पाकिस्तान की अदालतों ने भी उठाया भारत के खिलाफ जहर उगलने का बीड़ा
पाकिस्तान की कोर्ट ने कहा कि लोकतांत्रिक देश में विरोधियों को आवाज उठाने का पूरा हक है। बता दें कि दुनियाभर में विरोध के बाद पख्तून नेता के समर्थकों से देशद्रोह के केस हटाए गए।
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पाकिस्तान ने अब खुद को सबसे ज्यादा लोकतांत्रिक साबित करने के नाम पर भारतीय न्याय व्यवस्था और कानूनी प्रक्रिया पर तंज कसा है। इस्लामाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अतहर मिनल्लाह ने सोमवार को पख्तून नेता मंजूर पश्तीन की गिरफ्तारी के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए हिरासत में लिए गए लोगों के पक्ष में फैसला सुनाया। कोर्ट ने उन पर लगाए सारे मामले वापस लेते हुए कहा, किसी भी लोकतांत्रिक सरकार को अभिव्यक्ति की आजादी कुचलने का कोई हक नहीं। इसी दौरान उन्होंने भारत पर तंज कसा और कहा, यह पाकिस्तान है, भारत नहीं।
पाकिस्तानी अखबार ‘द डॉन’ के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए इन लोगों को जमानत तो दो फरवरी को ही मिल गई थी, लेकिन कोर्ट के निर्देश के बाद इस्लामाबाद के डिप्टी कमिश्नर हम्जा शफाकत ने सोमवार को हाईकोर्ट को बताया कि इन सभी 23 कार्यकर्ताओं पर लगाए गए मामले वापस ले लिए गए हैं। दो फरवरी को पख्तून तहफ्फ्ज मूवमेंट (पीटीएम) और अवामी वर्कर्स पार्टी (एडब्ल्यूपी) के कार्यकर्ताओं को जमानत देते हुए हाईकोर्ट ने इस्लामाबाद प्रशासन को कड़ी फटकार लगाई थी और कहा था कि आप किसी को शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करने से कैसे रोक सकते हैं?
सरकार ने कहा-देश विरोधी नारे लगाए थे
सुनवाई के दौरान प्रशासन का पक्ष रखते हुए इस्लामाबाद के एडवोकेट जनरल तारिक महमूद जहांगीर ने कहा, हम पिछले 20 सालों से आतंकवाद के खिलाफ लड़ रहे हैं। इन प्रदर्शनकारियों में से कुछ देश-विरोधी नारे लगा रहे थे और पर्चे बांट रहे थे। इसलिए उन पर देशद्रोह जैसी धाराएं लगाई गईं। इकसे जवाब में मिनल्लाह ने कहा, क्या किसी देश की सरकार इतनी कमजोर होती है कि वह चंद लोगों के नारे लगाने से डर जाए? क्या किसी लोकतांत्रिक सरकार को अपनी आलोचना सुनने की हिम्मत नहीं रखनी चाहिए?
तीन करोड़ पख्तून लेकिन वजूद पर संकट
दरअसल, पाकिस्तान में करीब तीन करोड़ पख्तून हैं जो कबाइली इलाकों में उनके खिलाफ चलाए जा रहे अभियान का विरोध करते हैं। पाकिस्तानी पख्तूनों का संगठन पीटीएम अपने समुदाय की सुरक्षा के साथ-साथ उनके अचानक लापता होने और हत्याएं होने के खिलाफ आवाज उठाता है। उनका आरोप है कि उन्हें गैरकानूनी तरीके से गिरफ्तार किया जाता है। पाकिस्तान में पख्तूनों की बुरी हालत और उनके खिलाफ जुल्म की कई खबरें लगातार आती रहती हैं। पख्तून, जिन्हें आमतौर पर पठान के नाम से जाना जाता है, मूलत: ईरान और अफगानिस्तान से हैं और पश्तो बोलते हैं। पाकिस्तान में इनकी बड़ी आबादी सैकड़ों सालों से है। इतनी बड़ी आबादी के बावजूद इनके वजूद पर हमेशा संकट रहता है।
दुनियाभर में पाकिस्तान के खिलाफ प्रदर्शन
पीटीएम मुखिया मंजूर को 27 जनवरी को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ देश-विरोधी धारायें लगाईं। इस गिरफ्तारी के खिलाफ दुनिया के कई देशों में पाकिस्तानी दूतावास के बाहर प्रदर्शन हुए और रिहाई की मांग उठी। इस्लामाबाद में पीटीएम और एडब्ल्यूपी के कार्यकर्ता सड़कों उतरे। इस पर सख्ती करते हुए पुलिस ने 23 कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर देशद्रोह की धाराएं लगा दीं। आतंकवाद विरोध के नाम पर पख्तूनों पर जुल्म के खिलाफ दुनियाभर के विरोध और दबाव देखते हुए पाकिस्तानी कोर्ट ने लोकतंत्र, मानवाधिकारों की हिफाजत और अभिव्यक्ति की आजादी पर कड़ा रुख अपना रही है।