भारतीय सेना के अधिकारी अनिल पुरी ने पूरी की 1200 किमी की फ्रांस साइकिल रेस
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भारतीय सेना के अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल अनिल पुरी पहले ऐसे सर्विंग जनरल बन गए हैं जिन्होंने फ्रांस की 1200 किलोमीटर की साइकिल रेस पूरी कर ली है। यह रेस फ्रांस का एक पुराना कार्यक्रम है। उन्होंने पेरिस-ब्रेस्ट-पेरिस के सर्किट की 1200 किलोमीटर की रेस गुरुवार को पूरी की। पुरी की उम्र 56 साल है और उन्होंने लगातार रामबोयुईलेट से 90 घंटे तक साइकिल चलाई।
इस रेस में भारत से 367 लोगों ने हिस्सा लिया। जिसमें से केवल 80 अरडोस ट्रेक को पूरा कर पाए। वहीं बाकी बीच में ही रेस छोड़कर चले गए। रेस में कुल 6,500 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया था जो 60 देशों से आए थे। यह साइकलिंग इवेंट कितना मुश्किल होता है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि एक प्रतिभागी को सर्किट के दौरान लगभग 31,000 फीट की ऊंचाई पर चढ़ना पड़ता है जो माउंट एवरेस्ट फतह करने के बराबर है।
Lieutenant General Anil Puri has become first serving general of the Indian Army to complete France's oldest cycling event, 1,200-km Paris-Brest-Paris circuit. The 56 years old officer completed the circuit on 23 August by cycling non-stop for 90 hours, without sleep. pic.twitter.com/3s2rUZvCjb
— ANI (@ANI) August 25, 2019
प्रतिभागी को लगभग चार दिनों तक बिना सोए इस रेस को पूरा करना पड़ता है। लेफ्टिनेंट जनरल पुरी भारत के उन छह सेना अधिकारियों में शामिल हो गए हैं जिन्होंने अपने करियर के दौरान कम से कम 1,000 किलोमीटर बिना रुके लगातार साइकिलिंग की है। पुरी ने 23 अगस्त को अपनी रेस पूरी की।
रेस पूरी करने के बाद पुरी ने कहा, 'मनुष्य का दिमाग एक बहुत अच्छी मशीन है जिसे उत्साहित रखने की आवश्यकता होती है। यह उत्साह बदलाव से आता है। हमें अपने दिमाग को उत्साहित करने के लिए हर तीन से पांच साल में भौतिक और इलेक्ट्रॉनिक क्षेत्र में अपने हितों और शौक को बदलने की जरूरत होती है। घटनाक्रम का पूरा अनुभव रोमांचक था क्योंकि यह आपको सिखाता है कि प्रकृति पर आप कभी विजय प्राप्त नहीं कर सकते।'
रेस के दौरान प्रतिभगियों को विभिन्न बिंदुओं पर 35 से तीन डिग्री सेल्सियस के बीच की मौसमी परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा दोनों दिशाओं से आने वाली तेज हवाएं लगातार प्रतिभागियों के शारीरिक धीरज को चुनौती देती रहती हैं। लेफ्टिनेंट जनरल ने कहा, 'हम भारतीयों पहाड़ी इलाकों पर साइकिल नहीं चलाते हैं। हमारे ज्यादातर शहर समतल हैं। इसलिए मांसपेशियों के खराब विकास के कारण हम आसानी से थक जाते हैं।'