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इस्राइल होगा ‘ह्यूमन राइट्स वॉच’ के प्रतिनिधि को निकालने वाला पहला लोकतांत्रिक देश

Mon, 25 Nov 2019 12:35 PM IST
योगेश साहू वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: योगेश साहू Updated Mon, 25 Nov 2019 12:35 PM IST
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Israel will be the first democratic country to remove Human Rights Watch representative
बेंजामिन नेतन्याहू(फाइल फोटो) - फोटो : Social Media

इस्राइल ने मानवाधिकार संगठन ‘ह्यूमन राइट्स वॉच’ (एचआरडब्ल्यू) के अधिकारी को देश से निकालने का फैसला लिया है। ऐसा करने वाला वह पहला लोकतांत्रिक देश बनने जा रहा है। एचआरडब्ल्यू के एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर केन रॉथ ने रविवार को इस संबंध में जानकारी दी।

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उन्होंने इस्राइल और फलस्तीन में मानवाधिकार के हालात पर नजर रख रहे ओमार शकीर को डिपोर्ट करने के फैसले की निंदा की। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका के रहने वाले ओमार ने हाल में इस्राइल के बहिष्कार की बात की थी। इसी को लेकर उन्हें देश से बाहर किया जा रहा है। 
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अपने कानून के तहत बाहर निकाल सकता है इस्राइल
इस्राइल के साल 2017 के एक कानून के मुताबिक, सरकार चाहे तो देश के बहिष्कार की बात करने वाले किसी भी विदेशी नागरिक को डिपोर्ट कर सकती है। बता दें कि इस्राइल की सुप्रीम कोर्ट ने ओमार को डिपोर्ट करने के फैसले को सही पाया था।
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इस हिसाब से ओमार पहले ऐसे व्यक्ति होंगे, जिन्हें इस्राइल से बाहर का रास्ता दिखा दिया जाएगा। उधर, ह्यूमन राइट्स वॉच ने यह मानने से इनकार किया है कि शकीर ने कभी भी इस्राइल के बहिष्कार की बात कही है। न्यूज एजेंसी से रॉथ ने कहा कि मुझे अब तक किसी ऐसे लोकतंत्र के बारे में नहीं पता, जिसने मानवाधिकार रिसर्चर को देश से निकाला हो।

उत्तर कोरिया, वेनेजुएला और ईरान ने ऐसा जरूर किया है, लेकिन किसी लोकतांत्रिक देश के ऐसा कुछ करने की जानकारी नहीं है। रॉथ ने यह भी कहा कि चुनाव और फ्री प्रेस होने के बावजूद इस्राइल जहां तक हो सकता है वहां तक फलस्तीन में मानवाधिकार हनन के मामलों को दबाने की कोशिश करता है।

ओमार शकीर पर क्या आरोप हैं?

ओमार पर आरोप है कि इस्राइल के फलस्तीन के साथ बर्ताव की वजह से वह इस्राइल के खिलाफ हैं। ओमार पर इस्राइल के खिलाफ बहिष्कार, भंडाफोड़ और प्रतिबंध लगाने के अभियान के समर्थक होने का भी आरोप है। इस्राइल के गृह मंत्री आर्येह देरी ने हाल ही में कहा भी था कि जो लोग इस्राइल के खिलाफ काम कर रहे हैं, उन्हें पता होना चाहिए कि हम उन्हें जीने और यहां काम नहीं करने देंगे।

वहीं शकीर इन आरोपों को कई बार नकार चुके हैं। इस्राइल से बाहर निकाले जाने के फैसले के बाद उन्होंने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें अमेरिका वापस भेजने के फैसले को सही बताया था।

इस पर ओमार का कहना है कि न कभी उन्होंने और न ही ह्यूमन राइट्स वॉच के किसी प्रतिनिधि ने इस्राइल के बहिष्कार की बात कही है। हालांकि, फ्री स्पीच के तहत हम जो चाहें वो कह सकते हैं।

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