अमेरिका: गर्भपात रोकने के लिए टेक्सस राज्य का कानून बना बाइडन की नई मुसीबत
कानून में गर्भ धारण के छह हफ्तों के बाद गर्भपात कराने को अपराध बना दिया गया है। इसमें प्रावधान किया गया है कि ऐसी कोई घटना की खबर मिलने पर कोई भी नागरिक आरोपी महिला और गर्भपात कराने वाले क्लीनिक और डॉक्टर-नर्सों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा सकेगा...
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अमेरिका के टेक्सस राज्य में गर्भपात रोकने के लिए पास हुए कानून से गरमाए माहौल के बीच राष्ट्रपति जो बाइडन को भी इस मसले पर अपनी चुप्पी तोड़नी पड़ी है। बाइडन अपने राष्ट्रपति कार्यकाल में अब तक इस मुद्दे पर बोलने से ज्यादातर समय बचते रहे थे। टेक्सस के कानून पर रोक लगाने से बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया। इससे ये कानून अमल में आ गया है। इस बीच खबर है कि रिपब्लिकन पार्टी के शासन वाले कई दूसरे राज्यों में भी टेक्सस की तर्ज पर गर्भपात विरोधी कानून बनाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
मानव अधिकार कार्यकर्ताओं ने टेक्सस के कानून को महिला अधिकारों पर आक्रमण बताया है। इस कानून में गर्भ धारण के छह हफ्तों के बाद गर्भपात कराने को अपराध बना दिया गया है। इसमें प्रावधान किया गया है कि ऐसी कोई घटना की खबर मिलने पर कोई भी नागरिक आरोपी महिला और गर्भपात कराने वाले क्लीनिक और डॉक्टर-नर्सों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा सकेगा। आरोप साबित होने पर मुकदमा दर्ज कराने वाला व्यक्ति आरोपियों से दस हजार डॉलर का मुआवजा पाने का अधिकारी होगा।
गुरुवार को एक बयान में राष्ट्रपति बाइडन ने टेक्सस के कानून को ‘महिलाओं के संवैधानिक अधिकारों पर अभूतपूर्व हमला’ बताया। पर्यवेक्षकों ने कहा है कि इसके पहले बाइडन ने गर्भपात के मसले पर इतनी सख्त भाषा का इस्तेमाल कभी नहीं किया था। बाइडन ने कानून में शामिल किए गए प्रावधानों को ‘विचित्र’ कहा। उन्होंने कहा कि इससे संवैधानिक अफरातफरी मच सकती है। इसके साथ ही राष्ट्रपति ने संकल्प जताया कि वे गर्भपात कराने के महिलाओं के अधिकार की रक्षा करेंगे। लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक राष्ट्रपति ऐसा कैसे करेंगे, यह साफ नहीं है। व्हाइट हाउस ने अब तक यह नहीं बताया है कि वह इस मामले में क्या ठोस कदम उठाने का इरादा रखता है।
मीडिया रिपोर्टों में बताया गया है कि एक दर्जन से ज्यादा राज्यों में टेक्सस जैसा कानून बनाने की प्रक्रिया चल रही है। कई राज्यों में पारित हुए ऐसे कानून को या तो उस राज्य की अदालत या फिर सुप्रीम कोर्ट ने रोक दिया था। लेकिन टेक्सस के कानून को दोनों स्तरों पर अदालती हरी झंडी मिल गई है। पर्यवेक्षकों के मुताबिक ये फैसला अब उन राज्यों के मामले में भी मिसाल बन सकता है।
जिन राज्यों के कानून को अदालतों ने रद्द कर दिया था, उनमें नॉर्थ डकोटा, आयोवा, अरकंसास, अलाबामा, मिसिसिपी और जॉर्जिया शामिल हैं। उनके अलावा भी कई राज्यों में कानून पारित किए गए हैं, जिन पर फिलहाल रोक लगी हुई है। कानून के जानकारों का कहना है कि अब इन राज्यों में संबंधित कानून को टेक्सस की तर्ज पर लिख कर पारित कराया जा सकेगा।
आलोचकों का कहना है कि बाइडन प्रशासन ने पहले ऐसे कानूनों को गंभीरता से नहीं लिया। वह इस भ्रम में रहा कि सुप्रीम कोर्ट इन कानूनों को रद्द कर देगा। डेमोक्रेटिक पार्टी के चुनाव सर्वेक्षकों में से एक मार्क मेलमैन ने टीवी चैनल सीएनएन से कहा- ‘डेमोक्रेटिक पार्टी के लिए ताजा घटना नीतिगत रूप से विनाशकारी है। लेकिन इससे अब पार्टी नेताओं को यह समझ में आएगा कि गर्भपात के अधिकार का मुद्दा ऐसा नहीं है, जिसे अंतिम रूप से सुलझा हुआ समझ लिया जाए।’