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Pakistan: पाक अदालत ने प्रधानमंत्री काकर को लगाई फटकार, कहा- कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं; जानें मामला

Mon, 19 Feb 2024 06:29 PM IST
गुलाम अहमद वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद Published by: गुलाम अहमद Updated Mon, 19 Feb 2024 06:29 PM IST
सार

हाईकोर्ट के न्यायाधीश मोहसिन अख्तर कयानी ने सुनवाई के दौरान कहा कि कार्यवाहक प्रधानमंत्री को अदालत के समक्ष पेश होने को अपमान नहीं समझना चाहिए।

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Islamabad HC slams caretaker PM Kakar for failing to appear in missing Baloch students case pakistan news
पाकिस्तान के कार्यवाहक पीएम अनवारुल हक काकर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने लापता बलूच छात्रों से जुड़े मामले में सोमवार को दूसरी बार अदालत में पेश नहीं होने पर पाकिस्तान के कार्यवाहक प्रधानमंत्री अनवारुल हक काकर को फटकार लगाई। अदालत ने पीएम काकर को चेतावनी देते हुए कहा कि कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं है। हाईकोर्ट के न्यायाधीश मोहसिन अख्तर कयानी ने सुनवाई के दौरान कहा कि कार्यवाहक प्रधानमंत्री को अदालत के समक्ष पेश होने को अपमान नहीं समझना चाहिए।

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पाक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक जज ने कहा कि कार्यवाहक प्रधानमंत्री को अगली सुनवाई के लिए कराची नहीं जाना चाहिए, बल्कि अदालत के सामने पेश होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यहां कोई भी कानून से ऊपर नहीं है। प्रधानमंत्री को इसलिए बुलाया गया क्योंकि वह जवाबदेह हैं। हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई 28 फरवरी तक स्थगित करते हुए पीएम काकर फिर से तलब किया है।
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नवंबर में भी अदाल के समक्ष पेश नहीं हुए थे काकर
पाकिस्तान के कार्यवाहक प्रधानमंत्री काकर दूसरी बार अदालत के सामने पेश होने में विफल रहे हैं। पिछले साल नवंबर में इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने सरकार को लापता बलूच छात्रों को सात दिन के भीतर बरामद करने का निर्देश दिया था। अदालत ने कहा था कि अगर अधिकारी आदेश का पालन करने में विफल रहे, तो प्रधानमंत्री काकर को अपने मंत्रियों और गृह व रक्षा सचिवों के साथ 29 नवंबर को अदालत में पेश होना होगा। लेकिन काकर अदालत में पेश नहीं हुए थे, क्योंकि तब वह विदेश दौरे पर थे।
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रिपोर्ट के अनुसार, पाक सरकार अदालत को बार-बार यह आश्वासन देती है कि लापता छात्र जल्द घर लौट आएंगे। अदालत ने 13 फरवरी को पिछली सुनवाई के दौरान आश्वासन के बावजूद बलूच छात्रों को बरामद करने में सरकारी अधिकारियों की विफलता के कारण पीएम काकर और उनके दो कैबिनेट मंत्रियों को तलब किया था। सोमवार को जस्टिस कयानी ने फिर से लापता छात्रों पर जांच आयोग की सिफारिशों के अमल के संबंध में याचिका पर सुनवाई की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को तलब करने का उद्देश्य यह जानना था कि वह अपने कर्तव्यों में विफल क्यों हो रहे हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, जबरन गायब किए गए बलूच लोगों का पता लगाने और इसके लिए जिम्मेदार व्यक्तियों या संगठनों पर जिम्मेदारी तय करने के लिए 2011 में जांच आयोग की स्थापना की गई थी। 


बलूचों के दमन के लिए कुख्यात है पाक सेना 
संसाधन संपन्न बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत है, लेकिन आबादी सबसे कम है। अलगाववादी विद्रोह के कारण यहां लंबे समय से अशांति है। यहां पाकिस्तानी सेना द्वारा बलूचों के क्रूर दमन और लोगों को जबरन गायब करने की घटनाएं आम हैं। पिछले साल नवंबर में पाक सरकार ने स्वीकार किया था कि बलूचिस्तान में करीब 50 लोग गायब हुए हैं। पिछले साल 29 नवंबर को सुनवाई के दौरान पाकिस्तान के अटॉर्नी जनरल मंसूर उस्मान अवान ने अदालत को सूचित किया कि 50 लापता व्यक्तियों में से 22 को बरामद कर लिया गया है, जबकि 28 अन्य का कोई सुराग नहीं मिला है।

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