US: आतंकवाद के सफाए में पाकिस्तान करे मजबूती से सहयोग, अमेरिकी निशाने पर टीटीपी
अमेरिकी विदेश विभाग के उप प्रवक्ता वेदांत पटेल ने कहा कि कुछ देश पाकिस्तान की तरह आतंकवाद का सामना कर रहे हैं। तहरीक-ए तालिबान पाकिस्तान (TTP) जैसे संगठन क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बने हुए हैं और ये देश इनसे निपटने के लिए मिलकर काम करने में मंशा रखते हैं।
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राष्ट्रपति जो बाइडन द्वारा पाकिस्तान को दुनिया के सबसे खतरनाक देशों में से एक बताए जाने और उसके परमाणु हथियारों की सुरक्षा पर चिंता जताने के बाद अमेरिका ने उससे नई पेशकश की है। अमेरिका ने कहा है कि क्षेत्रीय व वैश्विक आतंकवाद के सफाए के लिए पाकिस्तान की ओर से सक्रिय व मजबूत सहयोग चाहिए। आतंकी संगठन क्षेत्रीय व विश्व सुरक्षा के लिए खतरा बने हुए हैं।
अमेरिकी विदेश विभाग के उप प्रवक्ता वेदांत पटेल ने कहा कि कुछ देश पाकिस्तान की तरह आतंकवाद का सामना कर रहे हैं। तहरीक-ए तालिबान पाकिस्तान (TTP) जैसे संगठन क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बने हुए हैं और ये देश इनसे निपटने के लिए मिलकर काम करने में मंशा रखते हैं।
पटेल ने कहा कि हम आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए पाकिस्तान के साथ मजबूत साझेदारी चाहते हैं। इसके साथ ही उससे सभी आतंकवादियों और आतंकी संगठनों के खिलाफ निरंतर कार्रवाई की उम्मीद करते हैं। सभी क्षेत्रीय और वैश्विक आतंकी खतरों का खात्मा करने के लिए सामूहिक प्रयासों की जरूरत है। बता दें, भारत भी पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद से लंबे समय से जूझ रहा है। इसलिए तमाम विश्व मंचों पर वह दुनियाभर में आतंकवाद के सफाए की मांग लगातार कर रहा है।
पाकिस्तान ने किया था अमेरिकी राजदूत को तलब
इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के बयान से खफा होकर पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने इस्लामाबाद स्थित अमेरिकी राजदूत को तलब कर आधिकारिक रूप से विरोध जताया था। बाइडन द्वारा पाकिस्तान को दुनिया का सबसे खतरनाक देश बताने जाने पर पीएम शाहबाज शरीफ ने भी कड़ी आपत्ति जताई थी। अमेरिकी राजदूत को तलब किए जाने को लेकर जब अमेरिकी उप प्रवक्ता वेदांत पटेल से जब सवाल किया गया तो उन्होंने सवालों का जवाब देने से परहेज किया। पटेल ने पाकिस्तान सरकार की आपत्ति को लेकर भी कल किसी टिप्पणी से इनकार कर दिया था।
निजी राजनयिक मुलाकातों पर टिप्पणी नहीं
पटेल ने कहा कि अमेरिका व पाकिस्तान के अधिकारियों की नियमित मुलाकातें निश्चित अंतराल के बाद होती रहती हैं। यह एक मानक प्रक्रिया है। खास मुलाकातों के बारे में हम कोई टिप्पणी नहीं करते हैं। हम निजी राजनयिक मुलाकातों का भी कोई ब्योरा नहीं देते।