक, टीबी और एचआईवी मरीजों को हफ्तों से दवाएं नहीं मिल रही हैं। विकलांग बच्चों को पुनर्वास केंद्रों से बाहर कर दिया गया है। खाने और पीने के पानी की आपूर्ति में भी कटौती हुई है। म्यांमार पहले से ही गंभीर संकट में था, लेकिन अब भूकंप ने हालात को और बदतर बना दिया है। राहत और बचाव कार्यों के लिए वैश्विक सहायता की सख्त जरूरत है।
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म्यांमार में गृहयुद्ध और विस्थापन
म्यांमार 2021 से ही संकट में है, जब सेना ने आंग सान सू की की निर्वाचित सरकार को हटाकर सत्ता पर कब्जा कर लिया था। शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों को सेना ने हिंसक तरीके से दबा दिया, जिसके बाद बड़ी संख्या में लोग हथियार उठाने को मजबूर हो गए। आज देश के कई हिस्से गृहयुद्ध की चपेट में हैं। म्यांमार में चीन का भी प्रभाव है, जो 2023 के अंत में सीमा पर संगठित अपराध को रोकने की कोशिश में सैन्य गतिविधियों का समर्थन करता दिखा।
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करोड़ों लोगों को मानवीय सहायता की जरूरत
संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक, भूकंप से पहले ही 30 लाख से ज्यादा लोग अपने घरों से बेघर हो चुके थे। देश में 1.86 करोड़ लोगों को मानवीय सहायता की जरूरत है, लेकिन विदेशी सहायता में कटौती के कारण हालात और बिगड़ गए हैं। अमेरिका की तरफ से 90 दिनों के लिए विदेशी सहायता रोके जाने से म्यांमार के शरणार्थियों के लिए चिकित्सा सुविधाएं भी बंद हो गई हैं।
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म्यांमार में भूखमरी की समस्या
वर्ल्ड फूड प्रोग्राम (डब्ल्यूएफपी) के अनुसार, म्यांमार में 1.52 करोड़ लोग अपनी बुनियादी खाद्य जरूरतें पूरी नहीं कर पा रहे हैं, जबकि 23 लाख लोग भुखमरी के गंभीर स्तर पर पहुंच चुके हैं। अप्रैल से खाद्य सहायता रोकने की चेतावनी दी गई है, क्योंकि फंड की कमी है। डब्ल्यूएफपी को राहत कार्य जारी रखने के लिए 60 मिलियन डॉलर (करीब 500 करोड़ रुपये) की जरूरत है। फिलहाल, केवल 35,000 जरूरतमंद लोगों को ही भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है।
दक्षिण-पूर्व एशियाई देश में स्वास्थ्य संकट
देश में स्वास्थ्य सेवाएं भी ठप होती जा रही हैं। यूएन मानवाधिकार परिषद के मुताबिक, टीबी और एचआईवी मरीजों को हफ्तों से दवाएं नहीं मिल रही हैं। विकलांग बच्चों को पुनर्वास केंद्रों से बाहर कर दिया गया है। खाने और पीने के पानी की आपूर्ति में भी कटौती हुई है। म्यांमार पहले से ही गंभीर संकट में था, लेकिन अब भूकंप ने हालात को और बदतर बना दिया है। राहत और बचाव कार्यों के लिए वैश्विक सहायता की सख्त जरूरत है।
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