फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   michael rubin says, If Pakistan attitude does not change then peace is not expected from Taliban

पाकिस्तान का रवैया नहीं बदला तो तालिबान समझौते से शांति की उम्मीद नहीं : थिंक टैंक

Tue, 18 Feb 2020 03:22 AM IST
संजीव कुमार झा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: संजीव कुमार झा Updated Tue, 18 Feb 2020 03:22 AM IST
सार

तालिबान से शांति समझौते की तैयारी में लगे ट्रंप प्रशासन को वॉशिंगटन स्थित थिंक टैंक माइकल रुबिन ने पाकिस्तान को लेकर चेतावनी दी है। रुबिन ने कहा कि पाकिस्तान के समर्थन के बिना अफगानिस्तान में आतंकवाद नहीं हो सकता, लेकिन अमेरिका उस ओर ध्यान नहीं दे रहा।

विज्ञापन
michael rubin says,  If Pakistan attitude does not change then peace is not expected from Taliban
माइकल रुबिन - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान समस्या के समाधान के बिना अफगानिस्तान या अमेरिका इस क्षेत्र में शांति की उम्मीद नहीं रख सकते। 14 फरवरी को लिखे लेख में रुबिन ने कहा, अफगानिस्तान में केवल शांति स्थापित करना ही चुनौती नहीं है, बल्कि वहां अमेरिकी हितों की सुरक्षा सबसे बड़ा सवाल है।

विज्ञापन


वहां तब तक शांति नहीं हो सकती जब तक पाकिस्तानी अधिकारी ये सोचते रहेंगे कि उन्होंने अमेरिका को हरा दिया और वह अपनी मर्जी से कोई भी काम कर सकता है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अफगानिस्तान में अमेरिका के विशेष प्रतिनिधि जल्मे खलीलजाद जब तक पाकिस्तान समस्या की अनदेखी करेंगे, न अफगानिस्तान में शांति होगी न अमेरिका सुरक्षित रहेगा।

विज्ञापन

जीत की घोषणा करने की जल्दबाजी में ट्रंप

अमेरिकन इंटरप्राइज इंस्टीट्यूट में रेसीडेंट स्कॉलर रुबिन ने लिखा है, अमेरिका की सबसे लंबी लड़ाई खत्म करने के उत्साह में ट्रंप प्रशासन पाकिस्तान की भूमिका भूल रहा है। अमेरिका को ऐसी रणनीतिक गलती नहीं करनी चाहिए।

न ही उसे फाइनेंशियल टास्क फोर्स में ब्लैकलिस्ट किए जाने के दुष्परिणामों से बचाना चाहिए, क्योंकि पाकिस्तान अपनी सीमा में आतंकियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर रहा। ट्रंप अफगानिस्तान में अपनी जीत की घोषणा करने की जल्दबाजी में हैं, लेकिन पाकिस्तान अब भी चुनौती बना है।

अमेरिका द्वारा तालिबान को पैदा करने से इनकार

अफगानिस्तान में प्रभाव बनाए रखने के लिए पाकिस्तान पर तालिबान के समर्थन के आरोप पुराने हैं। रुबिन ने इस तर्क को खारिज किया है कि अमेरिका ने अफगानिस्तान पर रूस के हमले से मुकाबले के लिए तालिबान को पैदा किया।

उन्होंने लिखा, रूसी आक्रमण के दौरान अमेरिका अफगान मुजाहिदीनों के साथ था, जो नॉर्दर्न अलायंस और मौजूदा अफगान सरकार के पूर्ववर्ती थे। तालिबान 1994 में पैदा हुआ।

अल-कायदा का भी पाक ने किया समर्थन 

रुबिन ने लिखा, जब रूस अफगानिस्तान से चला गया, तब पाकिस्तानी अधिकारी गुलबदीन हिकमतयार के साथ गोलबंद हुए, लेकिन तालिबान मजबूत होने लगा तो उसका समर्थन करने लगा। 9-11 के बाद अमेरिका ने तालिबान के खिलाफ कार्रवाई शुरू की, तब भी पाकिस्तान तालिबान को हथियार और पैसे उपलब्ध कराता रहा।

पाकिस्तान अफगानिस्तान में स्थायी सरकार नहीं चाहता था। पाकिस्तान ने अल-कायदा की भी मदद की और इसके संस्थापक ओसामा बिन लादेन को सुरक्षा उपलब्ध कराई। रुबिन ने लिखा कि ट्रंप एक सप्ताह के युद्ध विराम को अमेरिकी सेना के अफगानिस्तान छोड़ने के लिए अच्छा संकेत मान सकते हैं, लेकिन उन्होंने पाकिस्तान के इरादों को समझने की कोई कोशिश नहीं की है।

पुलवामा हमले की भी चर्चा

रुबिन ने भारत के पुलवामा हमले की चर्चा करते हुए लिखा है कि इस हमले और बालाकोट सर्जिकल स्ट्राइक के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ा तो पाकिस्तान ने अपनी सीमा में आतंकी संगठनों पर नकेल कसने का भरोसा दिलाया। एक साल बीत जाने के बाद लश्कर-ए-ताइबा जैसे संगठनों के खिलाफ कार्रवाई तो दूर की बात है, पाकिस्तान उनके लिए संयुक्त राष्ट्र से सहूलियतों की पैरवी कर रहा है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed