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जापान: मतदान से पहले सवाल, एलडीपी को अपने दम पर बहुमत मिलेगा या नहीं?
Sat, 30 Oct 2021 03:37 PM IST
Amit Mandal
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, टोक्यो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, टोक्यो
Published by: Amit Mandal
Updated Sat, 30 Oct 2021 03:37 PM IST
सार
पिछले सदन में एलडीपी की कुल 276 सीटें थीं। 2012 से हुए पिछले तीनों चुनावों में एलडीपी ने डियेट में 60 फीसदी से ज्यादा सीटें जीती हैं।
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फुमियो किशिदा
- फोटो : Twitter@ Fumio Kishida
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विस्तार
जापान के मतदाता रविवार को नई डियेट (संसद) चुनने के लिए मतदान करेंगे। आम संभावना यही है कि प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा के नेतृत्व वाला गठबंधन सत्ता में लौट आएगा। लेकिन मतदान से 48 घंटे पहले जारी जनमत सर्वेक्षणों से लगता है कि किशिदा की अपनी लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (एलडीपी) कमजोर होकर उभरेगी। एलडीपी का कोमितो पार्टी के साथ गठबंधन है।
वेबसाइट निक्कई एशिया के कराए सर्वेक्षण से संकेत मिला है कि एलडीपी के अपने समर्थन आधार पर तेजी से गिरावट आई है। पिछली डियेट में एलडीपी को अपना बहुमत था। 465 सदस्यों वाले इस सदन में एलडीपी इस बार कम से कम 233 सीटें जीत पाती है या नहीं, पर्यवेक्षकों की निगाह इस पर टिकी है।
10 फीसदी मतदाता तय नहीं कर पाए अपना रुख
ताजा सर्वेक्षणों से यह सामने आया है कि 10 फीसदी से ज्यादा मतदाता शुक्रवार तक यह तय नहीं कर पाए थे कि वे किस पार्टी को वोट देंगे। पर्यवेक्षकों का कहना है कि इन मतदाताओं के वोट निर्णायक साबित हो सकते हैं। डियेट के लिए चुनाव निर्वाचन क्षेत्रों से प्रत्यक्ष चुनाव और आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के एक मिले-जुले सिस्टम से होता है। प्रत्यक्ष चुनाव वाले क्षेत्रों में जिस उम्मीदवार को अधिक वोट मिलते हैं, वह विजयी होता है। आनुपातिक प्रणाली के तहत पार्टियों को मिले वोट प्रतिशत के आधार पर सीटें आवंटित की जाती हैं।
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एलडीपी-कोमितो गठबंधन मजबूत
चुनाव पूर्व जनमत सर्वेक्षणों के मुताबिक प्रत्यक्ष निर्वाचन वाली लगभग 60 फीसदी सीटों पर एलडीपी-कोमितो गठबंधन के जीतने की संभावना है। कोमितो पार्टी के समर्थन में बढ़ोतरी देखने को मिली है। पर्यवेक्षकों का कहना है कि कोमितो पार्टी को ज्यादा सीटें मिलने पर मुमकिन है कि गठबंधन एक बार फिर मजबूत ताकत के रूप में उभरे। प्रत्यक्ष निर्वाचन वाली सीटों पर एलडीपी को भी ज्यादा नुकसान होने की संभावना नहीं है। लेकिन आनुपातिक प्रतिनिधित्व से मिलने वाली सीटों में उसे काफी नुकसान हो सकता है। पिछले चुनाव में एलडीपी को आनुपातिक प्रतिधित्व के रूप में 66 सीटें मिली थीं।
पिछले सदन में एलडीपी की कुल 276 सीटें थीं। 2012 से हुए पिछले तीनों चुनावों में एलडीपी ने डियेट में 60 फीसदी से ज्यादा सीटें जीती हैं। 2009 में चुनाव हारने के बाद 2012 में एलडीपी सत्ता में लौटी थी और तब से लगातार उसकी सरकार रही है। कोमितो पार्टी को पिछली बार 29 सीटें मिली थीं। पर्यवेक्षकों का अनुमान है कि इस पार्टी को कम से कम इतनी सीटें इस बार भी जरूर मिलेंगी। संभावना यह है कि उसकी सीटों में कुछ इजाफा हो।
सत्ताधारी दल को कड़ी चुनौती
विश्लेषकों का कहना है कि विपक्षी दलों के इस बार गठबंधन बना लेने की वजह से सत्ताधारी दल को कड़ी चुनौती मिली है। विपक्षी दलों ने आपसी समझौते के तहत हर सीट पर सत्ताधारी गठबंधन के खिलाफ एक ही उम्मीदवार खड़ा किया है। इससे विपक्षी वोटों का बंटवारा रुकने की संभावना है। प्रमुख विपक्षी दल कंस्टीट्यूशनल डेमोक्रेटिक पार्टी (सीडीपी) को पिछली बार 110 सीटें मिली थी। इस बार तमाम अनुमानों में कहा गया है कि उसे इससे अधिक सीटें हासिल होंगी।
