King Charles III Coronation: चार्ल्स के राज्याभिषेक से ठीक पहले तेज हुई उपनिवेशवादी दौर के लिए माफी की मांग
King Charles III Coronation: ऑस्ट्रेलियाई मूलवासियों की तरफ से किंग चार्ल्स को भेजे गए पत्र पर निर्दलीय एबऑरिजिनल सीनेटर लिडिया थोर्प ने भी दस्तखत किया है। यह पत्र ‘माफी, भूल-सुधार और कलाकृतियों एवं अवशेषों की वापसी’ शीर्षक के साथ भेजा गया है...
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उपनिवेशवाद के लिए ब्रिटेन से माफी मांगने की तेज होती मांग में अब ऑस्ट्रेलिया के मूलवासी भी शामिल हो गए हैं। उन्होंने ब्रिटिश राजा चार्ल्स थर्ड से औपचारिक रूप से माफी मांगने के साथ ही ब्रिटिश राजशाही के धन का उनके बीच बंटवारा करने और उपनिवेशवाद के दौरान लूटी गई कलाकृतियों एवं मानव अवशेषों को लौटाने की मांग की है।
चार्ल्स के राज्याभिषेक से ठीक पहले तेज हुआ यह अभियान अब तक 12 देशों में फैल चुका है। इन देशों के मूलवासी नेताओं ने किंग चार्ल्स को पत्र लिख कर उनसे औपचारिक माफी मांगने और अधिराज्य देशों को ब्रिटिश विरासत से मुक्त कर गणराज्य घोषित करने की मांग की है। इनमें सबसे ताजा नाम ऑस्ट्रेलियाई मूलवासियों का जुड़ा है। ऑस्ट्रेलिया की एबऑरिनिजल (मूलवासी) ओलिंपिक एथलीट नोवा पेरिस ने कहा है- ‘हमें मालूम है कि यह राजपरिवार के लिए कठिन संवाद है। लेकिन बदलाव की शुरुआत दूसरों की बात सुनने से ही होती है।’ नोवा अपने देश में लेबर पार्टी की तरफ से सीनेटर भी रह चुकी हैं।
ऑस्ट्रेलियाई मूलवासियों की तरफ से किंग चार्ल्स को भेजे गए पत्र पर निर्दलीय एबऑरिजिनल सीनेटर लिडिया थोर्प ने भी दस्तखत किया है। यह पत्र ‘माफी, भूल-सुधार और कलाकृतियों एवं अवशेषों की वापसी’ शीर्षक के साथ भेजा गया है। इस पत्र पर एंटिगा और बरबूडा, एओटीरोआ (न्यूजीलैंड), ऑस्ट्रेलिया, बहामा, बेलिजे, कनाडा, ग्रेनाडा, जमैका, पापुआ न्यू गिनी, सेंट किट्स एवं नेविस, सेंट लुसिया और सेंट विसेंट के मूलवासी नेताओं भी दस्तखत किए हैं।
पत्र में कहा गया है- ‘हम ब्रिटिश किंग चार्ल्स थर्ड से अनुरोध करते हैं कि छह मई 2023 को अपने राज्याभिषेक के दिन ही वे मूलवासी एवं गुलाम बनाए गए अन्य लोगों के नरसंहार और उन्हें गुलाम बनाने के भयानक प्रभावों को स्वीकार करें।’ पत्र में ध्यान दिलाया गया है कि चार्ल्स ने जून 2022 में कॉमनवेल्थ शिखर सम्मेलन में कहा था कि अतीत की गलतियों को स्वीकार करना एक संवाद है, जिसका समय अब आ चुका है। मूलवासी नेताओं ने चार्ल्स से कहा है कि गुलामी के जारी प्रभाव के बारे में संवाद वे बिना देर किए शुरू करें।”
ऑस्ट्रेलिया में इस समय देश को गणराज्य बनाने के पक्ष में आंदोलन चल रहा है। ऑस्ट्रेलिया अभी भी संवैधानिक रूप से ब्रिटेन का उधिराज्य (डोमिनियन) है, जिसके तहत ब्रिटिश राजा वहां का भी संवैधानिक प्रमुख होता है। ऑस्ट्रेलियन रिपब्लिक मूवमेंट ने चार्ल्स के राज्याभिषेक के कुछ पहलुओं को बेतुका बताते हुए उनकी आलोचना की है। नोवा पेरिस ऑस्ट्रेलियन रिपब्लिक मूवमेंट की सह-अध्यक्ष हैं। उन्होंने कहा कि राज्याभिषेक से जुड़े कुछ पहलू ऑस्ट्रेलियावासियों के लिए अपमानजनक हैं। उन्होंने कहा- ‘यह सोचना हैरतअंगेज है कि आत्म-सम्मान वाला कोई राष्ट्र किसी विदेशी राजा के आगे नत-मस्तक होगा।’
न्यूजीलैंड के मूलवासी माओरी समुदाय की पार्टी ने कॉमनवेल्थ के मूलवासियों का अह्वान किया है कि वे आत्म-प्रबंधन, आत्म-निर्णय और स्वशासन के अधिक अधिकार हासिल करने के लिए संघर्ष करें। पार्टी माओरी ने एक बयान में कहा- ‘ब्रिटिश सिंहासन ने जानबूझ कर कई पीढ़ियों तक हमारा विस्थापन कराया। अब समय आ गया है कि इस सिस्टम को ध्वस्त किया जाए, ताकि हम ऐसा सिस्टम बना सकें, जो सबके हित में काम करे।’