म्यांमार: लोकतंत्र के साथ-साथ इंटरनेट का भी गला घोंट दिया है सैनिक शासकों ने
म्यांमार में एक जीबी डेटा के लिए एक डॉलर खर्च करना पड़ रहा है। जबकि पहले इसके लिए आधा डॉलर के बराबर रकम चुकानी पड़ती थी। सरकार ने एक और आदेश जारी करते हुए विक्रताओं के लिए सिम कार्ड बेचते वक्त 11 डॉलर की एक्टिवेशन फीस लेना जरूरी कर दिया गया...
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म्यांमार में सैनिक शासन के आदेश के कारण मोबाइल डाटा का मूल्य बीते दो महीनों में बढ़ कर दोगुना हो गया है। टीवी चैनल अल-जजीरा की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि इंटरनेट शुल्क लगातार बढ़ने का असर म्यांमार के आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ा है। इसके अलावा एक शिकायत यह भी है कि इंटरनेट की स्पीड पूरे देश में घटा दी गई है।
म्यांमार के सिविल सोसायटी कार्यकर्ताओं का कहना है कि सैनिक शासकों ने ये कदम सरकार विरोधी अभियान में रुकावट डालने के लिए उठाया है। देश में सैनिक तख्ता पलट हुए अब एक साल से अधिक गुजर चुका है। इस बीच देश में लोकतंत्र बहाली का आंदोलन जारी रहा है। इसमें कार्यकर्ता इंटरनेट का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल कर रहे थे। लेकिन अब उनके सामने नई समस्या पैदा हो गई है।
एक डॉलर में एक जीबी डाटा
इंटरनेट डाटा को महंगा करने की शुरुआत बीते दिसंबर में हुई। तब सरकार ने सभी डाटा प्लान के दाम बढ़ाने का आदेश इंटरनेट सेवादाता कंपनियों को दिया। अब म्यांमार में एक जीबी डेटा के लिए एक डॉलर खर्च करना पड़ रहा है। जबकि पहले इसके लिए आधा डॉलर के बराबर रकम चुकानी पड़ती थी। इंटरनेट सेवाओं को महंगा बनाने के लिए सैनिक शासन ने जनवरी में एक और कदम उठाया। उसने मोबाइल और फिक्स्ड लाइन इंटरनेट की सेवा देने वाली कंपनियों पर कॉरपोरेट टैक्स बढ़ा कर तीन गुना कर दिया। इससे ये कंपनियां अपनी सेवाओं के दाम बढ़ाने पर मजबूर हो गईं। इसके बाद सरकार ने एक और आदेश जारी किया, जिसके तहत विक्रताओं के लिए सिम कार्ड बेचते वक्त 11 डॉलर की एक्टिवेशन फीस लेना जरूरी कर दिया गया।
इसके अलावा सैनिक शासन ने साइबर सुरक्षा के कानून को भी और सख्त बनाने की पहल भी की है। इसके तहत देश में वीपीएन के इस्तेमाल को अवैध कर दिया जाएगा। वीपीएन का इस्तेमाल अकसर ब्लैकलिस्ट की गई वेबसाइटों और फेसबुक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स तक पहुंच बनाने के लिए किया जाता है। अभी ये प्रावधान कानून का हिस्सा नहीं बने हैं, लेकिन आरोप है कि अभी से इन पर अमल शुरू कर दिया गया है।
आम लोगों को हो रही है परेशानी
इंटरनेट स्वतंत्रता के लिए काम करने वाली संस्था एक्सेसनॉ के म्यांमार प्रतिनिधि वाइ फियो म्यिंत ने अल-जजीरा से कहा कि इंटरनेट सेवाओं को महंगा करने और साइबर सुरक्षा के कानून को सख्त करने की पहल से म्यांमार में सभी लोगों को दिक्कत हो रही है। उनमें वे लोग भी हैं, जो लोकतंत्र बहाली आंदोलन का हिस्सा नहीं हैं। उन्होंने कहा- ‘ये कदम यह सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए हैं कि देश की बहुसंख्यक जनता के लिए इंटरनेट का इस्तेमाल करना संभव ना रह जाए।’
पर्यवेक्षकों का कहना है कि एक फरवरी 2021 को हुए सैनिक तख्ता पलट के पहले म्यांमार में दूरसंचार इंडस्ट्री फूल-फल रही थी। वहां के लोगों को तीव्र रफ्तार वाली इंटरनेट सेवाएं उपलब्ध थीं। तब टेलीनोर म्यांमार नाम की कंपनी के सीईओ लार्स एरिक टेलमैन ने बताया था कि म्यांमार में औसतन हर व्यक्ति हर महीने 5.6 जीबी डेटा का इस्तेमाल करता है। 2022 तक इसमें भारी बढ़ोतरी का अनुमान लगाया गया था। लेकिन अब कहानी बिल्कुल उलटी हो गई है।