{"_id":"5ecfa4b46bde4d46b94ab47d","slug":"israel-cyber-chief-says-that-they-have-tackled-a-serious-cyber-attack-on-water-system-of-the-country","type":"story","status":"publish","title_hn":"इस्रायल के साइबर प्रमुख बोले, टाला गया देश की जल व्यवस्था पर होने वाला साइबर हमला","category":{"title":"World","title_hn":"दुनिया","slug":"world"}}
इस्रायल के साइबर प्रमुख बोले, टाला गया देश की जल व्यवस्था पर होने वाला साइबर हमला
Thu, 28 May 2020 05:17 PM IST
गौरव पाण्डेय
पीटीआई, येरुशलम
पीटीआई, येरुशलम
Published by: गौरव पाण्डेय
Updated Thu, 28 May 2020 05:17 PM IST
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर
इस्रायल की राष्ट्रीय साइबर शाखा के प्रमुख ने बृहस्पतिवार को आधिकारिक रूप से जानकारी दी कि देश ने पिछले महीने अपनी जल व्यवस्था पर बड़े साइबर हमले को टाल दिया। उन्होंने इसे ‘व्यवस्थित हमला’ करार दिया, जिसका उद्देश्य देश के प्रमुख ढांचे को नुकसान पहुंचाना था। इस हमले के पीछे पुराने दुश्मन ईरान का हाथ माना जा रहा है।
विज्ञापन
हालांकि, इस्रायल की राष्ट्रीय साइबर शाखा के प्रमुख यिगल उन्ना ने ईरान का सीधे जिक्र नहीं किया, न ही उन्होंने दो हफ्ते बाद इस्रायल के कथित पलटवार पर टिप्पणी की, जिसमें ईरान के एक महत्वपूर्ण बंदरगाह को बंद कर दिया गया था। उन्होंने कहा कि ये घटनाएं गुप्त युद्ध के नए युग की शुरुआत हैं और चेतावनी दी कि साइबर शीत युद्ध आ रहा है।
विज्ञापन
उन्होंने डिजिटल अंतरराष्ट्रीय साइबर सम्मेलन ‘साइबरसीएचलाइवएशिया’ को वीडियो माध्यम से संबोधित करते हुए कहा, ‘साइबर क्षेत्र में व्यस्त चीजें चल रही हैं और मेरा मानना है कि पिछले महीने और मई 2020 को हम आधुनिक साइबर युद्ध के इतिहास में बदलाव बिंदु के तौर पर याद रखेंगे।’
विज्ञापन
उन्होंने कहा, अगर बुरे लोग अपने षड्यंत्र में कामयाब हो जाते तो कोरोना संकट के बीच नागरिक आबादी को बड़ा नुकसान पहुंचता और उन्हें पानी की कमी या उससे भी बुरी स्थिति का सामना करना पड़ता। बता दें कि इस्रायल और ईरान एक-दूसरे के कट्टर दुश्मन हैं जो वर्षों से गुप्त युद्ध में संलिप्त रहे हैं और वे एक-दूसरे पर हाईटेक हैकिंग और साइबर हमले करते रहे हैं।
अमेरिका और इस्रायल की खुफिया एजेंसियों पर संदेह है कि उन्होंने स्टक्सनेट नाम का कम्प्यूटर वायरस वर्षों पहले छोड़ा था, ताकि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को बाधित किया जा सके। लेकिन उन्ना ने कहा कि आधुनिक इतिहास में पहली बार इस्रायल की जल व्यवस्था को हैक करने का प्रयास किया गया और यह वास्तविक जीवन को क्षति पहुंचाने जैसा प्रयास था न कि आईटी या डेटा को।
उन्होंने कहा कि अगर इस्रायल के राष्ट्रीय साइबर निदेशालय ने सही समय पर हमले का पता नहीं लगाया होता तो गलत अनुपात में पानी में क्लोरीन या अन्य रसायन मिल सकते थे और इसका नुकसानदायक और खतरनाक परिणाम होता।