विपक्षी गठबंधन में शामिल हुई जापान की कम्युनिस्ट पार्टी के पिछले सदन में 12 सदस्य थे। उसकी सीटें भी बढ़ सकती हैं। लेकिन उससे ज्यादा लाभ की स्थिति जापान रिस्टोरेशन पार्टी है। कई अनुमानों में कहा गया है कि इस बार इस पार्टी को तीन गुना सीटें मिल सकती हैं। पिछली बार इसे 11 सीटें मिली थीं।
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वेबसाइट निक्कई एशिया के कराए सर्वेक्षण से संकेत मिला है कि एलडीपी के अपने समर्थन आधार पर तेजी से गिरावट आई है। पिछली डियेट में एलडीपी को अपना बहुमत था। 465 सदस्यों वाले इस सदन में एलडीपी इस बार कम से कम 233 सीटें जीत पाती है या नहीं, पर्यवेक्षकों की निगाह इस पर टिकी है।
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10 फीसदी मतदाता तय नहीं कर पाए अपना रुख
ताजा सर्वेक्षणों से यह सामने आया है कि 10 फीसदी से ज्यादा मतदाता शुक्रवार तक यह तय नहीं कर पाए थे कि वे किस पार्टी को वोट देंगे। पर्यवेक्षकों का कहना है कि इन मतदाताओं के वोट निर्णायक साबित हो सकते हैं। डियेट के लिए चुनाव निर्वाचन क्षेत्रों से प्रत्यक्ष चुनाव और आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के एक मिले-जुले सिस्टम से होता है। प्रत्यक्ष चुनाव वाले क्षेत्रों में जिस उम्मीदवार को अधिक वोट मिलते हैं, वह विजयी होता है। आनुपातिक प्रणाली के तहत पार्टियों को मिले वोट प्रतिशत के आधार पर सीटें आवंटित की जाती हैं।
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एलडीपी-कोमितो गठबंधन मजबूत
चुनाव पूर्व जनमत सर्वेक्षणों के मुताबिक प्रत्यक्ष निर्वाचन वाली लगभग 60 फीसदी सीटों पर एलडीपी-कोमितो गठबंधन के जीतने की संभावना है। कोमितो पार्टी के समर्थन में बढ़ोतरी देखने को मिली है। पर्यवेक्षकों का कहना है कि कोमितो पार्टी को ज्यादा सीटें मिलने पर मुमकिन है कि गठबंधन एक बार फिर मजबूत ताकत के रूप में उभरे। प्रत्यक्ष निर्वाचन वाली सीटों पर एलडीपी को भी ज्यादा नुकसान होने की संभावना नहीं है। लेकिन आनुपातिक प्रतिनिधित्व से मिलने वाली सीटों में उसे काफी नुकसान हो सकता है। पिछले चुनाव में एलडीपी को आनुपातिक प्रतिधित्व के रूप में 66 सीटें मिली थीं।
पिछले सदन में एलडीपी की कुल 276 सीटें थीं। 2012 से हुए पिछले तीनों चुनावों में एलडीपी ने डियेट में 60 फीसदी से ज्यादा सीटें जीती हैं। 2009 में चुनाव हारने के बाद 2012 में एलडीपी सत्ता में लौटी थी और तब से लगातार उसकी सरकार रही है। कोमितो पार्टी को पिछली बार 29 सीटें मिली थीं। पर्यवेक्षकों का अनुमान है कि इस पार्टी को कम से कम इतनी सीटें इस बार भी जरूर मिलेंगी। संभावना यह है कि उसकी सीटों में कुछ इजाफा हो।
सत्ताधारी दल को कड़ी चुनौती
विश्लेषकों का कहना है कि विपक्षी दलों के इस बार गठबंधन बना लेने की वजह से सत्ताधारी दल को कड़ी चुनौती मिली है। विपक्षी दलों ने आपसी समझौते के तहत हर सीट पर सत्ताधारी गठबंधन के खिलाफ एक ही उम्मीदवार खड़ा किया है। इससे विपक्षी वोटों का बंटवारा रुकने की संभावना है। प्रमुख विपक्षी दल कंस्टीट्यूशनल डेमोक्रेटिक पार्टी (सीडीपी) को पिछली बार 110 सीटें मिली थी। इस बार तमाम अनुमानों में कहा गया है कि उसे इससे अधिक सीटें हासिल होंगी।
विपक्षी गठबंधन में शामिल हुई जापान की कम्युनिस्ट पार्टी के पिछले सदन में 12 सदस्य थे। उसकी सीटें भी बढ़ सकती हैं। लेकिन उससे ज्यादा लाभ की स्थिति जापान रिस्टोरेशन पार्टी है। कई अनुमानों में कहा गया है कि इस बार इस पार्टी को तीन गुना सीटें मिल सकती हैं। पिछली बार इसे 11 सीटें मिली थीं।