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रिटायरमेंट पर बोले जैक मा- ऑफिस में काम करते हुए मरने की बजाय किसी समुद्र तट पर मरना पसंद करूंगा
Tue, 10 Sep 2019 08:18 PM IST
अमर शर्मा
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Published by: अमर शर्मा
Updated Tue, 10 Sep 2019 08:18 PM IST
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jack ma
- फोटो : wikipedia
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चीन के प्रतिष्ठित अरबपति और अलीबाबा के संस्थापक जैक मा अपने 55वें जन्मदिन पर दिग्गज ई-कॉमर्स कंपनी के कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में मंगलवार को सेवानिवृत्त हो गए। इसके साथ ही इस कम्युनिस्ट देश में उनकी कंपनी के लिए एक युग का अंत हो गया।
एक गरीब परिवार में जन्मे मा बड़े होकर चीन के सबसे अमीर आदमी बन गए। वे चीनी लोगों में सबसे अधिक पूजनीय व्यवसायी हैं।
मा ने 1999 में अलीबाबा की सह-स्थापना की जो दुनिया की सबसे बड़ी इंटरनेट फर्मों में से एक बन गई।
अलीबाबा, जिसके पास बहुत से व्यवसाय हैं, अब इसकी कीमत 480 बिलियन अमरीकी डॉलर आंकी गई है और जैक मा को पिछले साल फोर्ब्स पत्रिका द्वारा चीन के सबसे अमीर आदमी के रूप में सूचीबद्ध किया गया था, जिसकी कुल संपत्ति 39 बिलियन अमरीकी डालर थी।
मा ने पिछले साल सेवानिवृत्ति की आश्चर्यजनक घोषणा की थी, जिससे उनकी कंपनी के साथ-साथ दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के व्यापार मंडल को भी झटका लगा।
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उन्होंने कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) डैनियल झांग को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया है, जबकि वे कंपनी के निदेशक के पद पर बने रहेंगे।
चीन की प्रौद्योगिकी टाइटन्स पर लिखे एक किताब के लेखक रेबेका फैनिन ने कहा, "मुझे लगता है कि जैक मा जैसे किसी को विकल्प ढूंढना बहुत मुश्किल होगा।"
फैनिन ने बीबीसी को बताया, "वह अपने आप में निराले हैं। वह चीन के स्टीव जॉब्स हैं।"
पिछले साल मा की सेवानिवृत्ति की घोषणा ने इन अटकलों को हवा दे दी कि वह चीन में मौजूदा कारोबारी माहौल के कारण पद छोड़ रहे हैं।
न्यूयॉर्क टाइम्स ने पिछले साल उनकी सेवानिवृत्ति की घोषणा के तुरंत बाद अपनी रिपोर्ट में कहा कि मा सेवानिवृत्त हो रहे हैं क्योंकि चीन में कारोबारी माहौल खराब हो रहा है, बीजिंग और राज्य के स्वामित्व वाले उद्यमों में तेजी से कंपनियों के साथ अधिक हस्तक्षेपवादी भूमिकाएं निभाई जा रही हैं।
हालांकि, मा ने उस रिपोर्ट का खंडन करते हुए कहा कि "अफवाहें पिछले 19 सालों से हर दिन हमारे इर्द-गिर्द रही हैं। भविष्य के लिए एक सपना देखने वाले के लिए, गपशप, अफवाहें, कष्ट और निराशा हमेशा आपके जीवन का हिस्सा रहेंगी।"
उन्होंने कहा, "दोस्तों को समझाने की जरूरत नहीं होती। जो दोस्त नहीं हैं, उन्हें आप जितना समझाएंगें स्थिति उतनी बिगड़ती जाती है।
उन्होंने अपनी सेवानिवृत्ति की योजना को यह कहकर सही ठहराने की कोशिश की कि वह आराम करना चाहते हैं और सांस्कृतिक और परोपकारी गतिविधियों को शुरू करना चाहते हैं।
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एक गरीब परिवार में जन्मे मा बड़े होकर चीन के सबसे अमीर आदमी बन गए। वे चीनी लोगों में सबसे अधिक पूजनीय व्यवसायी हैं।
मा ने 1999 में अलीबाबा की सह-स्थापना की जो दुनिया की सबसे बड़ी इंटरनेट फर्मों में से एक बन गई।
अलीबाबा, जिसके पास बहुत से व्यवसाय हैं, अब इसकी कीमत 480 बिलियन अमरीकी डॉलर आंकी गई है और जैक मा को पिछले साल फोर्ब्स पत्रिका द्वारा चीन के सबसे अमीर आदमी के रूप में सूचीबद्ध किया गया था, जिसकी कुल संपत्ति 39 बिलियन अमरीकी डालर थी।
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मा ने पिछले साल सेवानिवृत्ति की आश्चर्यजनक घोषणा की थी, जिससे उनकी कंपनी के साथ-साथ दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के व्यापार मंडल को भी झटका लगा।
