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India-Russia Ties: रूसी तेल आयात बंद करेगा भारत? क्रेमलिन बोला- वे किसी भी आपूर्तिकर्ता से खरीदने को स्वतंत्र
Wed, 04 Feb 2026 09:13 PM IST
राहुल कुमार
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मॉस्को
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मॉस्को
Published by: राहुल कुमार
Updated Wed, 04 Feb 2026 09:13 PM IST
सार
रूस ने कहा है कि भारत किसी भी देश से तेल खरीदने को स्वतंत्र है। अमेरिका के साथ ट्रेड डील के बाद क्रेमलिन ने बुधवार को कहा कि कच्चे तेल के आपूर्तिकर्ताओं में विविधता लाने का उसका फैसला कोई नया नहीं है। जानिए क्या है पूरा मामला
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व्लादिमीर पुतिन और पीएम मोदी
- फोटो : ANI
विस्तार
रूस ने बुधवार को कहा कि भारत अपने कच्चे तेल के आपूर्तिकर्ताओं में विविधता लाने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है और इसमें कोई नई बात नहीं है। बता दें कि सोमवार को अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत टैरिफ करते हुए एलान किया था कि भारत रूस से तेल खरीदना बंद कर देगा। अब इस पूरे घटनाक्रम पर रूस की ओर से प्रतिक्रिया आई है।
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क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने कहा, हम अन्य सभी अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा विशेषज्ञों की तरह यह अच्छी तरह जानते हैं कि रूस भारत को तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति करने वाला अकेला देश नहीं है। भारत हमेशा से अन्य देशों से भी ये उत्पाद खरीदता रहा है, इसलिए इसमें हमें कुछ भी नया नहीं है।
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पेस्कोव से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे के बारे में पूछा गया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रूसी तेल खरीदना बंद करने और अमेरिका व वेनेजुएला से कच्चा तेल खरीदने पर सहमत हो गए हैं। रूस के एक निजी निजी एफएम रेडियो ने बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप ने तो कहा कि भारत रूस से तेल आयात रोकने पर सहमत है, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने रूसी तेल आयात रोकने के किसी समझौते का जिक्र नहीं किया है।
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वहीं, राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा कोष के प्रमुख विशेषज्ञ इगोर युशकोव ने कहा कि भारतीय तेल शोधक कंपनियां रूसी कच्चे तेल का आयात पूरी तरह से बंद नहीं कर सकतीं। उन्होंने कहा, अमेरिकी जिस शेल तेल का निर्यात करता है वह हल्के ग्रेड का है, जो गैस कंडेनसेट के समान है। जबकि रूस अपेक्षाकृत भारी, सल्फरयुक्त यूराल तेल की आपूर्ति करता है। इसका मतलब है कि भारत को अमेरिकी कच्चे तेल को अन्य ग्रेड के तेल के साथ मिलाना होगा, जिससे अतिरिक्त लागत आएगी, यानी केवल प्रतिस्थापन संभव नहीं होगा। उन्होंने यह भी कहा कि रूस आमतौर पर हर दिन 15 से 20 लाख बैरल तेल का निर्यात करता है। अमेरिका इतनी मात्रा की आपूर्ति नहीं कर पाएगा। इसलिए ऐसा लगता है कि ट्रंप सिर्फ यह दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि उन्होंने इन व्यापार वार्ताओं में जीत हासिल की है और यह समझौता पूरी तरह से अमेरिकी मांगों के अनुरूप पूरा हुआ है।