ऐस्टरॉइड से नमूने लेकर धरती पर वापस लौटा जापान का हायाबुसा 2 कैप्सूल, खोलेगा जीवन से संबंधित राज
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जापान की अंतरिक्ष एजेंसी ने कहा है कि उनकी हेलीकॉप्टर तलाश टीम को वह कैप्सूल मिल गया है, जो अंतरिक्ष से क्षुद्रग्रह (ऐस्टरॉइड) के नमूने लेकर धरती पर लौटा है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इन नमूनों से जीवन की उत्पत्ति की व्याख्या हो सकती है। यह कैप्सूल योजना के अनुसार दक्षिणी ऑस्ट्रेलिया के एक दूरदराज इलाके में उतरा है।
कैप्सूल के धरती पर उतरने के करीब चार घंटे बाद अंतरिक्ष एजेंसी ने ट्वीट किया कि उतरने के स्थान से कैप्सूल को हासिल करने का काम पूरा हो गया। हमने आज के दिन के लिए काफी अभ्यास किया था और यह काम सुरक्षित तरीके से संपन्न हो गया।
We observed the capsule re-entry from around Coober Pedy, with the assistance of Curtin Observatory. The observation was successful & here is our image!https://t.co/KTdV0G9moU
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Credit: Curtin University, Kouchi University of Technology, Nihon University, Ibaraki University, JAXA pic.twitter.com/qTFW8I8UD9— HAYABUSA2@JAXA (@haya2e_jaxa) December 6, 2020
‘जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी’ ने बताया कि हायाबुसा2 यान ने शनिवार को सफलतापूर्वक एक छोटे कैप्सूल को छोड़ा और उसे पृथ्वी की तरफ भेजा ताकि वह नमूनों को यहां पहुंचा सके। इन नमूनों से सौरमंडल और पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति के संबंध में जानकारियां मिल सकती हैं। इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया स्पेस एजेंसी ने भी कई ट्वीट कर इसकी जानकारी दी है।
The capsule in the Australian outback.
— Australian Space Agency (@AusSpaceAgency) December 6, 2020
Magnificent images have been released from today's discovery and recovery of the #Hayabusa2 sample return capsule in the Woomera Prohibited Area, South Australia.
📷 @JAXA_en @haya2e_jaxa. pic.twitter.com/2JaqxhMB7n
Check out these amazing images of the #Hayabusa2 fireball taken from Coober Pedy in South Australia ☄️ It entered Earth's atmosphere at around 12km per second and is one of the top fastest human-made objects to fly in the Earth's atmosphere. @haya2e_jaxa @JAXA_en pic.twitter.com/ooFyIA7j8e
— Australian Space Agency (@AusSpaceAgency) December 5, 2020
यह कैप्सूल रविवार तड़के पृथ्वी से 120 किलोमीटर ऊपर वायुमंडल में पुन: प्रवेश के दौरान कुछ समय के लिए एक फायरबॉल (आग के गोले) में तब्दील हो गया। जमीन से करीब 10 किलोमीटर की दूरी पर एक पैराशूट खुला ताकि इसके गिरने की गति धीमी हो सके और इसे तय स्थान पर उतरने के संकेत मिले।
जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी के वैज्ञानिकों का मानना है कि सैंपल, खासकर ऐस्टरॉइड की सतह से लिए गए सैंपल में मूल्यवान डाटा मिल सकता है। यहां स्पेस रेडिएशन और दूसरे फैक्टर्स का असर नहीं होता है।