फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Myanmar army havoc ICJ order neutralized, students injured in bomb attack in Rakhine province

म्यांमार: सेना का नहीं थम रहा कहर, आईसीजे का आदेश बेअसर, रखाइन प्रांत में बम हमला से 21 छात्र जख्मी

Sun, 16 Feb 2020 12:16 PM IST
देव कश्यप डिजिटल ब्यूरो, सितवे
डिजिटल ब्यूरो, सितवे Published by: देव कश्यप Updated Sun, 16 Feb 2020 12:16 PM IST
विज्ञापन
Myanmar army havoc ICJ order neutralized, students injured in bomb attack in Rakhine province
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : PTI

आखिर क्या वजह है कि म्यांमार के रखाइन प्रांत में सेना का कहर थम नहीं रहा है। रोहिंग्या मुसलमानों के पलायन के बावजूद वहां जो बची हुई रोहिंग्या आबादी है, वह लगातार सैन्य हमले झेल रही है। 13 फरवरी को रखाइन के बुथिडोंग शहर में एक स्कूल में बम से हुए धमाके में 21 बच्चे जख्मी हो गए। पिछले एक महीने के दौरान रखाइन में 11 लोग मारे गए हैं जबकि 51 जख्मी हो चुके हैं।

विज्ञापन


ताजा घटना में आर्टिलरी शेल से हुए हमले के दौरान क्लास के भीतर मौजूद छात्रों में दहशत और भगदड़ मच गई। 21 घायल छात्रों को अस्पताल में भर्ती कराया गया। स्थानीय लोगों के मुताबिक म्यांमार सेना और अराकान सेना के बीच सुबह करीब 9 बजे हिंसक झड़पें हुई थीं, उसके एक घंटे बाद स्कूल में यह हमला किया गया।

विज्ञापन

दरअसल रखाइन प्रांत में पिछले कई सालों से विद्रोही ताकतें और हमलावर गुट सक्रिय हैं और आरकन आर्मी के नाम से इन्होंने खुद को बेहद मजबूत कर रखा है। म्यांमार सेना के साथ इसका टकराव लगातार जारी है, जिसका खामियाजा वहां के स्थानीय लोगों को भुगतना पड़ता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

म्यांमार सेना पर यह आरोप लगते रहे हैं कि उसने रखाइन प्रांत में रह रहे लोगों और खासकर उन रोहिंग्या मुसलमानों पर जुल्म ढाए हैं और उन्हें पलायन के लिए मजबूर कर दिया है। हाल ही में अंतराष्ट्रीय अदालत (आईसीजे) ने म्यांमार को आदेश दिए थे कि वह रोहिंग्या मुसलमानों के खिलाफ हिंसा और उनका नरसंहार तत्काल रोके और उन्हें वापस सुरक्षित तरीके से अपने घर बुलाए। म्यांमार की नेता आंग सान सू ची ने अपनी सेना का बचाव करते हुए कहा था कि वहां जो सैन्य कार्रवाइयां होती रही हैं, वह चरमपंथी ताकतों के खिलाफ होती हैं, न कि सामान्य रोहिंग्या समुदाय के खिलाफ।

दरअसल म्यांमार के रखाइन में 2012 से सांप्रदायिक हिंसा जारी है। बांग्लादेश की सीमा से लगा रखाइन प्रांत म्यांमार के उत्तर पश्चिमी छोर पर है और 2014 की जनगणना के मुताबिक रखाइन की आबादी करीब 21 लाख है। इनमें से 20 लाख बौद्ध हैं और 29 हजार मुसलमान। इस जनगणना में 10 लाख लोगों को मुख्य तौर पर इस्लाम मानने वाले और मूल रूप से बांग्लादेशी मानकर शामिल ही नहीं किया गया जबकि ये लोग पिछली कई पीढ़ियों से वहां रहते आ रहे हैं। इन्हें ही रोहिंग्या कहा जाता रहा है। जाहिर है जब अपने ही देश में अजनबी होने का एहसास हुआ तो इनमें से कुछ विद्रोही गुट भी पैदा हो गए। यहीं से रोहिंग्या की समस्या दिनोंदिन जटिल होती गई।

खुद को जनगणना में शामिल न किए जाने और वहां की नागरिकता न मिलने से परेशान विद्रोही गुटों ने सबसे पहले 2017 के अगस्त में म्यांमार सेना के एक कैंप पर हमला किया और 12 सुरक्षाकर्मियों को मार डाला। इस हमले से बौखलाए म्यांमार सेना ने रोहिंग्या मुसलमानों के खिलाफ अभियान छेड़ दिया। लगातार हमले किए, सैकड़ों रोहिंग्या मारे गए और फिर रोहिंग्या मुसलमानों का पलायन शुरू हो गया। धीरे-धीरे यह 10 लाख की आबादी बांग्लादेश में आ गई और इनमें से कुछ ने भारत में भी शरण ली।

तब से यह जंग लगातार जारी है और म्यांमार बार-बार ये सफाई दे रहा है कि वह महज चरमपंथी ताकतों के खिलाफ अभियान चला रहा है, सामान्य नागरिकों या रोहिंग्या लोगों पर कोई जुल्म नहीं हो रहा। आईसीजे में भी म्यांमार ने यही तर्क रखा है।

लेकिन जिस तरह दो दिन पहले स्कूल पर हमला हुआ और बच्चों को जख्मी कर दिया गया। उससे साफ है कि उस इलाके में अब भी दहशत का माहौल बरकरार है और सेना का क्रूर चेहरा बीच बीच में सामने आ ही जाता है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed