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पाकिस्तान: जस्टिस काजी फैज बने देश के 29वें प्रधान न्यायाधीश; जानें उनके बारे में
Sun, 17 Sep 2023 08:13 PM IST
शिव शरण शुक्ला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
Published by: शिव शरण शुक्ला
Updated Sun, 17 Sep 2023 08:13 PM IST
सार
जस्टिस ईसा को स्वतंत्र विचारों वाला माना जाता है। 2019 में फैजाबाद में एक धार्मिक संगठन के धरने को लेकर शक्तिशाली संगठन के खिलाफ दिए गए फैसले के बाद उन्हें निशाना बनाया गया था। उनके खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दाखिल किया गया था, जिसे बाद में सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था।
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Justice Qazi Faez Isa
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
स्वतंत्र सोच वाले न्यायाधीश के रूप में गिने जाने वाले जस्टिस काजी फैज ईसा ने पाकिस्तान के 29वें प्रधान न्यायाधीश के रूप में शपथ ली। सुप्रीम कोर्ट में प्रधान न्यायाधीश के रूप में उनका कार्यकाल 13 महीने का होगा और अगले साल 25 अक्टूबर को समाप्त होगा। जस्टिस इसा (63) को राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने इस्लामाबाद के ऐवान-ए-सद्र में एक समारोह में शपथ दिलाई। उन्होंने उमर अता बंदियाल के सितंबर में सेवानिवृत्त होने के बाद उनकी जगह ली।
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इस दौरान कार्यवाहक प्रधानमंत्री अनवारुल हक काकर, सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर आदि मौजूद रहे। जस्टिस ईसा को स्वतंत्र विचारों वाला माना जाता है। 2019 में फैजाबाद में एक धार्मिक संगठन के धरने को लेकर शक्तिशाली संगठन के खिलाफ दिए गए फैसले के बाद उन्हें निशाना बनाया गया था। उनके खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दाखिल किया गया था, जिसे बाद में सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था।
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जस्टिस काजी फैज ईसा के सामने होंगी ये चुनौतियां
उनकी नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब पाकिस्तान गंभीर संवैधानिक, कानूनी और राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर रहा है। उनकी मुख्य परीक्षा नौ अगस्त को संसद भंग होने के 90 दिनों के भीतर आम चुनाव कराना होगा। हालांकि उनकी सबसे बड़ी चुनौती शीर्ष अदालत की प्रतिष्ठा और तटस्थता को बहाल करना है। खास कर तब जबकि उनके पूर्ववर्ती उमर अता बंदियाल पर पूर्व प्रधान मंत्री इमरान खान के प्रति नरम रुख रखने का आरोप लगाया गया है।
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इस मौके पर नेशनल असेंबली के अध्यक्ष राजा परवेज अशरफ ने न्यायमूर्ति ईसा को बधाई दी। साथ ही उम्मीद जताई कि उनके नेतृत्व में न्याय प्रदान करने वाली संस्थाएं अधिक सक्रिय तरीके से काम करेंगी। उन्होंने कहा कि देश में कानून के शासन और न्याय के प्रावधान के लिए विधायिका, न्यायपालिका और कार्यपालिका का एक साथ काम करना जरूरी है।
कौन हैं जस्टिस काजी फैज ईसा
जस्टिस ईसा का जन्म 26 अक्टूबर 1959 को क्वेटा में हुआ था। उनके पिता, काजी मुहम्मद ईसा मुहम्मद अली जिन्ना के करीबी सहयोगी थे।साथ ही पाकिस्तान की स्थापना के लिए आंदोलन के भी वे प्रमुख सदस्य थे। बता दें कि जस्टिस काजी ने अपनी प्राथमिक शिक्षा क्वेटा में और ए और ओ स्तर कराची ग्रामर स्कूल में पूरी की। इसके बाद उन्होंने लंदन में कानून की पढ़ाई की। इसके बाद 1985 में बलूचिस्तान उच्च न्यायालय में एक वकील के रूप में अपना कानूनी करियर शुरू किया। बाद में 1998 में सर्वोच्च न्यायालय के वकील बन गए। उन्होंने 27 सालों से अधिक समय तक बलूचिस्तान उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय में वकालत की। साल 2009 में बलूचिस्तान उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया। 2009 से 2014 तक वे उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रहे फिर 2014 में उन्हें सर्वोच्च न्यायालय में पदोन्नत किया गया था।
देश के अगले प्रधान न्यायधीश के रूप में अपने नाम पर मुहर लगने के बाद काजी फैज ईसा ने कहा था कि वह शीर्ष अदालत के मुख्य न्यायाधीश का पद संभालने के बाद न्याय पीठों के गठन और मुकदमों के निर्धारण की व्यवस्था को पारदर्शी बनाने का प्रयास करेंगे।
भ्रष्टाचार विरोधी कानून पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से नवाज शरीफ की पाकिस्तान वापसी की योजना पर कोई असर नहीं
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की 21 अक्टूबर को लंदन से देश वापसी की योजना भ्रष्टाचार विरोधी कानूनों में संशोधन पर सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले से प्रभावित नहीं होगी। उनकी कानूनी टीम ने इस बारे में जानकारी दी है। वहीं, पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी कहा कि उनके भाई व पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) के मुखिया नवाज शरीफ 21 अक्टूबर को स्वदेश लौटेंगे। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय जवाबदेही ब्यूरो (एनएबी) संशोधन संबंधी सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले से उनकी वापसी का कोई लेनादेना नहीं है।
जियो न्यूज के अनुसार, शहबाज शरीफ ने यह टिप्पणी नवाज शरीफ, सुलेमान शरीफ व वकील आजम नजीर तरार, अमजद परवेज व अताउल्लाह तरार के साथ विधिक विमर्श के बाद की। उन्होंने कहा कि नवाज शरीफ के खिलाफ मुकदमे झूठे आरोपों पर आधारित थे।
बता दें कि देश लौटने पर पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) पार्टी सुप्रीमो को अदालतों के संबंध में सभी मामलों का सामना करना पड़ेगा। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को पीएमएल-एन के नेतृत्व वाली पिछली गठबंधन सरकार द्वारा भ्रष्टाचार विरोधी कानूनों में किए गए हालिया संशोधनों को रद्द कर दिया और एन सहित सार्वजनिक कार्यालय धारकों के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों को बहाल कर दिया।