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मार्क जकरबर्ग ने कहा- इंटरनेट कंटेंट की निगरानी अकेले नहीं कर सकते, दुनियाभर की सरकारों से मांगी मदद
Mon, 01 Apr 2019 12:38 PM IST
अनिल पांडेय
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Published by: अनिल पांडेय
Updated Mon, 01 Apr 2019 12:38 PM IST
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मार्क जुकरबर्ग (फाइल)
फेसबुक के संस्थापक मार्क जकरबर्ग ने कहा है कि सोशल मीडिया फेसबुक पर फेक न्यूज और हिंसक कंटेंट की निगरानी करना अकेले कंपनियों के बस की बात नहीं है। दुनियाभर की सरकारें इसमें सक्रिय भूमिका अदा कर सकती हैं। मार्क जुकरबर्ग ने कहा कि सरकारों को हानिकारक कंटेंट, चुनाव से जुड़ी सामग्री, निजता और डेटा पोर्टेबिलिटी को लेकर नियम बनाने चाहिए और इन्हें लागू कराने की जिम्मेदारी रेगुलेटरों पर होनी चाहिए। जकरबर्ग ने यह राय वाशिंगटन पोस्ट में लिखे अपने आलेख में दी है।
फेसबुक पर आरोप लगता रहा है कि वह फेक न्यूज और हिंसक कंटेंट के प्रसार पर लगाम लगाने में नाकाम रहा है। हलांकि फेसबुक ने कई बाद दावा किया कि वह इस दिशा में काम कर रही है।
लेकिन अब जकरबर्ग ने उपभोक्ताओं की निजता के मामले में यूरोपियन देशों के नियमों को बेहतर बताया है। उन्होंने कहा है कि अन्य देशों को भी यूरोप के जनरल डेटा प्रोटेक्शन रेगुलेशन (जीडीपीआर) कानून से सीख लेनी चाहिए। जकरबर्ग और इंटरनेट की अन्य कंपनियां अब तक सरकारों के ज्यादा दखल पर विरोध जताती रही हैं, लेकिन फेसबुक ने अब अपना रुख बदल लिया है।
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जकरबर्ग का बयान न्यूजीलैंड के क्राइस्टचर्च स्थित मस्जिद में हुए आतंकी हमले के दो हफ्ते बाद आया है। इस जघन्य हत्याकांड में 50 लोग मारे गए थे। हमलावर ने इस घटना का फेसबुक पर लाइव प्रसारण किया था। हालांकि बाद में फेसबुक ने इस पोस्ट को डिलीट कर दिया था लेकिन तब तक यह वीडियो कई वीडियो प्लेटफॉर्म पर शेयर किया जा चुका था।
जकबर्ग ने वाशिंगटन पोस्ट में लिखा, 'दुनियाभर के कानून निर्माता हमसे कहते हैं कि हमारे पास संवाद से जुड़ी बहुत बड़ी शक्ति है। मैं इससे सहमत भी हूं। इसलिए मैं चाहता हूं ऐसी स्वतंत्र इकाई हो जहां लोग हमारे फैसले पर अपील कर सकें। जहां यह तय किया जा सके कि क्या पोस्ट होना चाहिए और क्या हटा लिया जाना चाहिए।'
उन्होंने यह भी कहा कि नए नियम सभी टेक कंपनियों पर समान रूप से लागू होने चाहिए। इससे हानिकारक कंटेंट को अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर फैलने से रोकने में सहूलियत मिलेगी। जकरबर्ग ने कहा कि सभी टेक कंपनियों के लिए हर तिमाही में फाइनेंशियल आंकड़ों के साथ-साथ पारदर्शिता रिपोर्ट भी जारी करना अनिवार्य बना दिया जाना चाहिए।
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फेसबुक पर आरोप लगता रहा है कि वह फेक न्यूज और हिंसक कंटेंट के प्रसार पर लगाम लगाने में नाकाम रहा है। हलांकि फेसबुक ने कई बाद दावा किया कि वह इस दिशा में काम कर रही है।
