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अमेरिका के बाद इस्राइल बना हैकिंग का निशाना, ईरान पर उठी उंगलियां
Mon, 21 Dec 2020 03:45 PM IST
Harendra Chaudhary
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Mon, 21 Dec 2020 03:45 PM IST
सार
कुछ रिपोर्टों में बताया गया है कि ताजा हैकिंग ईरान ने कराई है। व्हाइट स्ट्रीम की रिपोर्ट के मुताबिक ये हैकर समूह ईरान का ही है। पहले इसने जो हैकिंग की, उसकी फिरौती की रकम उसने ईरान की क्रिप्टोकरेंसी में स्वीकार की...
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : iStock
विस्तार
अमेरिका में हुआ साइबर हमला जहां एक बड़े सियासी विवाद में बदल गया है, वहीं अब इस्राइल के रक्षा उद्योग की हैकिंग होने की खबर आई है। एक हैकर ग्रुप पे2की ने दावा किया है कि उसने इस्राइल के कई रक्षा कारखानों के कंप्यूटर सिस्टमों को हैक किया है। इनमें इस्राइल एरोस्पेस इंडस्ट्रीज (आईएआई) भी शामिल है। पे2की ग्रुप ने खुलेआम ये हैकिंग करने का दावा किया है। उसने पिछले हफ्ते सोशल मीडिया पर एक पोल (सर्वे) आयोजित किया, जिसमें लोगों से पूछा गया कि उनकी राय इस्राइल के किस संगठन के पास सबसे सुरक्षित नेटवर्क है। उस ‘मतदान’ में सबसे ऊपर आईएआई आया।
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‘मतदान’ के बाद हैकर ग्रुप ने कहा कि ‘उसकी राय भी यही है, लेकिन चीजें बदलती रहती हैं, सावधान रहें।’ रविवार को इस ग्रुप ने दावा किया कि उसने आईएआई समेत कई इस्राइली संगठनों के कंप्यूटर सिस्टम को हैक कर लिया है। ग्रुप ने दावा किया कि उसके पास यह सबूत है कि उसने आईएआई की डायरेक्ट्री और आईएआई की सहयोगी कंपनी एल्टा सिस्टम्स लिमिटेड के एक्सेस इन्फॉर्मेशन तक अपनी पहुंच बना ली है। ग्रुप ने एल्टा सिस्टम्स सर्वर्स के यूजर्स की सूची डार्क वेब पर प्रकाशित कर दी। हालांकि वहां डाली गई सूचनाएं गोपनीय श्रेणी की नहीं हैं, लेकिन ग्रुप ने कहा है कि उसके पास और भी संवेदनशील सूचनाएं हैं।
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आईएआई फिलहाल हैकिंग के दावे की जांच कर रही है। उसने दावा किया है कि उसकी किसी गोपनीय या ऐसी सूचना की चोरी नहीं हुई है, जिससे उसे कोई नुकसान हो। साइबर सिक्युरिटी फर्म चेक प्वाइंट और व्हाइटस्ट्रीम की पे2की के बारे में तैयार की गई रिपोर्टों से पता चलता है कि ये ग्रुप फिरौती वसूलने के लिए हैकिंग करता है। कुछ रिपोर्टों में बताया गया है कि ताजा हैकिंग ईरान ने कराई है। व्हाइटस्ट्रीम की रिपोर्ट के मुताबिक ये हैकर समूह ईरान का ही है। पहले इसने जो हैकिंग की, उसकी फिरौती की रकम उसने ईरान की क्रिप्टोकरेंसी में स्वीकार की।
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इस बीच अमेरिका अपने यहां हुई ‘इतिहास की सबसे बड़ी’ हैकिंग से उठे सवालों से जूझ रहा है। यह मसला वहां एक बड़ा राजनीतिक विवाद बन गया है, क्योंकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसके पीछे रूस की भूमिका को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। इसके बदले उन्होंने कहा कि इसके पीछे चीन का हाथ हो सकता है। जबकि इसके पहले उनके विदेश मंत्री माइक पोम्पियो इस साइबर हमले का दोष रूस पर मढ़ चुके थे।
अब वरिष्ठ सीनेटर और 2012 के राष्ट्रपति चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार रहे मिट रोमनी ने कहा है कि जब रूस का सवाल आता है, तो राष्ट्रपति ट्रंप एक ब्लाइंड स्पॉट का शिकार हो जाते हैं। रोमनी ने कहा कि रूस ने जो किया है, उससे उसकी ये क्षमता जाहिर हो गई है कि वह हमारी बिजली, पानी सप्लाई और हमारे संचार को अस्त-व्यस्त कर सकता है। उन्होंने इस साइबर हमले का कड़ा जवाब देने की मांग की। डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसद एडम शिफ ने भी इस हमले में रूस को बचाने और दोष चीन पर मढ़ने की ट्रंप की कोशिश की निंदा की है।
इस घटना में हैकर्स ने अमेरिका के सोलरविंड्स ऑरियन प्लैटफॉर्म को निशाना बनाया। इस प्लैटफॉर्म का इस्तेमाल अमेरिकी सरकार की कई एजेंसियां और कई निजी कंपनियां करती हैं। अभी तक इस बारे में कोई सबूत नहीं दिया गया है कि इस साइबर हमले के पीछे रूस का साथ था। लेकिन मीडिया रिपोर्टों और पोम्पियो समेत कई ऩेताओं ने इसके लिए रूस को ही दोषी ठहराया है।