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इस्राइल में चुनाव: आज होंगे मतदान, PM नेतन्याहू के सामने पूर्व सैनिक की चुनौती; किन मुद्दों पर वोट करेगी जनता?
Tue, 27 Oct 2026 05:18 AM IST
शिवम गर्ग
एजेंसी, यरूशलम।
एजेंसी, यरूशलम।
Published by: शिवम गर्ग
Updated Tue, 27 Oct 2026 05:18 AM IST
सार
इस्राइल के संसदीय चुनाव में नेतन्याहू की सत्ता, हमास हमले की जवाबदेही और ईरान को लेकर सरकार की नीति पर फैसला होना है। विपक्षी नेताओं की चुनौती और सेना प्रमुख से कथित मतभेद ने मुकाबले को और अहम बना दिया है। क्या नेतन्याहू अपना राजनीतिक दबदबा कायम रख पाएंगे? जानिए...
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इस्राइल में मतदान आज
- फोटो : Amar Ujala Graphics
विस्तार
इस्राइल में मंगलवार को संसदीय चुनाव के लिए मतदान होगा। स्थानीय समय के मुताबिक इस्राइल की जनता सुबह सात बजे से रात 10 बजे तक मताधिकार का इस्तेमाल कर सकेगी। भारतीय समयानुसार आज सुबह लगभग 10.30 बजे से वोटिंग की शुरुआत होगी। चुनाव में 7 अक्तूबर 2023 को हमास के हमले, उसके बाद हुए युद्धों और सरकार की घरेलू व विदेश नीतियों पर चर्चा प्रमुख मुद्दे हैं। पूर्व सैन्य प्रमुख गादी आइजेनकोट और पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट समेत विपक्षी नेता नेतन्याहू की दक्षिणपंथी सरकार को चुनौती दे रहे हैं। वहीं, चुनाव से ठीक पहले इस्राइली सेना (आईडीएफ) प्रमुख इयाल जमील के बीच मतभेद की खबरों ने नेतन्याहू की चुनौती और बढ़ा दी।
नेतन्याहू ने सेना प्रमुख जमीर के साथ किसी भी तरह के टकराव या मतभेद की खबर को बकवास करार दिया। नेतन्याहू ने हाल ही में एक इंटरव्यू में कहा था कि उन्होंने सेना और मोसाद को ईरान की सत्तारूढ़ सरकार को हटाने का निर्देश दिया है। विपक्ष और आलोचकों ने आरोप लगाया कि नेतन्याहू अपने राजनीतिक हितों को साधने, चुनाव में फायदा उठाने या चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित/टालने के लिए ईरान के साथ तनाव को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहे हैं। दक्षिणपंथी लिकुड पार्टी के नेता नेतन्याहू 1996 से तीन अलग-अलग समय में करीब 19 साल तक प्रधानमंत्री रह चुके हैं। नेतन्याहू पर धोखाधड़ी और रिश्वत लेने जैसे आरोप हैं, लेकिन वह इन आरोपों से इन्कार करते रहे हैं। 7 अक्टूबर के हमास हमले को रोकने में नाकाम रहने को लेकर भी उनकी आलोचना होती रही है।
ईरान हमले के लिए आईडीएफ प्रमुख ने मांगा लिखित आदेश
मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि नेतन्याहू चुनाव से पहले ईरान पर हमला करना चाहते थे लेकिन जमीर ने निर्देश की कानूनी मंजूरी से जुड़े लिखित दस्तावेज मांगे। साथ ही इस पर और चर्चा की मांग की। सैन्य अधिकारियों को आशंका थी कि ईरान से टकराव बढ़ सकता है।
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अब जानिए प्रमुख उम्मीदवारों के बारे में
बेंजामिन नेतन्याहू के सामने सत्ता बचाने की चुनौती
इजरायल की राजनीति के सबसे अनुभवी और लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहे बेंजामिन नेतन्याहू के सामने सत्ता बचाने की बड़ी चुनौती है। करीब 19 वर्षों के अपने राजनीतिक प्रभुत्व और पूरे चार साल तक गठबंधन सरकार चलाने की उपलब्धि के बावजूद, उन्हें 7 अक्टूबर 2023 के हमास हमले के बाद सुरक्षा चूक, जवाबदेही और न्यायिक संस्थाओं की स्वतंत्रता जैसे मुद्दों पर विरोध का सामना करना पड़ रहा है। नेतन्याहू ने विपक्ष को वामपंथी दलों और अरब पार्टियों पर निर्भर गठबंधन के रूप में पेश करते हुए मतदाताओं से केवल लिकुड के पक्ष में मतदान करने की अपील की है। उनका चुनावी अभियान राष्ट्रीय सुरक्षा और राजनीतिक स्थिरता पर केंद्रित है।
गादी आइजेनकोट जवाबदेही और बदलाव का चेहरा
