{"_id":"68b5c53fb8654e8fb0053b2c","slug":"iraq-reopens-historic-mosque-in-mosul-8-years-after-islamic-state-destruction-2025-09-01","type":"story","status":"publish","title_hn":"Iraq: मोसुल में ऐतिहासिक अल-नूरी मस्जिद का फिर हुआ उद्घाटन, आठ साल पहले IS ने बम विस्फोट में उड़ा दिया था","category":{"title":"World","title_hn":"दुनिया","slug":"world"}}
Iraq: मोसुल में ऐतिहासिक अल-नूरी मस्जिद का फिर हुआ उद्घाटन, आठ साल पहले IS ने बम विस्फोट में उड़ा दिया था
Mon, 01 Sep 2025 09:39 PM IST
पवन पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बगदाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बगदाद
Published by: पवन पांडेय
Updated Mon, 01 Sep 2025 09:39 PM IST
सार
मोसुल में मस्जिद का पुनर्निर्माण युद्धग्रस्त इलाकों में सांस्कृतिक धरोहर को बचाने का मॉडल बन सकता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इसी तरह की कोशिशें पड़ोसी सीरिया में भी हो सकती हैं, जहां लगभग 14 साल तक चले गृहयुद्ध और राष्ट्रपति बशर अल-असद के पतन के बाद अब धीरे-धीरे हालात सामान्य होने लगे हैं।
विज्ञापन
अल-नूरी मस्जिद (2024 में निर्माण के वक्त)
- फोटो : unesco.org
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
इराक के प्रधानमंत्री मोहम्मद शिया अल-सुदानी ने सोमवार को मोसुल शहर के ऐतिहासिक अल-नूरी ग्रैंड मस्जिद और उसकी मशहूर झुकी हुई मीनार का औपचारिक उद्घाटन किया। यह वही मस्जिद है जिसे 8 साल पहले आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) ने उड़ा दिया था।
850 वर्षों तक मोसुल शहर की थी पहचान
करीब 850 वर्षों तक यह मीनार मोसुल शहर की पहचान बनी रही। वर्ष 2014 में इसी मस्जिद से आईएस नेता अबु बकर अल-बगदादी ने कथित 'खिलाफत' की घोषणा की थी और जुमे की नमाज पढ़ाई थी। लेकिन 2017 में जब इराकी सेना ने आईएस पर कड़ा हमला किया, तो आतंकियों ने हार मानते हुए मस्जिद को विस्फोट से ध्वस्त कर दिया।
यह भी पढ़ें - Afghanistan: क्यों 6.0 तीव्रता के भूकंप से ही हो गईं 800 मौतें, किस कारण लगातार खतरनाक हो रही स्थिति? जानें
विज्ञापन
यूनेस्को की बड़ी भूमिका
संयुक्त राष्ट्र की सांस्कृतिक संस्था यूनेस्को ने इराकी पुरातत्व विभाग और सुन्नी धार्मिक संस्थाओं के साथ मिलकर मस्जिद और मीनार का पुनर्निर्माण कराया। पारंपरिक तकनीक और मस्जिद के मलबे से निकाले गए पत्थरों का उपयोग किया गया। इस परियोजना पर 115 मिलियन अमेरिकी डॉलर खर्च हुए, जिसमें संयुक्त अरब अमीरात और यूरोपीय संघ का बड़ा योगदान रहा।
इराकी प्रधानमंत्री का बयान
उद्घाटन के मौके पर प्रधानमंत्री सुदानी ने कहा, 'यह पुनर्निर्माण हमारी बहादुरी की याद दिलाता है। यह बताता है कि इराकी लोग अपने दुश्मनों के सामने झुके नहीं, बल्कि अपनी धरती और अपनी विरासत को फिर से जीवित किया।' उन्होंने आगे कहा कि सरकार संस्कृति और पुरातत्व को बढ़ावा देती रहेगी, ताकि इराक की पहचान दुनिया के सामने आए, युवाओं को नवाचार का अवसर मिले और सतत विकास की राह खुले।
ईसाई और अन्य समुदायों की विरासत
