फ्रांस में 'यलो वेस्ट मूवमेंट', सरकार के विरोध में हजारों लोग, जानें क्या है पूरा मामला
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फ्रांस में इस वक्त हालात कुछ ठीक नहीं चल रहे हैं। दुनिया में सिटी ऑफ लव के नाम से मशहूर राजधानी पेरिस में पेट्रोल, डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद सरकार विरोधी प्रदर्शन शुरू हो गए। दंगे होने की आशंका के मद्देनजर पेरिस को बंद कर दिया गया है। अभी तक कई लोगों की मौत की भी खबर है और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए हैं। घायलों में सुरक्षाकर्मी भी शामिल हैं।
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फ्रांस में इस वक्त हालात कुछ ठीक नहीं चल रहे हैं। दुनिया में सिटी ऑफ लव के नाम से मशहूर राजधानी पेरिस में पेट्रोल, डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद सरकार विरोधी प्रदर्शन शुरू हो गए। दंगे होने की आशंका के मद्देनजर पेरिस को बंद कर दिया गया है। अभी तक कई लोगों की मौत की भी खबर है और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए हैं। घायलों में सुरक्षाकर्मी भी शामिल हैं।
माना जा रहा है कि ऐसे दंगे फ्रांस में बीते 50 सालों में नहीं हुए हैं। आखरी बार साल 1968 में ऐसे दंगे हुए थे। ये प्रदर्शन 17 नवंबर से शुरू हुए थे और अभी भी चल रहे हैं। प्रदर्शन में न केवल आम नागरिक बल्कि फार राइट ग्रुप के लोग भी शामिल हैं। यहां चल रहे इस प्रदर्शन को "यलो वेस्ट मूवमेंट" कहा जा रहा है, चलिए आपको विस्तार से बताते हैं कि ये अभियान क्या है और इसके पीछे के सभी कारण क्या हैं।
31 हजार लोग जुड़े प्रदर्शन से
फ्रांस के आंकड़ों के मुताबिक इस आंदोलन से करीब 31 हजार लोग जुड़ चुके हैं। सरकार के खिलाफ नारे लगाने वाले इन लोगों ने न केवल रैलियां निकाली बल्कि कई वाहनों में भी आग लगाई है। लोगों ने सरकारी इमारतों को भी नुकसान पहुंचाया है। अभी तक 1700 लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है। अभियान शुरू पैरिस से हुआ था और अब पूरे देश में फैल चुका है। कहा जा रहा है कि प्रदर्शनकारियों में करीब 8 हजार लोग तो पैरिस से ही हैं। इस प्रदर्शन का कोई नेता नहीं है। ये एक तरह का लीडरलेस यानी बिना नेता वाला आंदोलन है।
शहर में बंद, प्रदर्शन के बीच राष्ट्रपति मैक्रों का अतापता नहीं
फ्रांस की राजधानी में पिछले सप्ताहांत दशकों के सबसे विकट दंगे हुए थे जिससे देश हिल गया था। राष्ट्रपति मैक्रों सरकार गहरे संकट में घिर गई है। पेरिस बंद जैसी घटनाओं के बीच राष्ट्रपति एमैनुएल मैक्रों का कुछ अतापता नहीं है। मैक्रों उद्वेलित राष्ट्र को शांत कराने का जिम्मा एक प्रकार से सरकार पर छोड़कर पूरे सप्ताह लोगों की नजरों से गायब रहे।
क्या है यलो वेस्ट
भारत जैसे देशों में भी बढ़े दाम पर फ्रांस में प्रदर्शन क्यों
लोग बता रहे सरकार की गलती
वहीं दूसरी तरफ यहां के लोगों का कहना है कि साल 2006-2008 में सरकार ने डीजल की गाड़ियां लेने को कहा था। सरकार ने कहा था कि देश में अब एंटी प्लयूशन वाला डीजल उपलब्ध है। जिससे पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं होगा। लोगों का कहना है कि अब सरकार कह रही है कि इलेट्रिक गाड़ियां लो और डीजल का प्रयोग न करो। जो कि गलत है।
