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Lumpy Virus: व्यापक टीकाकरण से ही संभव है लंपी वायरस का इलाज, राजस्थान, पंजाब और गुजरात में तेजी से फैल रहा

Mon, 08 Aug 2022 05:21 AM IST
देव कश्यप एजेंसी, वाशिंगटन।
एजेंसी, वाशिंगटन। Published by: देव कश्यप Updated Mon, 08 Aug 2022 05:21 AM IST
सार

राजस्थान और गुजरात में तीन हजार मवेशी अब तक मर गए हैं, हजारों संक्रमित हैं। पंजाब में भी 400 से ज्यादा मवेशी मरने की सूचना है। संक्रमित मवेशियों में लंपी रोग लंबे समय तक बना रह सकता है। राजस्थान एसोसिएशन ऑफ नॉर्थ अमेरिका के कई सदस्यों ने राजस्थान में किसानों की मदद के लिए प्रयास शुरू किए हैं।

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Lumpy virus Treatment possible through widespread vaccination spreading rapidly in Rajasthan Punjab Gujarat
लंपी त्वचा रोग। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

भारत में मवेशियों खासकर गोवंश में बड़े स्तर पर फैल रहे लंपी रोग (लंपी स्किन डिजीज - एलएसडी) को रोकने के लिए प्रमुख भारतीय-अमेरिकी पशु चिकित्सक ने बड़े स्तर पर टीकाकरण की सलाह दी है। एक वायरस की वजह से होने वाला लंपी रोग राजस्थान, पंजाब और गुजरात में गाय-भैंसों में तेजी से फैल रहा है। इससे हजारों मवेशी मर रहे हैं।

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राजस्थान व गुजरात में तीन हजार मवेशी अब तक मर गए हैं, हजारों संक्रमित हैं। पंजाब में भी 400 से ज्यादा मवेशी मरने की सूचना है। संक्रमित मवेशियों में लंपी रोग लंबे समय तक बना रह सकता है। राजस्थान एसोसिएशन ऑफ नॉर्थ अमेरिका (राना) के कई सदस्यों ने राजस्थान में किसानों की मदद के लिए प्रयास शुरू किए हैं। इसी के तहत एसोसिएशन अध्यक्ष व भारतीय मूल के अमेरिकी पशुचिकित्सक रवि मोरारका ने रोग को फैलने और मवेशियों को बचाने के लिए कुछ सुझाव जारी किए।
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मानसून में बढ़ा खतरा
मोरारका ने कहा कि मानसून इस रोग को बढ़ाने में मददगार साबित हो सकता है। राजस्थान में हालात बेहद खराब हैं। अगर बड़े स्तर पर गाय व दूसरे मवेशी संक्रमित हुए तो किसानों की आर्थिक स्थिति को काफी चोट पहुंचेगी।

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  • तत्काल बड़े स्तर पर टीकाकरण शुरू हो
  • मवेशियों को एक से दूसरे जिले में ले जाना भी तुरंत बंद करें
  • खून चूसने, संक्रमण फैलाने वाले मच्छर-मक्खियों से बचाएं
  • संभव हो तो बाड़े के बाहर न निकालें
  • बाड़ा भी साफ, सूखा व मच्छर-मक्खी रहित बनाए रखें
  • रात के समय मवेशियों को एक से दूसरी जगह न ले जाएं
  • चूने खासतौर पर बिना बुझे चूने या कास्टिक चूने से पशु की खाल पर परत बनाएं, इससे कीड़ों से बचाव होगा।


विश्व में फैला वायरस
टीकों व टीकाकरण के वैश्विक गठबंधन गावी के अनुसार लंपी रोग की वजह कैप्रीपॉक्स वायरस है। यह पूरी दुनिया में मवेशियों को परेशान करता है। खून चूसने वाले कीड़ों के जरिए एक से दूसरे मवेशी में फैलता है।


पहचानें संक्रमण
मवेशी की खाल पर गोल गांठें नजर आती हैं। वजन तेजी से घटता है, बुखार व मुंह पर छाले आते हैं। नाक व मुंह से लार भी ज्यादा बहती है। उसका दूध उत्पादन कम होने लगता है। गाय या भैंस का गर्भपात हो सकता है। रोग बढ़ने पर मवेशी की मौत हो जाती है। 

दो मरीजों में मिला पश्चिम अफ्रीकी क्लैड
देश के पहले दो मरीजों में मंकीपॉक्स वायरस का पश्चिम अफ्रीकी क्लैड मिला है। वैज्ञानिकों ने दोनों के सैंपल की जीनोम सीक्वेंसिंग पूरा करने के बाद यह जानकारी एक अध्ययन के जरिए सार्वजनिक की है। मंकीपॉक्स एक डीएनए वायरस है और अभी तक इसके दो क्लैड सबसे अधिक प्रसारित हुए हैं। इनमें से एक पश्चिम अफ्रीका क्लैड है और दूसरा कांगो बेसिन नाम से जाना जाता है जिसके सबसे अधिक मामले यूरोप और अमेरिका में मिल रहे हैं।


‘अमर उजाला’ ने 29 जुलाई के अंक में यह जानकारी पाठकों को दी। पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (एनआईवी) की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. प्रज्ञा यादव ने बताया कि केरल में मिले दोनों संक्रमित मरीजों में पश्चिम अफ्रीका क्लैड मिला है जिसे ए.2 के नाम से जानते हैं जबकि मौजूदा समय में कांगो बेसिन यानी बी.1 क्लैड सबसे अधिक प्रसारित हो रहा है। डॉ. यादव के अनुसार इससे पता चलता है कि भारत में मंकीपॉक्स वायरस गंभीर नहीं है।

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