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कोरोनावायरस: इस्राइल के वैज्ञानिक कर सकते हैं घोषणा, इलाज के लिए विकसित कर लिया टीका

Fri, 13 Mar 2020 05:20 AM IST
योगेश साहू वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, यरुशलम
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, यरुशलम Published by: योगेश साहू Updated Fri, 13 Mar 2020 05:20 AM IST
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Israel Scientists likely to announce it developed coronavirus vaccine
कोरोनावायरस - फोटो : PTI

इस्राइल वैज्ञानिक आने वाले कुछ दिनों में कोरोनावायरस का इलाज करने के लिए टीका विकसित कर लेने की घोषणा कर सकते हैं। हालिया कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में ऐसा होने का दावा किया गया है। 

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इस्राइल के अखबार हारेज ने मेडिकल सूत्रों के हवाले से गुरुवार को खबर दी कि प्रधानमंत्री कार्यालय के तहत आने वाले इंस्टीट्यूट ऑफ बॉयोलोजिकल रिसर्च ने हाल में इस विषाणु की जैविक कार्यप्रणाली और उसकी विशेषताएं समझने में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। इन विशेषताओं में नैदानिक क्षमता, इस विषाणु की चपेट में आ चुके लोगों के वास्ते एंटीबॉडीज (प्रतिरक्षी) के उत्पादन और टीके के विकास आदि शामिल हैं।
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इस रिपोर्ट में कहा गया है कि हालांकि इस टीके को उपयोग के लिए प्रभावी और सुरक्षित समझे जाने से पहले विकास की प्रक्रिया से गुजरने के दौरान कई परीक्षण करने होंगे जिनमें महीनों लग सकते हैं। साथ ही इस्राइल के रक्षा मंत्रालय ने इस संबंध में पूछे गए सवालों पर इसकी पुष्टि नहीं की।
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रक्षा मंत्रालय ने यह जरूर कहा कि कोरोनावायरस के लिए टीके या परीक्षण किट्स के विकास के संदर्भ में इस बॉयोलोजिकल इंस्टीट्यूट के प्रयासों में कोई उपलब्धि हासिल नहीं हुई है। संस्थान का कामकाज व्यवस्थित कार्ययोजना के मुताबिक चलता है और उसमें वक्त लगेगा। यदि और जब भी कुछ बताने लायक होगा, निश्चित व्यवस्था के तहत ऐसा किया जाएगा।

मंत्रालय ने यह भी कहा कि यह बॉयोलोजिकल संस्थान विश्व विख्यात अनुसंधान एवं विकास एजेंसी है जो अनुभवी शोधकर्ताओं और वैज्ञानिकों व उत्तम बुनियादी ढांचे पर निर्भर करती है। संस्थान में विषाणु का चिकित्सकीय उपचार विकसित करने में 50 से ज्यादा अनुभवी वैज्ञानिक जुटे हुए हैं।

बता दें कि नेस जियोना में इंस्टीट्यूट ऑफ बॉयोलोजिकल रिसर्च को इस्राइल के रक्षा बल विज्ञान कोर के तहत 1952 में स्थापित किया गया था और बाद में वह असैन्य संगठन बन गया। अखबार के मुताबिक तकनीकी तौर पर यह संस्थान प्रधानमंत्री कार्यालय के निगरानी में है, लेकिन यह रक्षा मंत्रालय से करीबी संवाद रखता है। 

बताया जाता है कि प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतान्याहू ने संस्थान को एक फरवरी को कोविड-19 का टीका विकसित करने के लिए कहा था। रिपोर्ट के अनुसार ऐसे किसी भी टीके को विकसित करने की सामान्य प्रक्रिया में चिकित्सकीय परीक्षण से पहले जानवरों पर परीक्षण की लंबी प्रक्रिया से गुजरना होता है। ताकि संबंधित दवा के दुष्प्रभावों के बारे में अध्ययन किया जा सके।

अखबार ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि कोरोनावायरस को लेकर वैश्विक स्तर पर जिस तरह की आपातस्थिति है उसे देखते हुए लग रहा है कि इस प्रक्रिया में तेजी आ सकती है क्योंकि बहुत सारे लोगों पर इस विषाणु का खतरा मंडरा रहा है।


इस्राइल के मीडिया संस्थान पोर्ट वाईनेट ने करीब तीन सप्ताह पहले खबर दी थी कि जापान, इटली और अन्य देशों से कोरोनावायरस नमूनों के पांच खेप पहुंची हैं। उन्हें रक्षा मंत्रालय के विशेष रूप से सुरक्षत कूरियर में इंस्टीट्यूट ऑफ बॉयोलोजिकल रिसर्च में लाया गया और उन्हें शून्य से नीचे 80 डिग्री के तापमान पर रखा गया है। तब से ही विशेषज्ञ टीका विकसित करने में जुटे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि टीके के विकास में कुछ महीने से लेकर डेढ़ साल तक का वक्त लगता है।

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