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इस्राइल: कौन हैं नए प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट, जिन्होंने टेक स्टार्टअप बेचकर रखा था राजनीति में कदम

Tue, 15 Jun 2021 05:21 AM IST
प्रशांत कुमार वर्ल्ड न्यूज, अमर उजाला, येरुशलम
वर्ल्ड न्यूज, अमर उजाला, येरुशलम Published by: प्रशांत कुमार Updated Tue, 15 Jun 2021 05:21 AM IST
सार

इस्राइल में बेंजामिन नेतन्याहू की सत्ता में बेनेट सहयोगी रह चुके हैं। उनके पास कई मंत्रालय भी रहा था। रक्षा, शिक्षा समेत कई मंत्री रहते हुए उन्होंने कई उल्लेखनीय कार्य किए। राजनीति में आने से पहले वह सेना और बिजनेसमैन भी रह चुके हैं।

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Know the story of 49 year-old young Prime Minister Bennett who  ended benjamin netanyahu rule
नफ्ताली बेनेट, प्रधानमंत्री, इस्राइल - फोटो : Wikipedia

विस्तार

इस्राइल में सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहने वाले बेंजामिन नेतन्याहू की 12 सालों की सत्ता खत्म हो गई। नफ्ताली बेनेट देश के नए प्रधानमंत्री बन गए हैं। दक्षिणपंथी और घोर राष्ट्रवादी यामिना पार्टी के मुखिया बेनेट की नई सरकार में 27 मंत्री हैं। मंत्रिमंडल में 9 महिलाएं भी शामिल हैं।  बेनेट की सरकार ने 120 सदस्यीय सदन में 60-59 के वोट से मामूली बहुमत साबित किया है। इस वोटिंग में एक सांसद ने हिस्सा नहीं लिया।

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नई सरकार के लिए अलग-अलग विचारधारा के आठ दलों ने गठबंधन किया है। इनमें दक्षिणपंथी, वाम, मध्यमार्गी के साथ अरब समुदाय की एक पार्टी भी है। सरकार को मिला समर्थन इस प्रकार है:- येश अतीद (17), ब्लू एंड व्हाइट (8), यिसरायल बेतेनु (7), लेबर (7), यामिना (7 में से 6), न्यू होप (6), मेरेट्ज (6), राम (4 में से 3)।
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जानिए कौन हैं देश के नए प्रधानमंत्री बेनेट
बेनेट राजनीतिक में आने से पहले टेक उद्यमी रह चुके हैं। एक पूर्व स्पेशल फोर्स कमांडो, बेनेट अमेरिका में जन्मे माता-पिता के बेटे हैं। बेनेट अभी अपनी पत्नी और चार बच्चों के साथ इस्राइल के रानाना में रहते हैं। सेना से सियासत में कदम रखने वाले 49 वर्षीय नफ्ताली बेनेट का जन्म 25 मार्च 1972 में इस्राइल के हाइफा में हुआ था। नेफ्ताली बेनेट किसी वक्त बेंजामिन नेतन्याहू के करीबी माने जाते थे।
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वह यरुशलम की हिब्रू यूनिवर्सिटी से कानून की पढ़ाई करने के बाद सेना में चले गए थे। सेना में कमांडर की नौकरी के बाद वह एक नामचीन बिजनेसमैन भी रह चुके हैं। सेना की नौकरी के बाद नफ्ताली बेनेट अमेरिका में टेक कंपनी चलाते थे। 1999 में उन्होंने की शुरुआत की थी, जिसका नाम Cyota था। हालांकि, साल 2005 में बेनेट ने अपनी इस कंपनी को अमेरिकी सिक्योरिटी फर्म को 14.5 करोड़ डॉलर में बेच दिया था।  

फरवरी में बेनेट ने टाइम्स ऑफ इस्राइल से कहा था, ‘मैं बीबी (नेतन्याहू) की तुलना में ज्यादा दक्षिणपंथी हूं, लेकिन मैं राजनीतिक रूप से खुद को बढ़ावा देने के लिए एक टूल के रूप में नफरत या ध्रुवीकरण का इस्तेमाल नहीं करता हूं।’ बेनेट को अर्थव्यवस्था पर अति-उदार माना जाता है और वह ईरान के खिलाफ आक्रामक रुख के लिए जाने जाते हैं। इस्राइल में कुछ ऑब्जर्वर और अखबार बेनेट को उनके विचारों के लिए 'अति-राष्ट्रवादी' करार दे चुके हैं।
 

टेक स्टार्टअप बेचकर रखा राजनीति में कदम

  • बेनेट ने साल 2005 में अपने टेक स्टार्टअप को 145 मिलियन डॉलर में बेचने के बाद राजनीति में कदम रखा, और अगले साल वह नेतन्याहू के चीफ ऑफ स्टाफ बन गए, जो उस समय विपक्ष में थे।
  • बेनेट ने 2006 और 2008 के बीच नेतन्याहू के लिए वरिष्ठ सहयोगी के रूप में काम किया। हालांकि, नेतन्याहू के साथ संबंधों में खटास आने के बाद उन्होंने नेतन्याहू की लिकुड पार्टी छोड़ दी।
  • बेनेट 2006-2008 के बीच चीफ ऑफ स्टाफ रह चुके हैं। बेनेट कट्टरपंथियों को फांसी देने के पक्षधर हैं। 2013 में कट्टरपंथी होम पार्टी से पहली बार चुनाव जीते थे।
  • नेतन्याहू का साथ छोड़ने के बाद, बेनेट 2010 में येशा काउंसिल के प्रमुख बने, जो 'कब्जे वाले वेस्ट बैंक' में यहूदियों के बसने की लॉबी करती है।
  • 2012 में बेनेट ने धुर दक्षिणपंथी ज्यूइश होम पार्टी की कमान संभाली, जो उस वक्त बेहद मुश्किल दौर से गुजर रही थी।
  • इसके बाद, बेनेट ने नेतन्याहू की सरकार में रक्षा मंत्री, शिक्षा मंत्री और अर्थव्यवस्था मंत्री के रूप में भी काम किया।

फिलिस्तीन पर ऐसा रखते हैं विचार
पूर्व प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के करीबी रहे बेनेट ने उनकी गलत नीतियों का विरोध कर आज इस मुकाम तक पहुंचे हैं। बेनेट फिलस्तीनी की आजादी के खिलाफ हैं और वह कब्जे वाले वेस्ट बैंक और पूर्वी यरुशलम में यहूदी बस्तियों के बड़े हिमायती हैं। जिसे फलस्तीनी और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के कई देश शांति प्रक्रिया में रोड़ा बने हुए हैं।

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