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इस्राइल: प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट ने पहली कैबिनेट बैठक में ईरान के नए राष्ट्रपति की निंदा की

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, यरूशलम Published by: देव कश्यप Updated Mon, 21 Jun 2021 01:49 AM IST

सार

  • इस्राइल के प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट ने अपनी पहली कैबिनेट बैठक में ईरान के  नवनिर्वाचित राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी की निंदा की।
  • बेनेट ने कहा कि ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामनेई किसी को भी चुन सकते थे, लेकिन उन्होंने तेहरान के जल्लाद को चुना, वह व्यक्ति ईरानियों और दुनियाभर में सामूहिक हत्याओं का नेतृत्व करने के लिए कुख्यात है।
  • बेनेट ने 2015 के परमाणु समझौते पर लौटने से पहले विश्व नेताओं से 'जागने' का आग्रह किया।
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इस्राइल के नए प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट (फाइल फोटो)
इस्राइल के नए प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट (फाइल फोटो) - फोटो : Wikipedia
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विस्तार

इस्राइल के नए प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट ने नए ईरानी राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी की निंदा के साथ अपनी पहली कैबिनेट बैठक की शुरुआत की। रविवार को यरूशलम में कैबिनेट बैठक में बेनेट ने तेहरान के साथ परमाणु समझौते पर लौटने से पहले विश्व नेताओं से 'जागने' का आग्रह किया।

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ईरान में ऐतिहासिक रूप से कम मतदान के बीच, कट्टरपंथी न्यायपालिका प्रमुख इब्राहिम रईसी को शनिवार को 62 प्रतिशत वोट के साथ नया राष्ट्रपति चुना गया है।इब्राहिम रईसी ऐसे पहले ईरानी राष्ट्रपति हैं जिन पर पदभार संभालने से पहले ही अमेरिका प्रतिबंध लगा चुका है। उन पर यह प्रतिबंध 1988 में राजनीतिक कैदियों की सामूहिक हत्या के लिए तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना झेलने वाली ईरानी न्यायपालिका के मुखिया के तौर पर लगाया गया था।


बेनेट ने कैबिनेट बैठक में कहा कि 'ईरान के सभी लोगों में से ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामनेई किसी को भी चुन सकते थे, लेकिन उन्होंने तेहरान के जल्लाद को चुना, वह व्यक्ति ईरानियों और दुनियाभर में सामूहिक हत्याओं का नेतृत्व करने के लिए कुख्यात है, जिसने हजारों निर्दोष ईरानी नागरिकों को मार डाला।'

मध्य-पूर्व के लिए एक संवेदनशील समय में रईसी का उदय हुआ है, क्योंकि ईरान और विश्व शक्तियों ने 2015 के परमाणु समझौते को फिर से शुरू करने के प्रयासों को तेज कर दिया है, जिसने ईरान को अपने परमाणु कार्यक्रम पर प्रतिबंधों के बदले में राहत दी। हफ्तों से, ईरानी और अमेरिकी राजनयिक यूरोपीय बिचौलियों के माध्यम से वियना में समझौते पर वापसी के लिए बातचीत कर रहे हैं।

समझौते के लिए पार्टियों के बीच बातचीत रविवार को फिर से शुरू हुई, चुनाव के बाद यह पहला दौर है जिसने ईरान की सरकार में कट्टरपंथियों को मजबूती से नियंत्रण में रखा। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा 2018 में एकतरफा समझौते से हटने के बाद इस्राइल ने जिस ऐतिहासिक परमाणु समझौते का विरोध किया, वह खत्म हो गया है।

उस निर्णय ने ईरान को समय के साथ, यूरेनियम संवर्धन के लिए तय सीमा को छोड़ दिया है और तेहरान वर्तमान में अपने उच्चतम स्तर पर यूरेनियम के भंडार को समृद्ध कर रहा है, हालांकि वह अभी भी परमाणु हथियार बनाने से दूर है।

हालांकि व्हाइट हाउस ने अभी तक ईरान के चुनाव पर ध्यान नहीं दिया है, राष्ट्रपति जो बाइडन के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार, जेक सुलिवन ने रविवार को कहा कि बैठक का परिणाम परमाणु वार्ता को प्रभावित करने की नहीं थी क्योंकि ईरान के सर्वोच्च नेता, अयातुल्ला अली खामनेई चाहते हैं कि सौदा फिर से बहाल हो।

सुलिवन ने सीएनएन के स्टेट ऑफ द यूनियन पर कहा कि 'वह व्यक्ति जो इस बारे में निर्णय लेता है कि क्या ईरान परमाणु समझौते में वापस जाएगा, अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अपने परमाणु दायित्वों को ग्रहण करेगा, वह ईरान का राष्ट्रपति नहीं है, यह ईरान का सर्वोच्च नेता है, और वह व्यक्ति चुनाव से पहले से है, बदला नहीं है।'

इस्राइल की तरफ से, बेनेट ने कहा कि ईरानी राष्ट्रपति के रूप में रईसी का चुनाव 'विश्व शक्तियों के लिए परमाणु समझौते पर लौटने से पहले 'जागने' और यह समझने का आखिरी मौका है कि वे किसके साथ व्यापार कर रहे हैं।

विश्व शक्तियों को 'जागना' होगा : नफ्ताली बेनेट
इस्राइल के प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट ने पिछले सप्ताह नई गठबंधन सरकार बनाने के बाद रविवार को हुई अपनी पहली कैबिनेट बैठक में ईरान के नए राष्ट्रपति की आलोचना की। उन्होंने कहा कि ईरान का राष्ट्रपति चुनाव विश्व शक्तियों के लिए, तेहरान के साथ परमाणु समझौते पर लौटने से पहले 'जागने' का संकेत है। बेनेट ने परमाणु समझौते में शामिल देशों को रविवार को आगाह करते हुए कहा कि रईसी का ईरान का नया राष्ट्रपति चुना जाना अंतिम अवसर है जब वैश्विक शक्तियां संभल जाएं और इस बात पर गौर करें कि वे किसके साथ बातचीत कर रहे हैं।

बेनेट ने ईरान के नेताओं की निंदा करते हुए कह कि ये लोग हत्यारें हैं। इन्होंने सामूहिक तौर पर लोगों की हत्याएं की हैं। इन लोगों के पास ऐसे हथियार नहीं आने चाहिए, जिससे कि यह लाखों लोगों की हत्याएं कर सकें। दरअसल, इस्राइल लंबे समय से यह कहता आया है कि वो अपने चिर-प्रतिद्वंद्वी ईरान के परमाणु कार्यक्रम का विरोध करता है और उसे परमाणु हथियार बनाने नहीं देगा।

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