जापान: टीकाकरण मंत्री तारो कोनो के प्रधानमंत्री बनने की संभावना मजबूत, तेजी से वैक्सीनेशन का मिलेगा फायदा
नेता पद की होड़ में तारो कानो सबसे आगे हैं। सर्वे के बाद पर्यवेक्षक अब उन्हें जापान के अगले प्रधानमंत्री के रूप में देखने लगे हैं। बुधवार को नेता चुनने के लिए डियेट (जापान की संसद) के एलडीपी सदस्य और देश भर में पार्टी के कार्यकर्ता वोट डालेंगे। एलडीपी के नियम के मुताबिक जीत के लिए किसी उम्मीदवार को 50 फीसदी से ज्यादा वोट लाना होगा...
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जापान की सत्ताधारी लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (एलडीपी) में नेता पद की चल रही होड़ में तारो कोनो अब सबसे आगे दिख रहे हैं। नेता पद का चुनाव इसी बुधवार को होगा। वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम और टीवी चैनल टीवी टोक्यो की तरफ से कराए गए एक सर्वे में तारो कोनो को सबसे ज्यादा समर्थन मिलता दिखाया गया है।
इस सर्वे के मुताबिक वर्तमान सरकार में टीकाकरण मंत्री कोनो को एलडीपी के 46 फीसदी कार्यकर्ताओं का समर्थन हासिल है। उनके बारे में ये धारणा है कि प्रधानमंत्री योशिहिदे सुगा की जगह लेने के लिए सबसे उपयुक्त नाम वे ही हैं। इस सर्वे में एलडीपी के पूर्व नीति प्रमुख फुमियो किशिदा दूसरे नंबर पर आए। लेकिन उन्हें सिर्फ 17 फीसदी कार्यकर्ताओं का समर्थन हासिल हुआ। पूर्व गृह मंत्री सनाए ताकाइची को 14 फीसदी और पार्टी के कार्यवाहक महासिचव सीको नोडा को पांच फीसदी समर्थन मिलने का अनुमान लगाया गया है।
इस सर्वे से पहले भी आम राय यही थी कि नेता पद की होड़ में तारो कानो सबसे आगे हैं। सर्वे के बाद पर्यवेक्षक अब उन्हें जापान के अगले प्रधानमंत्री के रूप में देखने लगे हैं। बुधवार को नेता चुनने के लिए डियेट (जापान की संसद) के एलडीपी सदस्य और देश भर में पार्टी के कार्यकर्ता वोट डालेंगे। एलडीपी के नियम के मुताबिक जीत के लिए किसी उम्मीदवार को 50 फीसदी से ज्यादा वोट लाना होगा। अगर किसी उम्मीदवार को इतने वोट नहीं मिले, तो पहले दो स्थानों पर रहे उम्मीदवारों के बीच फिर से मुकाबला होगा।
प्रधानमंत्री सुगा ने इस महीने की शुरुआत में नेता पद छोड़ने का एलान किया था। उसके बाद नए नेता के चुनाव की प्रक्रिया शुरू हुई। जापान में अगले 21 अक्टूबर के पहले डियेट का चुनाव भी होना है। उस चुनाव में एलडीपी नए नेता का चेहरा पेश करते हुए उतरेगी। पर्यवेक्षकों के मुताबिक इसीलिए इस बार का नेता पद का चुनाव अहम है। नए नेता को जनता के बीच जाने से पहले ज्यादा वक्त नहीं मिलेगा।
तारो कोनो की लोकप्रियता हाल में बढ़ी है। जापान लंबे समय तक कोरोना महामारी से जूझता रहा। वहां टीकाकरण की रफ्तार भी धीमी थी। उसी माहौल में टोक्यो में ओलिंपिक और पैरा ओलिंपिक खेल कराए गए। पर्यवेक्षकों में आम राय है कि महामारी को ठीक से ना संभाल पाना और उस दौरान ओलिंपिक खेलों को प्राथमिकता देना सुगा को भारी पड़ा। उससे उनकी लोकप्रियता गिरी और उन्हें पद छोड़ना पड़ा। सुगा लगभग एक साल ही प्रधानमंत्री रह पाए।
निक्कई एशिया और टीवी टोक्यो के सर्वे से सामने आया है कि तारो कोनो को हर उम्र वर्ग के कार्यकर्ताओं से लगभग समान समर्थन मिल रहा है। ज्यादातर युवा मतदाता भी उनके साथ हैँ। इस सर्वे के दौरान 51 फीसदी लोगों ने कहा कि कोनो ने कोविड-19 टीकाकरण अभियान को ठीक ढंग से संचालित किया है। आर्थिक नीतियों के मामले में चारों उम्मीदवारों के बीच ज्यादा फर्क नहीं है। किशिदा ने देश में बढ़ी आर्थिक गैर-बराबरी को अपना प्रमुख मुद्दा जरूर बना रखा है। लेकिन सर्वे से जाहिर हुआ है कि एलडीपी कार्यकर्ताओं के बीच ये मुद्दा ज्यादा ध्यान नहीं खींच पाया है।