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दुनिया के किन हिस्सों में कैसा नजर आया सदी का सबसे लंबा पूर्ण चंद्रग्रहण
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Updated Sat, 28 Jul 2018 04:50 AM IST
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ग्रीस के एथेंस का खूबसूरत नजारा
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भारत सहित पूरी दुनिया ने शुक्रवार रात सदी के सबसे लंबे चंद्रग्रहण का नजारा देखा। भारत में ज्यादातर जगहों पर बादलों के कारण इस चंद्र ग्रहण को नहीं देखा जा सका। हालांकि, कुछ जगहों पर रात 11:44 बजे से लोगों ने खगोलीय घटना का भरपूर लुत्फ लिया। पूर्ण चंद्र ग्रहण रात करीब 1 बजे शुरू हुआ। वहीं दुनिया के कई हिस्सों में चंद्रगहण को देखकर लोगों में उत्साह नजर आया।
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इस दुर्लभ घटना की खासियत थी कि 2018 में यह दूसरा मौका था जब ग्रहण के समय ब्लड मून दिखा। लेकिन यह साल की शुरुआत यानि कि जनवरी में पड़े चंद्रग्रह की तरह नहीं था जिसमें चांद ब्लू मून या सूपर मून की तरह उभरा था। हालांकि भारत में ग्रहण के पूरे समय चंद्रमा आसमान पर था इसलिए ग्रहण लगने से लेकर खत्म होने तक का शानदार नजारा दिखाई दिया। इससे पहले सबसे लम्बा पूर्ण चंद्रग्रहण 1700 साल पहले पड़ा था।
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विश्व के इन हिस्सों में दिखा चंद्रग्रहण
चंद्रग्रहण ऑस्ट्रेलिया, एशिया, अफ्रीका, यूरोप और साउथ अमेरिका के ज्यादातर हिस्सों में देखा गया। अमेरिका, कनाडा, मेक्सिको में ये ग्रहण बिल्कुल नहीं दिखा। रूस के उत्तरपूर्वी बड़े हिस्से में भी ग्रहण नहीं दिखाई दिया।
विज्ञान की भाषा में कहें तो चंद्र ग्रहण उस खगोलीय स्थिति को कहते हैं, जब चंद्रमा पृथ्वी के ठीक पीछे उसकी छाया में आ जाता है। ऐसा तब होता है जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा लगभग एक सीधी रेखा में आते हैं।
चंद्रग्रहण ऑस्ट्रेलिया, एशिया, अफ्रीका, यूरोप और साउथ अमेरिका के ज्यादातर हिस्सों में देखा गया। अमेरिका, कनाडा, मेक्सिको में ये ग्रहण बिल्कुल नहीं दिखा। रूस के उत्तरपूर्वी बड़े हिस्से में भी ग्रहण नहीं दिखाई दिया।
विज्ञान की भाषा में कहें तो चंद्र ग्रहण उस खगोलीय स्थिति को कहते हैं, जब चंद्रमा पृथ्वी के ठीक पीछे उसकी छाया में आ जाता है। ऐसा तब होता है जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा लगभग एक सीधी रेखा में आते हैं।
चांद के नजदीक ही दिखा मंगल भी
शुक्रवार-शनिवार की रात चंद्रग्रहण के नजदीक ही मंगल ग्रह भी दिखाई दिया। चंद्र ग्रहण के समय मंगल ग्रह कुछ ज्यादा ही बड़ा और चमकदार दिखाई दे रहा था। दरअसल, इस दौरान मंगल ग्रह पृथ्वी से महज 5.7 करोड़ कमी दूरी पर सूर्य की कक्षा में चक्कर लगा रहा था। खगोलशास्त्रियों के मुताबिक, यह दुर्लभ संयोग था। लाल ग्रह के काफी नजदीक होने के कारण चांद का रंग भी हल्का नारंगी दिखाई दे रहा था। दूरबीन से देखने पर चांद भी लाल दिखाई दे रहा था।
क्या होता है ब्लड मून?
जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक सीधी रेखा में होते हैं तो पूर्ण चंद्रग्रहण तब लगता है। सूर्य की रोशनी पृथ्वी के वातावरण से विक्षेपित होती है। जब चंद्रमा पूरी तरह पृथ्वी की परछाई में दाखिल होता है तो लाल रोशनी चंद्रमा पर गिरती है, जिससे वह लाल दिखता है।
शुक्रवार-शनिवार की रात चंद्रग्रहण के नजदीक ही मंगल ग्रह भी दिखाई दिया। चंद्र ग्रहण के समय मंगल ग्रह कुछ ज्यादा ही बड़ा और चमकदार दिखाई दे रहा था। दरअसल, इस दौरान मंगल ग्रह पृथ्वी से महज 5.7 करोड़ कमी दूरी पर सूर्य की कक्षा में चक्कर लगा रहा था। खगोलशास्त्रियों के मुताबिक, यह दुर्लभ संयोग था। लाल ग्रह के काफी नजदीक होने के कारण चांद का रंग भी हल्का नारंगी दिखाई दे रहा था। दूरबीन से देखने पर चांद भी लाल दिखाई दे रहा था।
क्या होता है ब्लड मून?
जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक सीधी रेखा में होते हैं तो पूर्ण चंद्रग्रहण तब लगता है। सूर्य की रोशनी पृथ्वी के वातावरण से विक्षेपित होती है। जब चंद्रमा पूरी तरह पृथ्वी की परछाई में दाखिल होता है तो लाल रोशनी चंद्रमा पर गिरती है, जिससे वह लाल दिखता है।
इस सदी का सबसे लंबा चंद्र ग्रहण शुक्रवार की रात हुआ। पूर्ण चंद्र ग्रहण करीब 1 घंटे 43 मिनट तक रहा। वैसे, चंद्र ग्रहण का कुल वक्त 6 घंटे 14 मिनट रहा। भारत में ज्यादातर जगहों पर बादलों के कारण इस चंद्र ग्रहण को नहीं देखा जा सका। हालांकि, कुछ जगहों पर रात 11:44 बजे से लोगों ने खगोलीय घटना का भरपूर लुत्फ लिया। पूर्ण चंद्र ग्रहण रात करीब 1 बजे शुरू हुआ।
रात 1:15 बजे चंद्रमा पूरी तरह से पृथ्वी की छाया में आ गया। यह स्थिति रात 2:43 बजे तक रही। इस दौरान चांद पूरी तरह से लाल दिखाई दिया, जिसे ब्लड मून कहा जाता है। चंद्र ग्रहण सुबह 4:48 बजे तक रहा। अब 9 जून, 2123 में इतना लंबा चंद्र ग्रहण देखने को मिलेगा। चंद्रमा और पृथ्वी के अपनी-अपनी धुरी में सबसे दूर होने के कारण यह सबसे लंबा चंद्र ग्रहण है।
रात 1:15 बजे चंद्रमा पूरी तरह से पृथ्वी की छाया में आ गया। यह स्थिति रात 2:43 बजे तक रही। इस दौरान चांद पूरी तरह से लाल दिखाई दिया, जिसे ब्लड मून कहा जाता है। चंद्र ग्रहण सुबह 4:48 बजे तक रहा। अब 9 जून, 2123 में इतना लंबा चंद्र ग्रहण देखने को मिलेगा। चंद्रमा और पृथ्वी के अपनी-अपनी धुरी में सबसे दूर होने के कारण यह सबसे लंबा चंद्र ग्रहण है।
9 जून, 2123 में बनेगा फिर ऐसा खगोलीय संयोग
यह है चंद्र ग्रहण
विज्ञान की भाषा में कहें तो चंद्र ग्रहण उस खगोलीय स्थिति को कहते हैं, जब चंद्रमा पृथ्वी के ठीक पीछे उसकी छाया में आ जाता है। ऐसा तब होता है जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा लगभग एक सीधी रेखा में आते हैं।
यह है चंद्र ग्रहण
विज्ञान की भाषा में कहें तो चंद्र ग्रहण उस खगोलीय स्थिति को कहते हैं, जब चंद्रमा पृथ्वी के ठीक पीछे उसकी छाया में आ जाता है। ऐसा तब होता है जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा लगभग एक सीधी रेखा में आते हैं।
चांद के नजदीक ही दिखा मंगल भी
शुक्रवार-शनिवार की रात चंद्रग्रहण के नजदीक ही मंगल ग्रह भी दिखाई दिया। चंद्र ग्रहण के समय मंगल ग्रह कुछ ज्यादा ही बड़ा और चमकदार दिखाई दे रहा था। दरअसल, इस दौरान मंगल ग्रह पृथ्वी से महज 5.7 करोड़ कमी दूरी पर सूर्य की कक्षा में चक्कर लगा रहा था। खगोलशास्त्रियों के मुताबिक, यह दुर्लभ संयोग था। लाल ग्रह के काफी नजदीक होने के कारण चांद का रंग भी हल्का नारंगी दिखाई दे रहा था। दूरबीन से देखने पर चांद भी लाल दिखाई दे रहा था।
शुक्रवार-शनिवार की रात चंद्रग्रहण के नजदीक ही मंगल ग्रह भी दिखाई दिया। चंद्र ग्रहण के समय मंगल ग्रह कुछ ज्यादा ही बड़ा और चमकदार दिखाई दे रहा था। दरअसल, इस दौरान मंगल ग्रह पृथ्वी से महज 5.7 करोड़ कमी दूरी पर सूर्य की कक्षा में चक्कर लगा रहा था। खगोलशास्त्रियों के मुताबिक, यह दुर्लभ संयोग था। लाल ग्रह के काफी नजदीक होने के कारण चांद का रंग भी हल्का नारंगी दिखाई दे रहा था। दूरबीन से देखने पर चांद भी लाल दिखाई दे रहा था।