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उन्होंने कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) डैनियल झांग को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया है, जबकि वे कंपनी के निदेशक के पद पर बने रहेंगे।
चीन की प्रौद्योगिकी टाइटन्स पर लिखे एक किताब के लेखक रेबेका फैनिन ने कहा, "मुझे लगता है कि जैक मा जैसे किसी को विकल्प ढूंढना बहुत मुश्किल होगा।"
फैनिन ने बीबीसी को बताया, "वह अपने आप में निराले हैं। वह चीन के स्टीव जॉब्स हैं।"
पिछले साल मा की सेवानिवृत्ति की घोषणा ने इन अटकलों को हवा दे दी कि वह चीन में मौजूदा कारोबारी माहौल के कारण पद छोड़ रहे हैं।
न्यूयॉर्क टाइम्स ने पिछले साल उनकी सेवानिवृत्ति की घोषणा के तुरंत बाद अपनी रिपोर्ट में कहा कि मा सेवानिवृत्त हो रहे हैं क्योंकि चीन में कारोबारी माहौल खराब हो रहा है, बीजिंग और राज्य के स्वामित्व वाले उद्यमों में तेजी से कंपनियों के साथ अधिक हस्तक्षेपवादी भूमिकाएं निभाई जा रही हैं।
हालांकि, मा ने उस रिपोर्ट का खंडन करते हुए कहा कि "अफवाहें पिछले 19 सालों से हर दिन हमारे इर्द-गिर्द रही हैं। भविष्य के लिए एक सपना देखने वाले के लिए, गपशप, अफवाहें, कष्ट और निराशा हमेशा आपके जीवन का हिस्सा रहेंगी।"
उन्होंने कहा, "दोस्तों को समझाने की जरूरत नहीं होती। जो दोस्त नहीं हैं, उन्हें आप जितना समझाएंगें स्थिति उतनी बिगड़ती जाती है।
उन्होंने अपनी सेवानिवृत्ति की योजना को यह कहकर सही ठहराने की कोशिश की कि वह आराम करना चाहते हैं और सांस्कृतिक और परोपकारी गतिविधियों को शुरू करना चाहते हैं।
जैक मा की यह बात दुनिया भर में हो गई वायरल
Jack Ma
जैक मा ने एक बात कही जो दुनिया भर में वायरल हो गई। मा ने कहा कि वह अलीबाबा में अपने काम की मेज पर प्राण त्यागने की बजाए किसी समुद्र तट पर मरना पसंद करेंगे।
उन्होंने कहा, "54 साल की उम्र में, इंटरनेट उद्योग में मैं थोड़ा उम्रदराज हो गया हूं, लेकिन कई अन्य क्षेत्रों के लिए काफी युवा हूं।"
उन्होंने कहा, "अगले 15 से 16 सालों में, अभी भी बहुत सी चीजें हैं जो मैं कर सकता हूं। मुझे पता है कि 55 या 56 साल या 60 की उम्र में लोगों के लिए छोड़ देना मुश्किल होगा। तब तक आप अपने भविष्य को लेकर निश्चित नहीं होंगे और आप अधर में लटकते रहेंगे।”
मा की सेवानिवृत्ति ऐसे समय में हुई है जब अलीबाबा की भारत में अपने निवेश को बढ़ाने के लिए कई बड़ी योजनाएं हैं। जहां विशेष तौर पर ईकॉमर्स में अमेजन जैसे अच्छी तरह से सुसज्जित दिग्गजों के साथ उसकी प्रतिस्पर्धा होगी।
चीन के फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) के कार्यकारी निदेशक अतुल डालाकोटी ने दिल्ली में पीटीआई को बताया, "मैं भारतीय तकनीकी क्षेत्र की उनकी समझ से हमेशा प्रभावित रहा और भारत के प्रति उनका बहुत सम्मान है। भारत में उनके निवेश ने भारतीय और चीनी तकनीकी कंपनियों की ताकत को साथ लाने का रास्ता खोल दिया है।
उन्होंने कहा, "54 साल की उम्र में, इंटरनेट उद्योग में मैं थोड़ा उम्रदराज हो गया हूं, लेकिन कई अन्य क्षेत्रों के लिए काफी युवा हूं।"
उन्होंने कहा, "अगले 15 से 16 सालों में, अभी भी बहुत सी चीजें हैं जो मैं कर सकता हूं। मुझे पता है कि 55 या 56 साल या 60 की उम्र में लोगों के लिए छोड़ देना मुश्किल होगा। तब तक आप अपने भविष्य को लेकर निश्चित नहीं होंगे और आप अधर में लटकते रहेंगे।”
मा की सेवानिवृत्ति ऐसे समय में हुई है जब अलीबाबा की भारत में अपने निवेश को बढ़ाने के लिए कई बड़ी योजनाएं हैं। जहां विशेष तौर पर ईकॉमर्स में अमेजन जैसे अच्छी तरह से सुसज्जित दिग्गजों के साथ उसकी प्रतिस्पर्धा होगी।
चीन के फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) के कार्यकारी निदेशक अतुल डालाकोटी ने दिल्ली में पीटीआई को बताया, "मैं भारतीय तकनीकी क्षेत्र की उनकी समझ से हमेशा प्रभावित रहा और भारत के प्रति उनका बहुत सम्मान है। भारत में उनके निवेश ने भारतीय और चीनी तकनीकी कंपनियों की ताकत को साथ लाने का रास्ता खोल दिया है।