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आईएसआईएस: अपनी दो सहेलियों से प्रभावित होकर आतंकवादी संगठन में शामिल हुई थी शमीमा, अब सब बर्बाद
Mon, 07 Jun 2021 03:12 PM IST
Tanuja Yadav
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन
Published by: Tanuja Yadav
Updated Mon, 07 Jun 2021 03:12 PM IST
सार
'द रिटर्न: लाइफ आफ्टर आईएसआईएस' डॉक्यूमेंट्री में शमीमा बेगम बताती है कि वो 15 साल की थी, जब वह इस संगठन से जुड़ी थी। शमीमा को आईएस दुल्हन के नाम से जाना जाता था।
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आईएसआईएस
- फोटो : PTI
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विस्तार
आईएस दुल्हन के नाम से मशहूर शमीमी बेगम अब इस आतंकवादी संगठन से मुक्त हो चुकी है। हालांकि एक डॉक्यूमेंट्री के जरिए शमीमा ने बताया कि वो कैसे आईएसआईएस का हिस्सा बनी और किन हालात में यह फैसला लिया। 'द रिटर्न: लाइफ आफ्टर आईएसआईएस' डॉक्यूमेंट्री में शमीमा बेगम बताती है कि वो 15 साल की थी, जब वह इस संगठन से जुड़ी थी।
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शमीमा बेगम आगे बताती है कि उस वक्त आईएसआईएस या उसकी किसी गतिविधि में भर्ती होने के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन हो रहे थे। मेरी दो सहेलियों ने आईएसआईएस से जुड़ने का फैसला किया और उनको दोनों के फैसले के बाद मैंने ठान लिया कि मैं भी इसमें शामिल होउंगी।
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शमीमा बताती है कि वो ऐसा दोस्त बनकर नहीं रहना चाहती थी, जो पीछे छूट जाए। वर्तमान समय में शमीमा 21 साल की है और इस आतंकवादी संगठन के चंगूल से छूट चुकी है। मौजूदा समय में शमीमा उत्तरी कोरिया के अलरोज कैम्प में रह रही है। शमीमा का कहना है कि जब मैंने ब्रिटेन छोड़ा था, तब मैं बहुत छोटी थी।
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शमीमा ने आगे कहा कि मैं बहुत नासमझ थी। शमीमा बताती है कि जब मैंने अपनी सहेलियों के साथ आईएसआईएस में शामिल होने का फैसला किया था तो उस वक्त छुट्टियां चल रही थीं। मैं जानती थी कि ये बड़ा फैसला है लेकिन मैंने खुद को मजबूर पाया। शमीमा ने बताया कि वो फरवरी 2015 में स्कूल की अपनी सहेलियों मीरा अबास और कादिजा सुल्ताना के साथ सीरिया पहुंची थी।
इसके बाद तुर्की होते हुए रक्का तक साथ पहुंचे थे लेकिन वहां मीरा और कादिजा मारी गईं और उन दोनों ने मेरा साथ छोड़ दिया। मैं वहां अकेली रह गई। अब महसूस होता है कि मेरा कोई दोस्त नहीं रहा। अब मैं सब कुछ खो चुकी हूं। आईएसआईएस के साथ रहते हुए मैने बीते छह साल में तीन बच्चों को खोया है।
शमीमा बताती है कि जब मेरी बेटी की मौत हुई तो मैं खुद को खत्म करना चाहती थी लेकिन मैं नहीं कर पाई। शमीमा के माता-पिता बांग्लादेशी हैं लेकिन शमीमा का जन्म ब्रिटेन में हुआ था। हालांकि सीरिया में पाए जाने के बाद ब्रिटिश सरकार ने उनकी नागरिकता रद्द कर दी और 2021 में ब्रिटेन के सुप्रीम कोर्ट ने भी उसे लौटाने की इजाजत नहीं दी।