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Myanmar: सैनिक शासन को मान्यता नहीं, पुराने दूत यूएन में करते रहेंगे म्यांमार की नुमाइंदगी

Thu, 15 Dec 2022 03:21 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, यंगून
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, यंगून Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 15 Dec 2022 03:21 PM IST
सार

Myanmar: संयुक्त राष्ट्र में प्रतिनिधित्व के बारे में निर्णय नौ सदस्यों की क्रेडेंशियल कमेटी करती है। उसमें अमेरिका, रूस और चीन शामिल हैं। इस समिति ने अपनी बैठक में इस बारे में निर्णय को टाल दिया। इस कारण मौजूदा राजदूत क्याव मोये तुन अपने पद पर अभी बने रहेंगे...

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Military rule is not recognized, old envoy will continue to represent Myanmar in UN
Myanmar- Kyaw Moe Tun - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

म्यांमार का सैनिक शासन संयुक्त राष्ट्र में देश के राजदूत को हटाने में फिर नाकाम रहा है। इस राजदूत की नियुक्ति आंग सान सू ची के नेतृत्व वाली नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी (एनएलडी) की सरकार ने की थी। एनएलडी के निर्वाचित प्रतिनिधियों का तख्ता पलट कर म्यांमार की सेना ने एक फरवरी 2021 को सत्ता पर कब्जा जमा लिया था। लेकिन संयुक्त राष्ट्र में पुराने राजदूत ही अभी तक म्यांमार की नुमाइंगी कर रहे हैं।

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संयुक्त राष्ट्र में प्रतिनिधित्व के बारे में निर्णय नौ सदस्यों की क्रेडेंशियल कमेटी करती है। उसमें अमेरिका, रूस और चीन शामिल हैं। इस समिति ने अपनी बैठक में इस बारे में निर्णय को टाल दिया। इस कारण मौजूदा राजदूत क्याव मोये तुन अपने पद पर अभी बने रहेंगे। संयुक्त राष्ट्र की क्रेडेंशियल कमेटी की बैठक के बारे में दो राजनयिकों से मिली जानकारी के आधार पर वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम ने यह खबर छापी है। वेबसाइट के मुताबिक इस बार में संयुक्त राष्ट्र की तरफ से औपचारिक घोषणा शुक्रवार को की जाएगी।

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क्याव मोये तुन की नियुक्ति 2020 के आखिरी महीनों में कई गई थी। फरवरी 2021 में तख्ता पलट के क्याव ने सैनिक शासकों के प्रति निष्ठा जताने से इनकार कर दिया। वे आज भी खुद को एनएलडी सरकार का प्रतिनिधि बताते हैँ। एनएलडी के जबरन हटाए गए सांसदों ने नेशनल यूनिटी गर्वनमेंट नाम से भूमिगत सरकार बनाई हुई है। क्याव ने खुद को उसका ही नुमाइंदा घोषित कर रखा है।

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क्रेडेंशियल कमेटी के सामने पिछले साल भी म्यांमार की नुमाइंगदी का मुद्दा आया था। तब भी समिति ने फैसला टाल दिया था। उस वजह से क्याव अपने पद पर बने रहे। लेकिन खबरों के मुताबिक यूक्रेन के खिलाफ रूस की विशेष सैनिक कार्रवाई शुरू होने के बाद से संयुक्त राष्ट्र में इस मुद्दे पर बड़ी ताकतों के बीच मतभेद पैदा हो गए हैं। रूस अब म्यांमार की मौजूदा सरकार का समर्थन कर रहा है। इससे ये आशंका पैदा हुई है कि क्याव से उनका पद छिन सकता है। जानकारों के मुताबिक अगर मतभेद बढ़े तो संभव है कि इस मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र महासभा में मतदान करना पड़े।

फिलहाल, गैर सरकारी संगठन म्यांमार एकाउंटिबिलिटी प्रोजेक्ट ने एक बयान में कहा है- ‘सैनिक शासन को अस्वीकार कर संयुक्त राष्ट्र ने लोकतांत्रिक नेशनल यूनिटी गवर्नमेंट और राजदूत क्याव मोये तुन के म्यांमार की जनता का प्रतिनिधित्व करने के अधिकार को स्वीकार किया है।’

क्याव का अपने पद पर बने रहना म्यांमार के सैनिक शासन के लिए परेशानी का कारण रहा है। सैनिक शासन के मुखपत्र ग्लोबल न्यू लाइट ऑफ म्यांमार ने बीते सितंबर में एक आलेख में एनयूजी को आतंकवादी संगठन बताया था। इस आलेख में आरोप लगाया गया था कि कुछ विशेषज्ञ और पूर्व संयुक्त राष्ट्र अधिकारी ‘भगोड़े’ क्याव मोये तुन को मान्यता देकर ‘आतंकवादी’ एनयूजी का समर्थन कर रहे हैं। पिछले साल जब क्याव के मामले में फैसला टाल दिया गया था, तब सैनिक शासन ने कहा कि इस अनिर्णय से संयुक्त राष्ट्र की प्रतिष्ठा पर आंच आएगी।

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