इजरायल के पूर्व सेना प्रमुख गादी आइजेनकोट नेतन्याहू के प्रमुख प्रतिद्वंद्वियों में शामिल हैं। उनकी याशर पार्टी को विभिन्न जनमत सर्वेक्षणों में मजबूत समर्थन मिलता दिखाया गया है। आइजेनकोट का मुख्य चुनावी मुद्दा 7 अक्टूबर के हमले के लिए जवाबदेही तय करना और घटनाक्रम की जांच के लिए स्वतंत्र आयोग का गठन करना है। सुरक्षा मामलों में सख्त रुख रखने वाले आइजेनकोट नेतन्याहू की नीतियों को इजरायल की सुरक्षा के लिए जोखिमपूर्ण बताते हैं। उनका लक्ष्य विपक्षी दलों को एकजुट कर नई सरकार बनाना और प्रधानमंत्री पद पर बदलाव सुनिश्चित करना है।
नफ्ताली बेनेट विपक्षी खेमे की अहम ताकत
पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट की बयाचाद पार्टी भी नेतन्याहू विरोधी खेमे की प्रमुख ताकत के रूप में सामने है। बेनेट का राजनीतिक महत्व इस बात में है कि वे दक्षिणपंथी और राष्ट्रवादी मतदाताओं के बीच समर्थन जुटाकर सत्ता परिवर्तन की संभावनाओं को मजबूत कर सकते हैं। आइजेनकोट, अविगदोर लिबरमैन और यायर गोलान के दलों के साथ विपक्षी खेमे की चुनावी स्थिति यह तय करने में अहम होगी कि नेतन्याहू को दोबारा सरकार बनाने का अवसर मिलता है या नहीं। हालांकि, विपक्षी दलों के बीच वैचारिक मतभेद और 120 सदस्यीय नेसेट में बहुमत के लिए जरूरी 61 सीटों का आंकड़ा हासिल करना उनके सामने बड़ी चुनौती है।
अविगदोर लिबरमैन और यायर गोलान
नेतन्याहू को चुनौती देने वाले विपक्षी खेमे में अविगदोर लिबरमैन की यिस्राएल बेतेनु पार्टी और यायर गोलान के डेमोक्रेट्स भी अहम भूमिका निभा रहे हैं। लिबरमैन अनिवार्य सैन्य या नागरिक सेवा, कानून के समक्ष समानता, नागरिक विवाह और शिक्षा में मूल पाठ्यक्रम लागू करने जैसे मुद्दों को उठा रहे हैं। वहीं, गोलान नेतन्याहू सरकार की जवाबदेही और 7 अक्टूबर के हमले की स्वतंत्र जांच की मांग को प्रमुखता दे रहे हैं। दोनों नेताओं का मानना है कि मजबूत लोकतांत्रिक विपक्ष ही सत्ता और नीतियों में बदलाव ला सकता है। चुनाव के बाद सरकार का स्वरूप इस बात पर निर्भर करेगा कि विपक्षी दल बहुमत जुटा पाते हैं, अल्पमत सरकार बनाते हैं या राष्ट्रीय एकता सरकार का विकल्प अपनाते हैं।
समाज में गहराती खाई...यहूदियों में पहले कभी नहीं दिखी ऐसी चिंता
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नेतन्याहू ने सेना प्रमुख जमीर के साथ किसी भी तरह के टकराव या मतभेद की खबर को बकवास करार दिया। नेतन्याहू ने हाल ही में एक इंटरव्यू में कहा था कि उन्होंने सेना और मोसाद को ईरान की सत्तारूढ़ सरकार को हटाने का निर्देश दिया है। विपक्ष और आलोचकों ने आरोप लगाया कि नेतन्याहू अपने राजनीतिक हितों को साधने, चुनाव में फायदा उठाने या चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित/टालने के लिए ईरान के साथ तनाव को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहे हैं। दक्षिणपंथी लिकुड पार्टी के नेता नेतन्याहू 1996 से तीन अलग-अलग समय में करीब 19 साल तक प्रधानमंत्री रह चुके हैं। नेतन्याहू पर धोखाधड़ी और रिश्वत लेने जैसे आरोप हैं, लेकिन वह इन आरोपों से इन्कार करते रहे हैं। 7 अक्टूबर के हमास हमले को रोकने में नाकाम रहने को लेकर भी उनकी आलोचना होती रही है।
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ईरान हमले के लिए आईडीएफ प्रमुख ने मांगा लिखित आदेश
मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि नेतन्याहू चुनाव से पहले ईरान पर हमला करना चाहते थे लेकिन जमीर ने निर्देश की कानूनी मंजूरी से जुड़े लिखित दस्तावेज मांगे। साथ ही इस पर और चर्चा की मांग की। सैन्य अधिकारियों को आशंका थी कि ईरान से टकराव बढ़ सकता है।
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अब जानिए प्रमुख उम्मीदवारों के बारे में
बेंजामिन नेतन्याहू के सामने सत्ता बचाने की चुनौती
