नेपाल: कम्युनिस्टों के मुकाबले के लिए खुद वामपंथी बन रही है नेपाली कांग्रेस?
नेपाली कांग्रेस ने 40 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को फ्री हेल्थ चेकअप की सहायता, नई मां बनी महिलाओं को पांच हजार रुपये का भत्ता, 65 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों का मुफ्त बीमा, खेती, मछली पालन और पशुपालन के लिए मुफ्त बिजली देने, और एग्रीकल्चर प्रोसेसिंग से जुड़ी गतिविधियों पर बिजली बिल आधा घटाने के वादे भी किए गए हैं...
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नेपाल में स्थानीय चुनावों के लिए सत्ताधारी नेपाली कांग्रेस ने जो घोषणापत्र जारी किया है, उस पर ‘लाल’ रंग चढ़ा दिख रहा है। नेपाली कांग्रेस परंपरागत रूप से पूंजीवाद की समर्थक मध्यमार्गी पार्टी रही है। लेकिन ताजा घोषणापत्र में उसने लोक लुभावन वादों की झड़ी लगा दी है। इसमें गर्भवती महिलाओं की फ्री मेडिकल जांच, वृद्धावस्था सहायता राशि पाने के लिए योग्यता उम्र घटाने, अंत्येष्टि के लिए आर्थिक सहायता देने आदि जैसे वायदे शामिल किए गए हैं।
नेपाली कांग्रेस ने 40 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को फ्री हेल्थ चेकअप की सहायता, नई मां बनी महिलाओं को पांच हजार रुपये का भत्ता, 65 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों का मुफ्त बीमा, खेती, मछली पालन और पशुपालन के लिए मुफ्त बिजली देने, और एग्रीकल्चर प्रोसेसिंग से जुड़ी गतिविधियों पर बिजली बिल आधा घटाने के वादे भी किए गए हैं।
जारी हैं सामाजिक सुरक्षा योजनाएं
नेपाली कांग्रेस के घोषणापत्र पर टिप्पणी करते हुए काठमांडू यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मैनेजमेंट में प्रोफेसर अच्युत वागले ने अखबार काठमांडू पोस्ट से कहा- ‘ऐसा लगता है कि कांग्रेस खुद को दूसरों से ज्यादा समाजवादी साबित करना चाहती है। उसने संकेत दिया है कि मुक्त बाजार अर्थव्यवस्था से हट कर उसने समाजवादी ढांचे की अर्थव्यवस्था को अपना लिया है। ऐसे वादे करने के कारण कम्युनिस्ट पार्टियों को चुनावी फायदे मिले हैं। अब ऐसा लगता है कि नेपाली कांग्रेस भी उपहार देकर मतदाताओं का समर्थन पाना चाहती है।’
काठमांडू पोस्ट की एक टिप्पणी में कहा गया है कि हालांकि कांग्रेस नेता यह नहीं मानते कि उन्होंने उदारवादी अर्थव्यवस्था का मॉडल छोड़ दिया है, लेकिन वे बन रही ऐसी धारणा को भी पसंद कर रहे हैं। पार्टी की सेंट्रल कमेटी के सदस्य गोविंद राज पोखारेल ने इस अखबार से कहा- ‘अतीत में हमारी सरकार ने सामाजिक सुरक्षा की कई योजनाएं लागू कीं। लेकिन हम उनका लाभ नहीं उठा सके। इसलिए अब हमने अपने सियासी नैरेटिव में सबसे आगे सामाजिक योजनाओं को रखा है।’
ओली सरकार ने भी जारी की थीं कई योजनाएं
पर्यवेक्षकों के मुताबिक पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की अध्यक्षता वाली कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूएमएल) अपने लोक लुभावन वादों का लाभ उठाती रही है। उसने 1990 के दशक से ही ऐसी योजनाओं पर अमल शुरू कर दिया था। 1994 में नेपाल में पहली कम्युनिस्ट सरकार मन मोहन अधिकारी के नेतृत्व में बनी थी। उसने बुजुर्गों के कल्याण की योजनाएं शुरू की थीं। बाद में दलितों, बच्चों, विधवाओं आदि के लिए भी कल्याण योजनाएं शुरू की गईं।
पिछली ओली सरकार ने कई नई कल्याण योजनाएं शुरू कीं। इन वजहों से इस पार्टी को गरीब तबकों का भारी समर्थन मिलता रहा है। अब ऐसा लगता है कि नेपाली कांग्रेस ने इस मोर्चे पर यूएमएल को टक्कर देने की रणनीति अपनाई है। लेकिन इस मुद्दे पर कांग्रेस में एकराय नहीं है। पूर्व वित्त मंत्री राम शरण महत और कुछ दूसरे नेताओं ने घोषणापत्र में सुधार की मांग की है। महत ने काठमांडू पोस्ट से कहा- ‘जो लोग गरीबी रेखा के नीचे हैं, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के जरिए उनकी मदद जरूर की जानी चाहिए। लेकिन हमारा मुख्य उद्देश्य टिकाऊ और उच्च आर्थिक विकास ही होना चाहिए।’ नेपाल मे स्थानीय चुनाव के लिए मतदान 13 मई को होगा।