240 साल पहले अमेरिका पहुंचे शख्स के इलाके की बेटी बनी देश की उपराष्ट्रपति, जानिए भारतीय प्रवासियों का सफर
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दुनिया के हर कोने में कोई ना कोई भारतीय प्रवासी आपको जरूर मिलेगा। वहीं विदेश मंत्रालय का कहना है कि इस समय दुनिया में भारत से बाहर 1.34 करोड़ लोग अलग-अलग देशों में रहते हैं। इन भारतीय प्रवासियों में सबसे ज्यादा नाम कमला हैरिस का हो रहा है, जो बुधवार को अमेरिका की उप राष्ट्रपति बनीं। उन्होंने पद की शपथ लेकर नया इतिहास रच दिया। आइए जानते हैं कि भारतीय प्रवासियों का यह सफर कब और कैसे शुरू हुआ था...
240 साल पहले हुई शुरुआत
साल 1970 में मद्रास (अब चेन्नई) का रहने वाला शख्स सबसे पहले अमेरिका पहुंचा था। वह उसी इलाके का रहने वाला था, जहां श्यामला गोपालन का परिवार रहता था। श्यामला गोपालन कमला हैरिस की मां हं। इस दौरान भारतीय प्रवासियों ने बहिष्कार झेला, उन्हें नागरिकता देकर वापस ले ली गई, उन्हें भेदभाव बर्दाश्त करना पड़ा।
इसके बावजूद उन्होंने अपने अधिकार हासिल किए और नोबेल पुरस्कार जीते और विश्वविद्यालयों का नेतृत्व किया। ऐसे यह समुदाय सबसे ज्यादा आमदनी और शिक्षा पाने वाला पाने वाला समुदाय बन गया। अब भारतीय प्रवासी अमेरिका की जनसंख्या में एक फीसदी से ज्यादा हिस्सेदारी रखते हैं।
पहली सदी की शुरुआत में अमेरिका पहुंची भारतीय प्रवासियों की पहली लहर
अमेरिका जाने वाले भारतीयों की पहली लहर में ज्यादातर सिख शामिल थे। वो पिछली सदी की शुरुआत में कनाडा से होकर अमेरिका पहुंचे थे। वहां ये खेतों और लकड़ी की मिलों में काम करते थे। दूसरे एशियाई देशों की तरह इन्हें भी नस्लीय भेदभाव झेलना पड़ा। 1917 के इमिग्रेशन एक्ट के तहत एशियाईयों पर रोक लगा दी गई।
अमेरिका: व्हाइट हाउस में 'प्रथम' कदम रखेंगी कमला तो इतिहास रचेगा हैरिस परिवार
1960 में अमेरिकी सिविल राइट्स मूवमेंट चला। 1965 में इमिग्रेशन मशीनरी को खत्म कर दिया गया। इसमें पड़ोसी देशों को छोड़कर सभी देशों के लिए 20,000 सालाना कोटा कर दिया गया।, इससे भारतीय प्रवासियों के लिए रास्ता खुल गया।
कमाई और पढ़ाई में अमेरिकियों से आगे
मौजूदा समय में लगभग 31.80 लाख भारतीय मूल के लोग अमेरिका निवासी हैं। 32 फीसदी अमेरिकियों की तुलना में 72 फीसदी भारतीय प्रवासियों के पास ग्रेजुएशन या उससे बड़ी डिग्री है। भारतीयों की औसतन सालाना आय एक लाख डॉलर यानी कि 73 लाख रुपये है, जो अमेरिकी परिवारों से दोगुनी है।
टेक्नोलॉजी वर्ल्ड में आगे
भारतीय-अमेरिकी सिलिकॉन वैली की ड्राइविंग फोर्स है। तीन सबसे बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों को भारतीय-अमेरिकी लीड कर रहे हैं। गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई, माइक्रोसॉफ्ट में सत्य नडेला और आईबीएम में अरविंद कृष्ण हेड हैं। टेक सेक्टर में विनोद खोसला सबसे बड़ा नाम है। वह सनमाइक्रो सिस्टम के फाउंडर हैं। एक अनुमान के मुताबिक सिलिकॉन वैली में दो लाख से ज्यादा भारतीय काम करते हैं।
अमेरिका: आज बाइडन के हाथ में होगी सत्ता, भारत में इस समय देख सकेंगे समारोह
इसके अलावा पांच भारती-अमेरिकियों ने पुलित्जर पुरस्कार जीता है। भारतीयों ने लॉ फील्ड में भी अपनी पहचान बनाई है। श्री श्रीनिवासन फेडरल कोर्ट ऑफ अपील्स फॉर द डिस्ट्रिक्ट ऑफ कोलंबिया के चीफ जज हैं। यह सुप्रीम कोर्ट के बाद सबसे अहम कोर्ट है।