इटली से ग्राउंड रिपोर्ट : बेबसी... आखिरी समय परिजनों को देखे बगैर दुनिया से रुखसत हो रहे बुजुर्ग
निरंतर एक्सेस के लिए सब्सक्राइब करें
तकरीबन छह करोड़ की आबादी वाला देश इटली इस समय अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है। कोरोना वायरस ने इटली में तबाही मचा दी है। अब तो जैसे मौत भी यहां पनाह मांग रही है। अकेले शुक्रवार को यहां 24 घंटे में 969 लोगों की मौत हो गई।
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ रजिस्टर्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ सब्सक्राइब्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
तकरीबन छह करोड़ की आबादी वाला देश इटली इस समय अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है। कोरोना वायरस ने इटली में तबाही मचा दी है। अब तो जैसे मौत भी यहां पनाह मांग रही है। अकेले शुक्रवार को यहां 24 घंटे में 969 लोगों की मौत हो गई।
अब तक किसी भी देश में एक दिन में मरने वालों की यह सबसे बड़ी संख्या है। यहां 51 डॉक्टर भी अब तक जान गंवा चुके हैं। हालात ऐसे हो गए हैं कि संक्रमण से जान गंवा रहे वायरस के खतरे और लॉकडाउन की वजह से अंतिम समय में अपने परिजनों को देख तक नहीं पा रहे।
मिलान और आसपास के शहरों के अस्पतालों से ऐसे कई वीडियो आए हैं। अस्पताल में भर्ती बुजुर्ग अपने परिजनों से मिलना चाहते हैं। वह अपने अंतिम समय में हैं, लेकिन संक्रमण के डर की वजह से ऐसा संभव नहीं है।
यह सोचकर बेहद मन बेहद व्यथित हो जाता है कि इन बुजुर्गों को अपने अंतिम समय में न केवल किसी परिजन का चेहरा देखने का अवसर नहीं मिल सका, बल्कि उनके अंतिम संस्कार में भी परिजन शरीक नहीं हो पाए। प्रशासन की ओर से भेजी जा रहीं मृतकों और अंतिम क्रिया से जुड़ी जानकारियां ही परिजनों के पास पहुंच रही हैं।
एकाकी जीवन बड़ी समस्या
बहुत सारे अकेले रहते हैं क्योंकि उनके बेटे-बेटियां दूसरे शहरों में काम करते हैं। पड़ोस में रहने वाली इतालवी महिला एल्दा रेटी की कोई संतान नहीं है। उनके पति का देहांत हो चुका है। जिनके बच्चे हैं, लॉकडाउन के बाद वे भी उनसे मिलने नहीं आ सके हैं। एकाकीपन जीवन को कठिन बना रहा है। परिणाम, इटली में मरने वालों में 80 से 85% की उम्र 65 वर्ष से अधिक है।
भयावह आंकड़े : लोगों में घर कर रही हताशा
मौत के बाद भी सुकून नहीं, अपने शहर में दफन होने को जगह भी नहीं मिल रही
वहां भी सभी को दफनाने लायक जगह नहीं मिलती तो दाह संस्कार कर अंतिम क्रिया पूर्ण की जा रही है। हालात धर्म या परंपराओं का सम्मान नहीं करते, शायद इसीलिए इसे आपात हालात कहा जाता रहा है।