Joe Biden's UAE Visit: फिलहाल टली जो बाइडन की सऊदी अरब यात्रा, कारणों पर लगाए जा रहे हैं कयास
बाइडन प्रशासन में अभी भी इस पर सोच-विचार ही चल रहा है कि सऊदी अरब के युवराज प्रिंस मोहम्मद-बिन-सलमान को कच्चे तेल का उत्पादन बढ़ाने के लिए कैसे मनाया जाए। अब सऊदी अरब की वास्तविक सत्ता प्रिंस सलमान के हाथ में ही है...
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अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन की इस महीने होने वाली सऊदी यात्रा संभवतया टल गई है। कूटनीति सूत्रों के मुताबिक अब इस यात्रा के जुलाई के पहले होने की संभावना नहीं है। कुछ दिन पहले अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स ने खबर दी थी कि बाइडन जून में सऊदी अरब जाएंगे। बाद में बाइडन प्रशासन के सूत्रों ने उसकी पुष्टि की थी। अब पश्चिम एशिया की न्यूज वेबसाइट द क्रैडल ने खबर दी है कि बाइडन की यात्रा जुलाई में भी पाएगी या नहीं, यह तय नहीं है।
उधर वेबसाइट एशिया टाइम्स ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया है कि बाइडन प्रशासन में अभी भी इस पर सोच-विचार ही चल रहा है कि सऊदी अरब के युवराज प्रिंस मोहम्मद-बिन-सलमान को कच्चे तेल का उत्पादन बढ़ाने के लिए कैसे मनाया जाए। अब सऊदी अरब की वास्तविक सत्ता प्रिंस सलमान के हाथ में ही है। बाइडन प्रिंस सलमान को कच्चे तेल का उत्पादन बढ़ाने पर राजी करना चाहते हैं, ताकि तेल की महंगाई की मार से अमेरिका और यूरोप को बचाया जा सके।
अमेरिका में कई जगह हुई आलोचना
विश्लेषकों ने कहा है कि तेल की जरूरत के कारण ही बाइडन ने प्रिंस सलमान के प्रति अपनी पुरानी आलोचनाओं को दरकिनार कर दिया है। अमेरिकी एजेंसियों की जांच रिपोर्ट के मुताबिक अखबार वाशिंगटन पोस्ट के स्तंभकार जमाल खशोगी की हत्या का आदेश प्रिंस सलमान ने ही दिया था। बाइडन 2020 में जब राष्ट्रपति के उम्मीदवार थे, तब उन्होंने कहा था कि राष्ट्रपति बनने पर वे प्रिंस सलमान को दुनिया में पराया बना देंगे।
इसीलिए बाइडन की प्रस्तावित सऊदी यात्रा की अमेरिका के कई हलकों में तीखी आलोचना हुई है। इस बारे में पूछे जाने पर व्हाइट हाउस की प्रवक्ता कैरिन ज्यां-पियरे ने इस हफ्ते कहा- ‘राष्ट्रपति किसी भी ऐसे नेता से मिलेंगे, जिससे अमेरिकी जनता का हित सधता हो।’
वेबसाइट द क्रैडल के मुताबिक बाइडन अपनी पश्चिम यात्रा सऊदी अरब के अलावा इस्राइल भी जाएंगे। दोनों देशों के अधिकारियों ने कहा है कि जून में ये यात्रा होने की संभावना नहीं है। हालांकि उन्होंने यात्रा टलने का कोई कारण नहीं बताया।
इस्राइल में राजनीतिक अस्थिरता तो वजह नहीं?
कुछ खबरों में बताया गया है कि बाइडन की यात्रा टलने का एक कारण इस्राइल में पैदा हुई राजनीतिक अस्थिरता है। इस्राइल के प्रधानमंत्री नेफताली बेनेट के नेतृत्व वाले गठबंधन ने नेसेट (संसद) में अपना बहुमत गंवा दिया है। इस्राइल के अखबार यरुशलम पोस्ट ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है- ‘अगर विपक्ष सरकार को नेसेट भंग करने और नए चुनाव के लिए मजबूर कर देता है, तो उस हाल में अमेरिकी राष्ट्रपति के इस्राइल आने की संभावना बेहद कम हो जाएगी।’
लेकिन द क्रैडल ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि रूस ने अपनी खास कूटनीति से बाइडन को अपनी पश्चिम एशिया यात्रा फिलहाल टालने के लिए मजबूर कर दिया। रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने इसी महीने के आरंभ में खाड़ी देशों की यात्रा की। वे खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) के विदेश मंत्रियों से रियाद में मिले। वहां रूस ने तेल उत्पादक देशों के संगठन ओपेक के साथ अपनी एकजुटता जताई। दोनों पक्षों में तेल उत्पादन के मामले में सहमति भी इस बैठक में बन गई। समझा जाता है कि इससे तेल उत्पादन बढ़ाने पर सऊदी अरब को राजी करने की अमेरिकी मंशा को झटका लगा है। बाइडन के अपनी यात्रा टालने का यह एक कारण हो सकता है।