Cambodia: जयशंकर ने नामपेन्ह में की यूक्रेन के विदेश मंत्री कुलेबा से मुलाकात, परमाणु खतरे पर की बात
जयशंकर ने ट्वीट कर बताया कि हमारी चर्चा में यूक्रेन संघर्ष, वैश्विक खाद्यान्न संकट के बीच अनाज पहल और परमाणु चिंता से जुड़े तमाम मसले शामिल थे।
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कंबोडिया की राजधानी नामपेन्ह में आज आयोजित आसियान-भारत स्मारक शिखर सम्मेलन के मौके पर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने यूक्रेन के विदेश मंत्री दिमित्रो कुलेबा से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने यूक्रेन जंग व परमाणु खतरे समेत तमाम मसलों पर बात की। इसके बाद उन्होंने शनिवार को ही शिखर सम्मेलन से इतर कनाडा, इंडोनेशिया और सिंगापुर के अपने समकक्षों के साथ भी कई मुद्दों पर चर्चा की। जयशंकर ने ट्वीट कर बताया कि हमारी चर्चा में यूक्रेन संघर्ष, वैश्विक खाद्यान्न संकट के बीच अनाज पहल और परमाणु चिंता से जुड़े तमाम मसले शामिल थे।
कनाडा की विदेश मंत्री से की मुलाकात
उन्होंने ट्वीट करके बताया कि पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन के मौके पर कनाडा की विदेश मंत्री मिलेन जॉली से मिलकर अच्छा लगा। उन्होंने यह भी कहा कि इस दौरान यूक्रेन संघर्ष, इंडो-पैसिफिक, द्विपक्षीय सहयोग और सामुदायिक कल्याण पर चर्चा हुई। मुलाकात के दौरान विदेश मंत्री एस जयशंकर ने वीजा से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए कनाडा की सराहना की।
EAM S Jaishankar met Ukrainian Foreign Affairs Minister Dmytro Kuleba, on ASEAN-India Commemorative Summit sidelines in Phnom Penh, Cambodia
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"Our discussions covered recent developments in the conflict, the grain initiative & nuclear concerns," he tweeted#RussiaUkraineCrisis pic.twitter.com/SLkcsATL78 — ANI (@ANI) November 12, 2022
परमाणु जंग का खतरा
यूक्रेन में जारी जंग के बीच रूस द्वारा परमाणु ताकत के इस्तेमाल की आशंका को लेकर मीडिया रिपोर्ट आती रहती है। हालांकि, रूस कई बार कह चुका है कि वह परमाणु विकल्प का इस्तेमाल नहीं करेगा। दूसरी ओर यूक्रेन के समीप परमाणु मिसाइलें दागने वाले लड़ाकू विमानों को भी तैयार रखा गया है। इससे जंग में परमाणु युद्ध में बदलने की आशंका गहराती रहती है। उधर, अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडन ने रूस को परमाणु हमले की आशंका को लेकर कई बार चेतावनी दी है।
जंग में रूस के एक लाख से ज्यादा सैनिक मारे गए
बता दें, रूस व यूक्रेन में बीते करीब नौ माह से जंग जारी है। हाल में एक शीर्ष अमेरिकी जनरल ने दावा किया है कि यूक्रेन जंग में रूस के एक लाख से ज्यादा सैनिक मारे गए हैं या जख्मी हुए हैं। जंग में दोनों देशों को इसमें भारी नुकसान व तबाही का सामना करना पड़ रहा है।
नाटो की सदस्यता पर अड़े पूर्व सोवियत संघ के सदस्य देश यूक्रेन पर रूस ने 24 फरवरी को हमला किया था। उसके बाद से रूस ने यूक्रेन के कई इलाकों पर कब्जा कर लिया है। वहीं, नाटो की मदद के दम पर यूक्रेन रूसी फौज को कड़ी टक्कर दे रहा है। इसी कारण जंग लंबी खींच गई है।
शीर्ष अमेरिकी जनरल मार्क मिले ने बुधवार को न्यूयॉर्क के इकानॉमिक क्लब के कार्यक्रम में दावा किया था कि यूक्रेन में 1,00,000 से अधिक रूसी सैन्यकर्मी मारे गए हैं या घायल हुए हैं। यूक्रेन की सेना को भी इतना ही नुकसान होने की संभावना है।
रूस या यूक्रेन की जीत संभव नहीं
जनरल मिले ने यह भी कहा कि बातचीत से ही जंग खत्म हो सकती है। रूस या यूक्रेन यह जंग सैन्य तरीकों से जीत नहीं सकते। मिले ने कहा कि सैन्य साधनों से जीत हासिल नहीं की जा सकती, इसलिए इसे खत्म करने के अन्य तरीके आजमाने की जरूरत है।
खेरसान से हट रही रूसी फौज
जनरल मिले की यह टिप्पणी रूस द्वारा अपने सैनिकों को दक्षिणी यूक्रेन के खेरसान शहर से हटने का आदेश देने के बाद आई है। खेरसान से रूसी सेना का पीछे हटना, मॉस्को के सैन्य अभियान के लिए बड़ा झटका है। हालांकि, यूक्रेन के अधिकारियों ने इस पर प्रतिक्रिया में कहा है कि रूसी सेना के बिना लड़ाई के खेरसान जैसा रणनीतिक शहर छोड़ने की संभावना नहीं थी। उधर, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन का कहना है कि रूस का पीछे हटना इस बात का सबूत है कि युद्ध के मैदान पर वह समस्याओं का सामना कर रहा है।
भारत दिल्ली में होने वाले आतंकवाद विरोधी वित्तपोषण को लेकर तीसरे 'नो मनी फॉर टेरर' मंत्रिस्तरीय सम्मेलन की मेजबानी करेगा। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने ट्वीट करके इसकी जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि यह सम्मेलन 18-19 नवंबर को होगा।
भूख का खेल खेल रहा रूस : कुलेबा
यूक्रेन के विदेश मंत्री दिमित्रो कुलेबा ने रूस के खिलाफ अपनी लड़ाई में राजनीतिक व भौतिक समर्थन के लिए दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों पर दबाव डाला। उन्होंने मॉस्को पर यूक्रेनी अनाज और अन्य कृषि उत्पादों की आवाजाही रोककर दुनिया के साथ भूख का खेल खेलने का आरोप भी लगाया।
कुलेबा ने आसियान शिखर सम्मेलन से इतर संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि यूक्रेन को 19 नवंबर को खत्म होने वाले अनाज व उर्वरक निर्यात की अनुमति देने वाले समझौते को रूस द्वारा आगे नहीं बढ़ाने के खिलाफ दबाव बनाने की जरूरत है।