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इटली: कोरोना वायरस के जिम्मेदार लोगों का लगाया जाएगा पता, लॉकडाउन के बाद शुरू होगा अध्ययन
Sun, 26 Apr 2020 08:10 PM IST
श्रीधर मिश्रा
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, रोम
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, रोम
Published by: श्रीधर मिश्रा
Updated Sun, 26 Apr 2020 08:10 PM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : PTI
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कोरोना वायरस का कहर झेल रहा इटली लॉकडाउन से निकलने की तैयारी कर रहा है। ऐसे में यह स्पष्ट है कि लोम्बार्डी में कुछ गड़बड़ियां हुईं, जो कोरोना वायरस से सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्र रहा।
बता दें कि इटली यूरोप में कोरोना वायरस से सबसे ज्यादा प्रभावित देश है। अमेरिका के बाद सबसे ज्यादा इसी देश में कोरोना वायरस से लोगों की जान गई है। यहां महामारी से 26 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।
दरअसल इटली में सबसे पहले कोरोना वायरस का मामला 21 फरवरी को सामने आया था। उस समय विश्व स्वास्थ्य संगठन इस बात पर जोर दे रहा था कि वायरस पर नियंत्रण किया जा सकता है। हालांकि, इस बात के भी साक्ष्य हैं कि जनसांख्यिकी और स्वास्थ्य सेवाओं में कमियों के साथ ही राजनीतिक और व्यावसायिक फायदे के कारण लोम्बार्डी की एक करोड़ आबादी प्रभावित हुई। महामारी से सबसे ज्यादा खराब हालत यहां के नर्सिंग होम में देखी गई।
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विषाणु विज्ञानी और महामारी विशेषज्ञों का कहना है कि वहां क्या गड़बड़ियां हुईं, इसका अध्ययन सालों तक होगा। इसके अलावा इस बारें में भी अध्ययन किया जाएगा कि यूरोप में सबसे बेहतर व्यवस्था जिसे माना जाता है, वहां वायरस ने किस तरह चिकित्सा व्यवस्था को अस्त-व्यस्त कर दिया। जबकि, पड़ोस के वेनेटो में वायरस अपेक्षाकृत नियंत्रण में रहा।
अभियोजक इस बात पर विचार कर रहे हैं कि अलग-अलग नर्सिंग होम में सैकड़ों लोगों की मौत के लिए किसे जिम्मेदार ठहराया जाए। खास कर तब जब मरने वाले कई लोगों को लोम्बार्डी के आधिकारिक मौत के आंकड़े 13,269 में शामिल नहीं किया गया।
वहीं, लोम्बार्डी में इस महामारी के खिलाफ सबसे आगे खड़े चिकित्सकों और नर्सों की काफी तनाव, थकान और भय के बीच अपनी जिंदगी को खतरे में डालकर रोगियों का उपचार करने के लिए उनका नायक के तौर पर प्रशंसा की जा रही है।
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बता दें कि इटली यूरोप में कोरोना वायरस से सबसे ज्यादा प्रभावित देश है। अमेरिका के बाद सबसे ज्यादा इसी देश में कोरोना वायरस से लोगों की जान गई है। यहां महामारी से 26 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।
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दरअसल इटली में सबसे पहले कोरोना वायरस का मामला 21 फरवरी को सामने आया था। उस समय विश्व स्वास्थ्य संगठन इस बात पर जोर दे रहा था कि वायरस पर नियंत्रण किया जा सकता है। हालांकि, इस बात के भी साक्ष्य हैं कि जनसांख्यिकी और स्वास्थ्य सेवाओं में कमियों के साथ ही राजनीतिक और व्यावसायिक फायदे के कारण लोम्बार्डी की एक करोड़ आबादी प्रभावित हुई। महामारी से सबसे ज्यादा खराब हालत यहां के नर्सिंग होम में देखी गई।
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विषाणु विज्ञानी और महामारी विशेषज्ञों का कहना है कि वहां क्या गड़बड़ियां हुईं, इसका अध्ययन सालों तक होगा। इसके अलावा इस बारें में भी अध्ययन किया जाएगा कि यूरोप में सबसे बेहतर व्यवस्था जिसे माना जाता है, वहां वायरस ने किस तरह चिकित्सा व्यवस्था को अस्त-व्यस्त कर दिया। जबकि, पड़ोस के वेनेटो में वायरस अपेक्षाकृत नियंत्रण में रहा।
अभियोजक इस बात पर विचार कर रहे हैं कि अलग-अलग नर्सिंग होम में सैकड़ों लोगों की मौत के लिए किसे जिम्मेदार ठहराया जाए। खास कर तब जब मरने वाले कई लोगों को लोम्बार्डी के आधिकारिक मौत के आंकड़े 13,269 में शामिल नहीं किया गया।
वहीं, लोम्बार्डी में इस महामारी के खिलाफ सबसे आगे खड़े चिकित्सकों और नर्सों की काफी तनाव, थकान और भय के बीच अपनी जिंदगी को खतरे में डालकर रोगियों का उपचार करने के लिए उनका नायक के तौर पर प्रशंसा की जा रही है।