{"_id":"605cf4818ebc3ee64703b6df","slug":"motion-to-criticize-india-on-caa-and-human-rights-issue-dropped-in-chicago-municipal-council","type":"story","status":"publish","title_hn":"शिकागो: सीएए और मानवाधिकार पर भारत की आलोचना का प्रस्ताव खारिज","category":{"title":"World","title_hn":"दुनिया","slug":"world"}}
शिकागो: सीएए और मानवाधिकार पर भारत की आलोचना का प्रस्ताव खारिज
Fri, 26 Mar 2021 02:07 AM IST
देव कश्यप
एजेंसी, वाशिंगटन
एजेंसी, वाशिंगटन
Published by: देव कश्यप
Updated Fri, 26 Mar 2021 02:07 AM IST
सार
- भारत के संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) एवं मानवाधिकार के मुद्दे पर आलोचना का प्रस्ताव।
- मेयर ने कहा- यह हमारा काम नहीं, 18 के मुकाबले 26 मतों से प्रस्ताव खारिज।
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
अमेरिका में न्यूयार्क के बाद शिकागो की सर्वाधिक ताकतवर नगर परिषद ने उस प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया है जिसमें भारत के संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) एवं मानवाधिकार के मुद्दे पर आलोचना की गई थी। शिकागो की मेयर लोरी लाइटफुल ने कहा, परिषद के कई सदस्य मतदान में असहज महसूस कर रहे थे क्योंकि हम नहीं जानते कि भारत में जमीन पर वास्तव में क्या हो रहा है।
विज्ञापन
भारत की आलोचना करने वाले इस प्रस्ताव को 18 के मुकाबले 26 मतों से खारिज कर दिया गया। लाइटफुट ने कहा, यह संघीय बाइडन प्रशासन का काम है कि वह ऐसे मुद्दे पर टिप्पणी करे या निर्णय ले। यह काम स्थानीय शहर सरकार का कतई नहीं है। मेयर ने एक सवाल के जवाब में कहा, नगर परिषद में प्रस्ताव को लेकर जो अनिच्छा दिखी उसकी वजह यह थी कि कई सदस्यों को मामले पर पर्याप्त जानकारी ही नहीं है।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि शिकागो के सामने अपनी ही कई समस्याएं हैं और मैं कहना चाहूंगी कि इस पद पर बैठकर मैं बाइडन प्रशासन से आगे नहीं जा सकती हूं। परिषद सदस्य रेमंड ए. लोपेज ने प्रस्ताव को विभाजनकारी करार दिया। उन्होंने कहा, मेरे कार्यालय से हजारों लोगों ने संपर्क किया और इस प्रस्ताव का विरोध किया। मैंने अपने सहयोगियों से कहा कि वे इस के पक्ष में मतदान न करें।
विज्ञापन
भारतीय दूतावास ने किया सभी सदस्यों से संपर्क
माना जा रहा है कि प्रस्ताव के पेश होने से पहले शिकागो स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास ने शहर के महापौर एवं शिकागो नगर परिषद के सभी 50 सदस्यों से संपर्क किया था। परिषद के सदस्य रेमंड लोपेज ने पुष्टि की कि भारतीय वाणिज्य दूतावास ने उनसे संपर्क किया और वे तभी समझ गए कि इस वृहद चर्चा पर इसका कितना प्रभाव है।
...तो चीन में उइगर सफाए पर चर्चा क्यों नहीं?
शिकागो नगर परिषद के सदस्य जॉर्ज ए कार्डनेस ने सवाल किया कि यदि भारत पर यहां चर्चा हो सकती है तो चीन में उइगर मुस्लिमों के सफाए पर क्यों नहीं हो सकती? उन्होंने कहा, क्यों न इस्राइल-फलस्तीन पर भी चर्चा हो? नाइजरिया में महिलाओं का बोको हरम द्वारा उत्पीड़न पर चर्चा कैसी रहेगी? अगर हम इस तरह के मुद्दे पर जाएंगे तो कई वैश्विक मुद्दे हैं। लेकिन हमें अपने घर पर ध्यान देने की जरूरत है।
काउंसिल ऑफ इस्लामी रिलेशन का हाथ
शिकागो के प्रमुख भारतीय-अमेरिकी डॉक्टर भरत बराई ने परिषद के फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि इस प्रस्ताव के पीछे काउंसिल ऑन अमेरिकन इस्लामिक रिलेशन है। उन्होंने कहा, उसकी भूमिका जांची जानी चाहिए। इस प्रस्ताव को परिषद की सदस्य मारिया हैड्डन ने प्रायोजित किया था। उनका कहना था कि प्रस्ताव दक्षिण एशियाई सहयोगियों से मिली जानकारी पर आधारित है।