जीवनयापन में लोगों को हो रही परेशानी
फ्रांस में अफ्रीका और अन्य देशों के लोग आकर रह रहे हैं। जिसके कारण यहां की कंपनियों को सस्ता लेबर मिल रहा है और देश के लोगों को काम नहीं मिल रहा है। लोगों के बीच बेरोजगारी बढ़ रही है। गरीब और मध्यम वर्ग का देश में जीवनयापन करना मुश्किल हो गया है। देश के अमीर और अमीर होते जा रहे हैं जबकि गरीब और गरीब होते जा रहे हैं। इसी वजह से यहां जन्म दर में भी कमी आ रही है। यहां रहना लोगों के लिए काफी महंगा है।
पेट्रोल-डीजल की कीमतों में वृद्धि से मंहगाई भी बढ़ी
फ्रांस में लोग पहले ही बेरोजगारी का सामना कर रहे हैं वहीं उन्हें अब महंगाई का भी सामना करना पड़ रहा है। इसके पीछे की वजह है यहां एक बड़ी ट्रांसपोर्ट इंडस्ट्री का होना। ये लोग सब्जियां और फलों को भी एक जगह से दूसरी जगह ले जाने का काम करते हैं। इन लोगों में भी कीमतें बढ़ने से काफी गुस्सा है। वहीं इससे मंहगाई भी बढ़ रही है। सामान को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने के लिए इन ट्रकों और अन्य वाहनों का ही इस्तेमाल होता है। पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ने से इनकी भी लागत अब बढ़ गई है। जिससे बाकी सामान भी महंगा होता जा रहा है। लोगों को कठिन परिस्थितियों में महंगाई से लड़ना पड़ रहा है।
लोगों का सरकार पर आरोप
इसके अलावा यहां के फार राइट ग्रुप का मानना है कि सरकार को इन लोगों के आने पर पाबंदी लगानी चाहिए। उनका कहना है कि इन लोगों की जनसंख्या देश में बढ़ती जा रही है। इनके 4-5 बच्चे होते हैं। जबकि फ्रांस में जन्मदर गिर रही है। यहां के लोग ही यहां की पहचान है और ये पहचान अब खोती जा रही है।
सोशल मीडिया पर शुरू हुआ था प्रदर्शन
इसी विभाग के दो पुरुषों ने भी 17 नवंबर को एक फेसबुक इवेंट लांच किया। उन्होंने कहा कि सभी सड़कों को बंद किया जाएगा और सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया जाएगा। विभाग के इन लोगों का कहना है कि तेल के दाम बढ़ने से ही कर में भी वृद्धि हो रही है। इसी समूह के कई वायरल वीडियो में से एक में यलो जैकेट यानी पीली जर्सी के इस्तेमाल का आइडिया दिया गया था।
छोटे बच्चों ने भी सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया
राष्ट्रपति मैक्रों के इस्तीफे की मांग
देश के प्रमुख पर्यटक स्थल भी बंद
ब्रसेल्स में 70 लोग गिरफ्तार
इलाके में यूरोपीय आयोग और यूरोपीय संसद के कार्यालय सहित कई यूरोपीय संस्थानों के भवन हैं। एहतियाती कदम उठाते हुए उन्हें सील कर दिया गया है। पुलिस ने वहां अवरोधक लगाए हैं और लोगों तथा वाहनों को जाने की इजाजत नहीं दी जा रही।
ब्रसेल्स की पुलिस प्रवक्ता इलसे वैन डे कीरे ने बताया कि एहतियाती उपायों के तहत की गई जांच के बाद करीब 70 गिरफ्तारियां की गई हैं। बेल्जा समाचार एजेंसी के मुताबिक युवा प्रदर्शनकारियों ने ब्रसेल्स को फ्लैंडर्स स्थित रेक्केम शहर से जोड़ने वाले राजमार्ग को बाधित कर दिया।