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मानसिक स्वास्थ्य: अमेरिका में फैल रही है दिमागी सेहत की समस्या, कंपनियों के लिए बढ़ी मुश्किल

Tue, 17 Aug 2021 02:32 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन Published by: Harendra Chaudhary Updated Tue, 17 Aug 2021 02:32 PM IST
सार

ये ट्रेंड देखने में आया है कि बड़ी संख्या में लोग भले वर्क फ्रॉम होम कर रहे हों, लेकिन उन्हें थकान ज्यादा महसूस हो रही है। हाल में हुए एक सर्वे में 44 फीसदी कर्मचारियों ने कहा था कि उन्हें अपने कामकाज के दौरान थकान महसूस होती है...

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mental health is become is serious issue in America corporate companies due to work from home
अवसाद - फोटो : पिक्साबे

विस्तार

अमेरिका में कर्मचारियों की मानसिक सेहत कंपनियों के लिए एक बड़ी चिंता बन गई है। इस वक्त कोरोना महामारी के बीच अमेरिकी कंपनियां अपने कर्मचारियों को अपने यहां बनाए रखने की जद्दोजहद में हैं। ऐसे में कहा जा रहा है कि वे कंपनियां ही लाभ में रहेंगी, जो प्रतिभाओं को अपने यहां बनाए रखने में सफल होंगी।

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वित्तीय और बीमा सेवा देने वाली द हार्टफॉर्ड के सीईओ क्रिस स्विफ्ट ने वेबसाइट एक्सियोस.कॉम से कहा- ‘आजकल हर जगह कर्मचारियों की कमी है। इसकी बड़ी वजह मानसिक स्वास्थ्य की समस्या का फैल जाना है।’ जानकारों का कहना है कि महामारी के लंबा खिंचने की वजह से लोगों को लगातार अलग-थलग रहना पड़ा रहा है। उन्हें कई दूसरे तरह के नुकसान का भी सामना करना पड़ा है। इससे मानसिक स्वास्थ्य की समस्या बदतर हो गई है। इसके असर से लोग थकान महसूस कर रहे हैं। उन्हें नशीली दवाओं की लत भी लग रही है।
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ये ट्रेंड देखने में आया है कि बड़ी संख्या में लोग भले वर्क फ्रॉम होम कर रहे हों, लेकिन उन्हें थकान ज्यादा महसूस हो रही है। हाल में हुए एक सर्वे में 44 फीसदी कर्मचारियों ने कहा था कि उन्हें अपने कामकाज के दौरान थकान महसूस होती है। ये सर्वे ह्यूमन रिसोर्स फर्म- रॉबर्ट हाफ ने किया। इसी एजेंसी के 2020 के सर्वे में कामकाज के दौरान थकान की शिकायत महसूस करने वाले कर्मचारियों की संख्या सिर्फ 34 फीसदी थी। लेकिन लगभग एक साल में इस समस्या से ग्रस्त कर्मचारियों में दस फीसदी का इजाफा हुआ है।
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ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक 2020 में नशीली दवाओं के ज्यादा सेवन के कारण मरने वाले लोगों की संख्या में 30 फीसदी का इजाफा हुआ। ये संख्या तकरीबन एक लाख रही। विश्लेषकों का कहना है कि मृत्यु की संख्या में इजाफा और नशीली दवाओं की लत बढ़ना भी कर्मचारियों की पैदा हुई कमी का एक कारण है।

हार्टफोर्ड की तरफ से कराए गए एक ताजा सर्वे के मुताबिक अमेरिका की 52 फीसदी कंपनियों ने ये कहा कि उन्हें कर्मचारी की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है। मार्च 2020 में ऐसा कहने वाली कंपनियों की संख्या 36 फीसदी ही थी। ताजा सर्वे में 31 फीसदी कंपनियों ने कहा कि कर्मचारियों में बढ़ी मानसिक स्वास्थ्य की समस्या का कंपनी पर बहुत खराब वित्तीय असर हो रहा है। मार्च 2020 में ये शिकायत सिर्फ 20 फीसदी कंपनियों ने जताई थी।

विशेषज्ञों ने कहा है कि कंपनियां अगर अपने कर्मचारियों को मानसिक स्वास्थ्य दिवस जैसे अवकाश दें और ऑनलाइन इलाज की सुविधाएं मुहैया कराएं तो उससे काफी लाभ हो सकता है। कार्य स्थलों पर मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल पर जोर देने वाली संस्था- माइंड शेयर पार्टनर्स की कार्यकर्ता केली ग्रीनवुड और नताशा क्रोल ने हाल मे हार्डवर्ड बिजनेस रिव्यू में लिखे एक लेख में कहा कि प्रबंधकों को नियमित रूप से कर्मचारियों की दिमागी सेहत की जांच करानी चाहिए। ऐसा वातावरण उपलब्ध कराना उनकी ही जिम्मेदारी है, जिससे कर्मचारी अपनी निजी समस्याओं पर खुल कर बात कर सकें।

लेकिन हार्टफॉर्ड के ताजा सर्वे में 72 फीसदी कंपनियों ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य के साथ जुड़ी प्रतिकूल सामाजिक भावना के कारण कर्मचारी उस बारे में कंपनी को सूचित नहीं करते। इसलिए कंपनियां उनकी मदद करने में अक्षम बनी रहती हैं।

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