Russia vs Ukraine: जापोरिज्जिया परमाणु संयंत्र का आखिरी रिएक्टर हुआ बंद, आइलैंड मोड पर कर रहा काम
इससे पहले इलाके में हो रही रूस और यूक्रेन के बीच जंग में छह रिएक्टर वाले जापोरिज्जिया संयंत्र की सभी बिजली लाइनों को काट दिया गया था। इतना ही नहीं, बीते सप्ताह उसे यूक्रेन के बिजली ग्रिड से हटा दिया गया था।
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रूस की ओर से 24 फरवरी 2022 को शुरु हुआ युद्ध थमने का नाम नहीं ले रहा है। रूसी सेना लगातार यूक्रेनी शहरों को निशाना बना रही है। इस बीच, यूरोप के सबसे बड़े जापोरिज्जिया परमाणु संयंत्र के आखिरी रिएक्टर को भी बंद कर दिया गया है। इससे पहले जापोरिज्जिया परमाणु संयंत्र को एक बार फिर से यूक्रेन के बिजली ग्रिड से जोड़ दिया गया। दरअसल, ऐसा इसलिए किया गया है ताकि इलाके में लड़ाई तेज होने की स्थिति में परमाणु विकिरण से बचा जा सके। गौरतलब है कि युद्ध के शुरुआती दिनों में ही रूस ने इस संयंत्र को अपने कब्जे में ले लिया था और इस पर गोलीबारी की थी। जिसके बाद, अंतरराष्ट्रीय परमाणु उर्जा एजेंसी (आईएईए) के प्रमुख ने यूक्रेन में परमाणु उर्जा संयंत्र पर गोलीबारी के बारे में गभीर चिंता भी व्यक्त की थी।
इससे पहले इलाके में हो रही रूस और यूक्रेन के बीच जंग में छह रिएक्टर वाले जापोरिज्जिया संयंत्र की सभी बिजली लाइनों को काट दिया गया था। इसके बाद बीते सप्ताह उसे यूक्रेन के बिजली ग्रिड से हटा दिया गया था। इसके बाद जापोरिज्जिया परमाणु संयंत्र 'आइलैंड मोड' पर काम कर रहा था। साधारण शब्दों में समझें तो 'आइलैंड मोड' का तात्पर्य ऐसे संयंत्र से होता है, जो उर्जा के अन्य साधनों या संयंत्रों से जुड़ा नहीं होता है।
इसके बारे में परमाणु ऑपरेटर कंपनी एनर्गोएटम ने जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बिजली की लाइनों में से एक को शनिवार देर रात फिर से संयंत्र के साथ जोड़ा गया है। हालांकि रूस ने इलाके पर कब्जा बना रखा है, ऐसे में कभी भी बिजली काटी जा सकती है। ऐसे में संयंत्र को रिएक्टरों को ठंडा रखने तथा परमाणु रिएक्टर को अत्यधिक गर्म होने से बचाने के लिए आपात डीजल जेनरेटर चलाने पड़ेंगे। हाल ही में कंपनी ने बताया था कि उसके पास मात्र 10 दिनों के लिए ही डीजल बचा है। ऐसे में ये एक बड़ी समस्या है।
यूक्रेन ने दिया रूस को झटका
वहीं, इस बीच यूक्रेनी सैनिकों ने रूस को करारा झटका देने की खबर भी आई है। दरअसल, यूक्रेनी सैनिक रूस के मजबूत कब्जे वाले खारकीव प्रांत के इजियम शहर में दाखिल हो गए हैं। इस बीच रूसी रक्षा मंत्रालय ने खारकीव से अस्थाई तौर पर अपने सैनिकों को वापस बुला लिया है। भले ही रूस के इस मामले में अपने अलग तर्क हों, लेकिन उसका यह फैसला जंग का निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है। रूस के लिए मार्च में कीव गंवाने के बाद इसे दूसरा सबसे बड़ा झटका माना जा रहा है।
बदल सकता है रुख
यूक्रेन पर हमला करने के बाद रूसी सैनिकों ने एक सप्ताह के भीतर ही खारकीव के इजियम शहर पर कब्जा जमा लिया था। इजियम रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण रसद मार्ग है। रूसी सैनिकों के यहां से पीछे हटने के ठीक बाद यूक्रेन ने यहां के कुपियांस्क रेलवे जंक्शन पर भी कब्जा जमा लिया। इससे रूस के लिए दोनाबास में रसद पहुंचाने का रास्ता पूरी तरह से बंद हो गया। इसके अलावा रूसी सैनिक बड़ी संख्या में यहां गोला-बारूद के भंडार और उपकरणों को भी छोड़कर वापस लौट गए। यह भी रूस के लिए बड़ा नुकसान माना जा रहा है।