जापान में बढ़े कोरोना के मामले: टोक्यो ओलंपिक कराना भारी पड़ गया प्रधानमंत्री योशिहिदे सुगा को!
जापान में कोरोना महामारी को संभालने में नाकामियों के कारण सुगा की लोकप्रियता में गुजरे महीनों में लगातार गिरावट आई है। जापान के लोगों में उनको लेकर नाराजगी तब खास तौर पर बढ़ी थी, जब कोरोना संक्रमण के मामलों में बढ़ोतरी के बावजूद सुगा सरकार ओलिंपिक और पैरा ओलंपिक खेल कराने पर अड़ी रही...
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योशिहिदे सुगा इस महीने के बाद जापान के प्रधानमंत्री नहीं रहेंगे। उन्होंने शुक्रवार को एलान कर दिया कि वे इस महीने के आखिर में होने वाले सत्ताधारी लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता पद के चुनाव में उम्मीदवार नहीं होंगे। इसका व्यावहारिक मतलब यह है कि उन्होंने देश की सियासी हकीकत को समझते हुए प्रधानमंत्री पद छोड़ने का फैसला कर लिया है।
जापान में कोरोना महामारी को संभालने में नाकामियों के कारण सुगा की लोकप्रियता में गुजरे महीनों में लगातार गिरावट आई है। जापान के लोगों में उनको लेकर नाराजगी तब खास तौर पर बढ़ी थी, जब कोरोना संक्रमण के मामलों में बढ़ोतरी के बावजूद सुगा सरकार ओलिंपिक और पैरा ओलंपिक खेल कराने पर अड़ी रही। जनमत सर्वेक्षणों से साफ है कि जापान का भारी बहुमत इन आयोजनों के खिलाफ था। इसलिए ये अकारण नहीं है कि शुक्रवार को सुगा ने नेता पद का चुनाव न लड़ने का एलान करते हुए कहा कि अब वे अपना सारा ध्यान कोरोना महामारी का मुकाबला करने पर केंद्रित करना चाहते हैं।
अब इस महीने के आखिर में अपना कार्यकाल पूरा होने के साथ ही सुगा प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे देंगे। इसके पहले गुरुवार को उन्होंने पार्टी के प्रभावशाली महासचिव तोशिहीरो निकई को अपना फैसला बता दिया था। बताया जाता है कि निकई अब नेता पद का चुनाव लड़ेंगे। एलडीपी के नेता पद के चुनाव में पार्टी के सांसदों के अलावा पार्टी के कार्यकर्ता भी वोट डालते हैं। नेता पद के चुनाव के लिए मतदान 29 सितंबर को होगा। चुनाव प्रचार 17 सितंबर से शुरू होगा।
सुगा पिछले साल सितंबर में प्रधानमंत्री बने थे। उस समय तत्कालीन प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने खराब सेहत के कारण पद छोड़ने का एलान किया था। जापानी मीडिया में छपी खबरों के मुताबिक लोकप्रियता गिरने से पार्टी के अंदर कमजोर होती अपनी हैसियत को संभालने की सुगा ने पूरी कोशिश की। इसी सिलसिले में बीते हफ्ते उन्होंने अपने मंत्रिमंडल के विस्तार की योजना बनाई थी। उनकी योजना निकई को भी मंत्री बनाने की थी। लेकिन अब उन्होंने मंत्रिमंडल विस्तार की योजना छोड़ दी है।
खबर है कि पूर्व गृह और संचार मंत्री सनाए ताकाईची भी नेता पद का चुनाव लड़ेंगी। गुरुवार को उन्होंने एक टीवी चैनल से कहा था कि अगर उनके सामने मंत्री बनने का प्रस्ताव रखा गया, तो वे उसे स्वीकार नहीं करेंगी। बताया जाता है कि ऐसे ही संकेत कई और नेताओं ने दिए। इसके बाद सुगा ने मंत्रिमंडल विस्तार की योजना छोड़ दी। उधर एलडीपी की शाखाओं के परिसंघ की महासचिव युसुके दोई ये साफ-साफ कह दिया कि परिसंघ सुगा के पक्ष में प्रचार नहीं करेगा। इन नेताओं के इस रुख से उन्हें संकेत मिल गया कि उनके पांव के नीचे से जमीन खिसक गई है।
पिछले साल नेता पद के चुनाव में सुगा विजयी रहे थे। बताया जाता है कि तब निकई ने उनका समर्थन किया था, जो निर्णायक साबित हुआ। इसीलिए अब निकई को नेता पद के लिए सबसे मजबूत दावेदार समझा जा रहा है। इसके अलावा फुमियो किशिदा भी एक मजबूत दावेदार होंगे। किशिदा पिछले साल सुगा से हार गए थे।