इजरायल की राजनीति के सबसे अनुभवी और लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहे बेंजामिन नेतन्याहू के सामने सत्ता बचाने की बड़ी चुनौती है। करीब 19 वर्षों के अपने राजनीतिक प्रभुत्व और पूरे चार साल तक गठबंधन सरकार चलाने की उपलब्धि के बावजूद, उन्हें 7 अक्टूबर 2023 के हमास हमले के बाद सुरक्षा चूक, जवाबदेही और न्यायिक संस्थाओं की स्वतंत्रता जैसे मुद्दों पर विरोध का सामना करना पड़ रहा है। नेतन्याहू ने विपक्ष को वामपंथी दलों और अरब पार्टियों पर निर्भर गठबंधन के रूप में पेश करते हुए मतदाताओं से केवल लिकुड के पक्ष में मतदान करने की अपील की है। उनका चुनावी अभियान राष्ट्रीय सुरक्षा और राजनीतिक स्थिरता पर केंद्रित है।
गादी आइजेनकोट जवाबदेही और बदलाव का चेहरा
इजरायल के पूर्व सेना प्रमुख गादी आइजेनकोट नेतन्याहू के प्रमुख प्रतिद्वंद्वियों में शामिल हैं। उनकी याशर पार्टी को विभिन्न जनमत सर्वेक्षणों में मजबूत समर्थन मिलता दिखाया गया है। आइजेनकोट का मुख्य चुनावी मुद्दा 7 अक्टूबर के हमले के लिए जवाबदेही तय करना और घटनाक्रम की जांच के लिए स्वतंत्र आयोग का गठन करना है। सुरक्षा मामलों में सख्त रुख रखने वाले आइजेनकोट नेतन्याहू की नीतियों को इजरायल की सुरक्षा के लिए जोखिमपूर्ण बताते हैं। उनका लक्ष्य विपक्षी दलों को एकजुट कर नई सरकार बनाना और प्रधानमंत्री पद पर बदलाव सुनिश्चित करना है।
नफ्ताली बेनेट विपक्षी खेमे की अहम ताकत
पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट की बयाचाद पार्टी भी नेतन्याहू विरोधी खेमे की प्रमुख ताकत के रूप में सामने है। बेनेट का राजनीतिक महत्व इस बात में है कि वे दक्षिणपंथी और राष्ट्रवादी मतदाताओं के बीच समर्थन जुटाकर सत्ता परिवर्तन की संभावनाओं को मजबूत कर सकते हैं। आइजेनकोट, अविगदोर लिबरमैन और यायर गोलान के दलों के साथ विपक्षी खेमे की चुनावी स्थिति यह तय करने में अहम होगी कि नेतन्याहू को दोबारा सरकार बनाने का अवसर मिलता है या नहीं। हालांकि, विपक्षी दलों के बीच वैचारिक मतभेद और 120 सदस्यीय नेसेट में बहुमत के लिए जरूरी 61 सीटों का आंकड़ा हासिल करना उनके सामने बड़ी चुनौती है।
अविगदोर लिबरमैन और यायर गोलान
नेतन्याहू को चुनौती देने वाले विपक्षी खेमे में अविगदोर लिबरमैन की यिस्राएल बेतेनु पार्टी और यायर गोलान के डेमोक्रेट्स भी अहम भूमिका निभा रहे हैं। लिबरमैन अनिवार्य सैन्य या नागरिक सेवा, कानून के समक्ष समानता, नागरिक विवाह और शिक्षा में मूल पाठ्यक्रम लागू करने जैसे मुद्दों को उठा रहे हैं। वहीं, गोलान नेतन्याहू सरकार की जवाबदेही और 7 अक्टूबर के हमले की स्वतंत्र जांच की मांग को प्रमुखता दे रहे हैं। दोनों नेताओं का मानना है कि मजबूत लोकतांत्रिक विपक्ष ही सत्ता और नीतियों में बदलाव ला सकता है। चुनाव के बाद सरकार का स्वरूप इस बात पर निर्भर करेगा कि विपक्षी दल बहुमत जुटा पाते हैं, अल्पमत सरकार बनाते हैं या राष्ट्रीय एकता सरकार का विकल्प अपनाते हैं।
समाज में गहराती खाई...यहूदियों में पहले कभी नहीं दिखी ऐसी चिंता
- इस्राइल चुनाव को लेकर यहूदी समाज के बड़े हिस्से में जितनी चिंता है, वैसी पहले कभी नहीं दिखी। वजह भी है, मतदाताओं को उन विवादित फैसलों पर अपना फैसला सुनाने का मौका मिलेगा, जिन्होंने कई वर्षों से देश को बांट रखा है। साथ ही, उन्हें इस्राइल के भविष्य की दो बिल्कुल अलग तस्वीरों में से एक को चुनना है।
- नेतन्याहू के विरोधियों के मन में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या लंबे समय से सत्ता में रहे इस नेता को इस्राइल के इतिहास की सबसे बड़ी सुरक्षा विफलता के लिए जवाबदेह ठहराया जाएगा? यह विफलता 7 अक्तूबर 2023 के हमास हमले से जुड़ी है।
- कई अन्य अहम सवाल भी इस चुनाव में दांव पर हैं। क्या देश की न्यायपालिका को कमजोर करके सरकार को कहीं ज्यादा अधिकार दिए जाएंगे? क्या समाज के सभी वर्गों से सैन्य सेवा और बलिदान की मांग करते हुए देश का सामाजिक समझौता बदला जाएगा?