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सूडान: बाजार पर सेना के ड्रोन हमले में 100 से अधिक लोगों की मौत: मानवाधिकार संगठन ने जताई चिंता

Wed, 28 Oct 2026 04:12 AM IST
नितिन गौतम पीटीआई, दारफुर
पीटीआई, दारफुर Published by: नितिन गौतम Updated Wed, 28 Oct 2026 04:12 AM IST
सार

सूडान के दारफुर प्रांत में हुए ड्रोन हमलों में 100 से ज्यादा लोगों के मारे जाने की खबर है। यह हमला सूडानी सेना द्वारा किया गया है। दारफुर विद्रोही अर्धसैनिक बलों के नियंत्रण में है। 

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More than hundred people killed in Sudan army drone attack on market updates
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

सूडान के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में स्थित दक्षिण दारफुर प्रांत की राजधानी न्याला में एक व्यस्त बाजार पर सूडानी सेना के ड्रोन हमले में 100 से अधिक लोगों की मौत हो गई। देश में हिंसा पर नजर रखने वाले मानवाधिकार संगठन 'इमरजेंसी लॉयर्स' ने मंगलवार को एक बयान में यह जानकारी दी। संगठन के मुताबिक, हमला सोमवार शाम को हुआ था, जिसमें 113 लोग घायल भी हुए। उसने बताया कि मारे गए और घायल हुए लोगों में बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे शामिल हैं। संगठन ने बाजार पर हमले के लिए सूडानी सेना को जिम्मेदार ठहराते हुए इसकी निंदा की।
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संगठन ने क्या बताया?
संगठन ने बयान में कहा, 'इस नरसंहार ने आम लोगों के बाजार को सामूहिक हत्या और घायलों के घटनास्थल में बदल दिया। यह हमला स्थानीय निवासियों की जान के लिए खतरा है और जारी युद्ध के बीच उनकी परेशानियों को और बढ़ाता है।' संगठन ने हमले की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की। इससे पहले, 'डॉक्टर्स विदाउट बॉर्डर्स' के नाम से पहचाने जाने वाले संगठन ने बताया था कि न्याला स्थित उसके अस्पताल में 36 शव लाए गए हैं।
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संगठन ने अपने आपातकालीन विभाग में 150 घायलों को देखने की भी जानकारी दी। दक्षिण दारफुर प्रांत की राजधानी न्याला पर अर्धसैनिक समूह 'रैपिड सपोर्ट फोर्सेज' (आरएसएफ) का नियंत्रण है। यह समूह 2023 से सूडानी सेना के साथ संघर्ष कर रहा है।
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दोनों तरफ से ड्रोन हमलों में हुई बढ़ोतरी
सूडान में जारी युद्ध में ड्रोन हमले लगातार इस्तेमाल किए जाते रहे हैं। हालांकि, पिछले कुछ हफ्तों में आरएसएफ और सूडानी सेना, दोनों की ओर से ड्रोन हमलों में भारी बढ़ोतरी हुई है, जिनमें सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है। दोनों पक्ष तेजी से विस्फोटकों से लैस ड्रोन का इस्तेमाल कर रहे हैं। कई मामलों में अस्पतालों, बांधों, स्कूलों, बाजारों और विस्थापित लोगों के शिविरों जैसे नागरिक ठिकानों को निशाना बनाया गया है।


संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक, इस संघर्ष में ड्रोन हमले आम नागरिकों के लिए सबसे घातक खतरा बन गए हैं। इस युद्ध ने दुनिया का सबसे बड़ा मानवीय संकट पैदा कर दिया है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, सूडान में करीब 3.4 करोड़ लोगों को सहायता की जरूरत है, जो देश की आबादी के लगभग दो-तिहाई हिस्से के बराबर है। सूडान में युद्ध अप्रैल 2023 में शुरू हुआ था। उस समय सेना और आरएसएफ के बीच लंबे समय से जारी तनाव ने राजधानी खार्तूम में खुले संघर्ष का रूप ले लिया और धीरे-धीरे पूरे देश में फैल गया।

 
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