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लेकिन अब जकरबर्ग ने उपभोक्ताओं की निजता के मामले में यूरोपियन देशों के नियमों को बेहतर बताया है। उन्होंने कहा है कि अन्य देशों को भी यूरोप के जनरल डेटा प्रोटेक्शन रेगुलेशन (जीडीपीआर) कानून से सीख लेनी चाहिए। जकरबर्ग और इंटरनेट की अन्य कंपनियां अब तक सरकारों के ज्यादा दखल पर विरोध जताती रही हैं, लेकिन फेसबुक ने अब अपना रुख बदल लिया है।
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जकरबर्ग का बयान न्यूजीलैंड के क्राइस्टचर्च स्थित मस्जिद में हुए आतंकी हमले के दो हफ्ते बाद आया है। इस जघन्य हत्याकांड में 50 लोग मारे गए थे। हमलावर ने इस घटना का फेसबुक पर लाइव प्रसारण किया था। हालांकि बाद में फेसबुक ने इस पोस्ट को डिलीट कर दिया था लेकिन तब तक यह वीडियो कई वीडियो प्लेटफॉर्म पर शेयर किया जा चुका था।
जकबर्ग ने वाशिंगटन पोस्ट में लिखा, 'दुनियाभर के कानून निर्माता हमसे कहते हैं कि हमारे पास संवाद से जुड़ी बहुत बड़ी शक्ति है। मैं इससे सहमत भी हूं। इसलिए मैं चाहता हूं ऐसी स्वतंत्र इकाई हो जहां लोग हमारे फैसले पर अपील कर सकें। जहां यह तय किया जा सके कि क्या पोस्ट होना चाहिए और क्या हटा लिया जाना चाहिए।'
उन्होंने यह भी कहा कि नए नियम सभी टेक कंपनियों पर समान रूप से लागू होने चाहिए। इससे हानिकारक कंटेंट को अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर फैलने से रोकने में सहूलियत मिलेगी। जकरबर्ग ने कहा कि सभी टेक कंपनियों के लिए हर तिमाही में फाइनेंशियल आंकड़ों के साथ-साथ पारदर्शिता रिपोर्ट भी जारी करना अनिवार्य बना दिया जाना चाहिए।
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लाइव स्ट्रीमिंग पर पाबंदियों पर विचार
चुनावों के दौरान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए जकरबर्ग ने कहा कि ऐसा करने वालों की पहचान के लिए सभी प्लेटफॉर्म पर एक जैसे मापदंड हों। निजता की सुरक्षा के लिए जकरबर्ग ने कहा कि जिस तरह यूरोपियन यूनियन ने जनरल डेटा प्रोटेक्शन रेगुलेशन (जीडीपीआर) तैयार किया है उसी तरह अन्य देशों को भी कानून बनाना चाहिए। बेहतर होगा कि पूरी दुनिया में इसके लिए एक जैसा कानून हो।
लाइव स्ट्रीमिंग पर पाबंदियों पर विचार
मार्क जकरबर्ग के लेख से पहले फेसबुक की ओर से जारी बयान में कहा गया था कि कंपनी लाइव स्ट्रीमिंग पर कुछ पाबंदियां लगाने पर विचार कर रही है। हालांकि कैसी पाबंदी होगी और इसे कैसे लागू किया जाएगा इस बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दी गई।
क्राइस्टचर्च मस्जिद हमले का फेसबुक पर सीधा प्रसारण की घटना के बाद से लाइव स्ट्रीमिंग पर रोक की मांग उठने लगी है। फेसबुक ने यह भी कहा था कि वह श्वेत राष्ट्रवाद और अलगाववाद विचारधारा पर लगाम लगाने के लिए कदम उठाएगी।
लाइव स्ट्रीमिंग पर पाबंदियों पर विचार
मार्क जकरबर्ग के लेख से पहले फेसबुक की ओर से जारी बयान में कहा गया था कि कंपनी लाइव स्ट्रीमिंग पर कुछ पाबंदियां लगाने पर विचार कर रही है। हालांकि कैसी पाबंदी होगी और इसे कैसे लागू किया जाएगा इस बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दी गई।
क्राइस्टचर्च मस्जिद हमले का फेसबुक पर सीधा प्रसारण की घटना के बाद से लाइव स्ट्रीमिंग पर रोक की मांग उठने लगी है। फेसबुक ने यह भी कहा था कि वह श्वेत राष्ट्रवाद और अलगाववाद विचारधारा पर लगाम लगाने के लिए कदम उठाएगी।