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अब बुजुर्ग फिर होंगे जवान, यह देश बना रहा 'अचूक' फॉर्मूला

Fri, 20 Nov 2020 03:13 PM IST
कुमार संभव वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तेल अवीव
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तेल अवीव Published by: कुमार संभव Updated Fri, 20 Nov 2020 03:13 PM IST
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Israel tel aviv university scientists claims to rejuvenate the elderly through hyperbaric therapy international studies
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
हर इंसान के मन में एक तमन्ना जरूर होती है कि वह कभी बूढ़ा न हो। हमेशा जवान और तंदरुस्त बना रहे। इंसान की इसी ख्वाहिश को पूरा करने के मकसद से तमाम वैज्ञानिकों ने रिसर्च की, लेकिन अब तक सफल नहीं हुए। इस बीच इजरायल के वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि उन्होंने उम्र बढ़ने से रोकने का फॉर्मूला तैयार कर लिया है और इसमें काफी हद तक सफलता भी मिली है। उनका दावा है कि उनहोंने अब तक 35 लोगों पर अपने इस फॉर्मूले को आजमाया, जिसके नतीजे काफी सकारात्मक रहे। 
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इस वजह से बुजुर्ग होते हैं लोग
इजरायल के वैज्ञानिकों ने बताया कि इंसानी शरीर में जब भी कोई सेल दोबारा बनता है तो उसकी जवानी कम हो जाती है। यह प्रक्रिया निरंतर चलती रहती है और व्यक्ति जवान से बुजुर्ग होता चला जाता है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, जवान से बुजुर्ग होने की प्रक्रिया टेलोमेरेस की कमी के चलते होती है। इस स्ट्रक्चर की मदद से ही हमारे क्रोमोसोम्स कैप होते हैं। 
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इजरायल ने इस तरह पाई कामयाबी
इजरायल के वैज्ञानिकों का दावा है कि उन्होंने ऐसा फॉर्मूला तैयार कर लिया है, जिससे टेलोमेरेस की कमी को दूर किया जा सकता है। इस फॉर्मूले की वजह से वे जवान से बुजुर्ग होने की प्रक्रिया को उल्टा करने में सफल हो गए हैं। 
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35 लोगों पर किया गया प्रयोग
जानकारी के मुताबिक, इजरायल के वैज्ञानिकों ने इस प्रयोग में 35 लोगों को शामिल किया। इसके बाद तीन महीने तक हर सप्ताह लगातार 90-90 मिनट के पांच सेशन में उन पर प्रयोग किया गया। इस दौरान सभी 35 लोगों को हाइपरबेरिक ऑक्सीजन रूम में बैठाया गया, जिससे उन लोगों के टेलोमेरेस 20 प्रतिशत तक बढ़ गए। 


इस तरह प्रभावित हो सकती है उम्र
तेल अवीव यूनिवर्सिटी में मेडिसिन और फैकल्टी स्कूल ऑफ न्यूरोसाइंस के डॉक्टर और  लीड रिसर्चर शेयार एफर्टी के मुताबिक, इस रिसर्च की प्रेरणा उन्हें बाहरी दुनिया से मिली। दरअसल, नासा ने जुड़वा बच्चों में से एक को अंतरिक्ष में भेजा था, जबकि दूसरा पृथ्वी पर रहा। इसके आधार पर हमने प्रयोग किया, जिससे पता लगा कि रिसर्च के दौरान टेलोमेरेस की लंबाई जितनी बढ़ी। इससे उससे पता लगा कि बाहरी वातावरण में परिवर्तन उम्र बढ़ने के कोर सेलुलर को प्रभावित कर सकता है। 
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