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ईरान परमाणु डीलः कुछ बात बनी, तो रुकावट डालने में जुटे इस्राइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू
Fri, 05 Mar 2021 04:10 PM IST
Harendra Chaudhary
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तेहरान
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तेहरान
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Fri, 05 Mar 2021 04:10 PM IST
सार
इजराइल के राजनीतिक विश्लेषकों ने कहा है कि नेतन्याहू ने इस बयान के जरिए अमेरिका के साथ-साथ इजराइल की जनता को भी एक खास सियासी संदेश दिया। इजराइल में चुनाव का माहौल है...
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इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू
- फोटो : PTI (फाइल फोटो)
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विस्तार
परमाणु करार को लेकर ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत शुरू होने के रास्ते की एक रुकावट दूर हुई है। संयुक्त राष्ट्र के निरीक्षकों ने एलान किया है कि उनकी ईरान से इस बात पर सहमति बन गई है कि ईरान बातचीत की मेज पर लौटेगा। ये बातचीत ईरान के परमाणु केंद्रों के बारे में उसकी पिछली घोषणाओं की सच्चाई जानने के लिए होगी।
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लेकिन इसी बीच इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ईरान परमाणु डील को फिर से जिंदा करने का इरादा जताने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन पर परोक्ष निशाना साधने की हद तक चले गए हैं। उन्होंने अपने समर्थकों के बीच एक भाषण में कहा- ‘इसे (परमाणु डील को) रोकने के लिए मैं पूरी दुनिया के खिलाफ खड़ा होने को तैयार हूं।’
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विश्लेषकों ने कहा है कि यह साफ तौर पर नेतन्याहू के तेवर में बदलाव है और यह महत्वपूर्ण है। अमेरिका में सत्ता परिवर्तन की तरफ इशारा करते हुए नेतन्याहू ने कहा- अंतरराष्ट्रीय परिस्थिति बदल गई है। अब इस खतरनाक समझौते की तरफ लौटने का इरादा जताया जा रहा है। मैं अकेला व्यक्ति हूं, जो हमेशा इस मामले में पूरी दुनिया के खिलाफ खड़ा रहेगा।
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इजराइल के राजनीतिक विश्लेषकों ने कहा है कि नेतन्याहू ने इस बयान के जरिए अमेरिका के साथ-साथ इजराइल की जनता को भी एक खास सियासी संदेश दिया। इजराइल में चुनाव का माहौल है। इसके बीच नेतन्याहू ने राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर सख्त रुख अपनाने का संकेत दिया है। उन्होंने कहा- ‘हमारे देश के लिए जो भी खतरा पैदा होगा, उसके खिलाफ कोई कदम उठाने से मैं नहीं हिचकुंगा।’ विश्लेषकों ने कहा है कि अगर यह चुनावी जुमला हो, तब भी इससे बाइडन प्रशासन के लिए ईरान के मामले में कोई सकारात्मक कदम उठाने में मुश्किल बढ़ सकती है।
इस बीच संयुक्त राष्ट्र से संबंधित अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) और ईरान के बीच सहमति गुरुवार देर रात बनी। आईएईए के महानिदेशक रफायल ग्रोसी ने कहा कि अब तक ईरान आईएईए के निरीक्षकों के प्रश्नों का जवाब देने से इनकार कर रहा था। लेकिन अब दोनों पक्षों में तकनीकी सवालों पर सीधी बातचीत होगी। ये बातचीत अप्रैल में शुरू होगी। इससे पहले ईरान ने परमाणु डील फिर से लागू करने के सवाल पर यूरोपियन यूनियन (ईयू) की तरफ से प्रस्तावित वार्ता में भाग लेने से इनकार कर दिया था। उसके बाद ईयू ने आईएईए की बोर्ड मीटिंग में ईरान के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाने का एलान किया था। लेकिन ताजा समझौते के बाद ईयू ने ये प्रस्ताव ना लाने का फैसला किया है।
इसे सकारात्मक घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है। ईरान ने कहा था कि अगर निंदा प्रस्ताव लाया गया, तो वह आईएईए से हर प्रकार का सहयोग छोड़ देगा। उधर फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने धमकी दी थी कि अगर ईरान ने अपनी तरफ से स्पष्ट सकारात्मक रुख नहीं दिखाया, तो परमाणु समझौता पूरी तरह फेल हो जाएगा। अब ईयू ने कहा है कि चूंकि ईरान आईएईए को जानकारियां देने को तैयार हो गया है, इसलिए वह निंदा प्रस्ताव लाने के बजाय कूटनीति को मौका देगी।
उधर ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि ताजा घटनाक्रम से कूटनीति की वह राह आगे बढ़ सकती है, जिसकी शुरुआत ईरान और आईएईए ने की है। आईएईए में ईरान के राजदूत काजिम घरीबाबादी ने कहा है- सघन कूटनीतिक विचार-विमर्श के कारण गैर-जरूरी तनाव को टालने की एक उम्मीद पैदा हुई है।
ईरान के नजरिए में ताजा विवाद की प्रमुख वजह अमेरिका का उसके ऊपर से पाबंदियां हटाने के लिए तैयार नहीं होना है। इसीलिए पिछले महीने आईएईए के कुछ निरीक्षकों पर रोक लगा दी थी। लेकिन अब कूटनीतिक संभावनाएं एक बार फिर खुली हैं। जानकारों का कहना है कि अमेरिका इस समय अपनी तरफ से कुछ सकारात्मक संदेश दे तो परमाणु डील को पुनर्जीवित करने की संभावना को और मजबूती मिल सकती है।