सिर्फ मस्जिद ही नहीं, बल्कि मोसुल में युद्ध में क्षतिग्रस्त कई चर्चों का भी पुनर्निर्माण किया गया है। यह काम शहर की बहु-सांस्कृतिक विरासत को संजोने के लिए किया गया। प्रधानमंत्री ने कहा कि मोसुल सभी धर्मों और समुदायों का घर है और यह इराक की विविधता का प्रतीक है। हालांकि, आंकड़े बताते हैं कि आईएस के हमले के बाद से मोसुल में ईसाई समुदाय लगभग खत्म हो चुका है। 2003 में यहां लगभग 50,000 ईसाई रहते थे। आज शहर में 20 से भी कम ईसाई परिवार स्थायी रूप से बचे हैं। अधिकतर ईसाई लोग उत्तरी इराक के कुर्दिश क्षेत्र में बस गए हैं, लेकिन कुछ अब भी त्योहारों और प्रार्थना के लिए मोसुल लौटते हैं।
यह भी पढ़ें - SCO Tianjin: भारत चीन की 'बेल्ट एंड रोड पहल' के खिलाफ अडिग; एससीओ देश विकास बैंक बनाने पर सहमत; जानिए सबकुछ
इस्लामिक स्टेट की हिंसा
आईएस ने अपने चरम दौर में इराक और सीरिया के इतने बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया था, जिसका आकार लगभग ब्रिटेन के आधे क्षेत्रफल के बराबर था। इस दौरान उन्होंने यजीदी समुदाय की महिलाओं को गुलाम बनाकर उनके साथ दुष्कर्म किया, नागरिकों का सिर कलम किया, चर्चों और मस्जिदों को ध्वस्त किया, इसाइयों की संपत्ति कब्जाई और जबरन धर्म परिवर्तन कराए। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, यह सब युद्ध अपराध की श्रेणी में आता है।
विज्ञापन
850 वर्षों तक मोसुल शहर की थी पहचान
करीब 850 वर्षों तक यह मीनार मोसुल शहर की पहचान बनी रही। वर्ष 2014 में इसी मस्जिद से आईएस नेता अबु बकर अल-बगदादी ने कथित 'खिलाफत' की घोषणा की थी और जुमे की नमाज पढ़ाई थी। लेकिन 2017 में जब इराकी सेना ने आईएस पर कड़ा हमला किया, तो आतंकियों ने हार मानते हुए मस्जिद को विस्फोट से ध्वस्त कर दिया।
विज्ञापन
यह भी पढ़ें - Afghanistan: क्यों 6.0 तीव्रता के भूकंप से ही हो गईं 800 मौतें, किस कारण लगातार खतरनाक हो रही स्थिति? जानें
विज्ञापन
यूनेस्को की बड़ी भूमिका
संयुक्त राष्ट्र की सांस्कृतिक संस्था यूनेस्को ने इराकी पुरातत्व विभाग और सुन्नी धार्मिक संस्थाओं के साथ मिलकर मस्जिद और मीनार का पुनर्निर्माण कराया। पारंपरिक तकनीक और मस्जिद के मलबे से निकाले गए पत्थरों का उपयोग किया गया। इस परियोजना पर 115 मिलियन अमेरिकी डॉलर खर्च हुए, जिसमें संयुक्त अरब अमीरात और यूरोपीय संघ का बड़ा योगदान रहा।
इराकी प्रधानमंत्री का बयान
उद्घाटन के मौके पर प्रधानमंत्री सुदानी ने कहा, 'यह पुनर्निर्माण हमारी बहादुरी की याद दिलाता है। यह बताता है कि इराकी लोग अपने दुश्मनों के सामने झुके नहीं, बल्कि अपनी धरती और अपनी विरासत को फिर से जीवित किया।' उन्होंने आगे कहा कि सरकार संस्कृति और पुरातत्व को बढ़ावा देती रहेगी, ताकि इराक की पहचान दुनिया के सामने आए, युवाओं को नवाचार का अवसर मिले और सतत विकास की राह खुले।
ईसाई और अन्य समुदायों की विरासत
सिर्फ मस्जिद ही नहीं, बल्कि मोसुल में युद्ध में क्षतिग्रस्त कई चर्चों का भी पुनर्निर्माण किया गया है। यह काम शहर की बहु-सांस्कृतिक विरासत को संजोने के लिए किया गया। प्रधानमंत्री ने कहा कि मोसुल सभी धर्मों और समुदायों का घर है और यह इराक की विविधता का प्रतीक है। हालांकि, आंकड़े बताते हैं कि आईएस के हमले के बाद से मोसुल में ईसाई समुदाय लगभग खत्म हो चुका है। 2003 में यहां लगभग 50,000 ईसाई रहते थे। आज शहर में 20 से भी कम ईसाई परिवार स्थायी रूप से बचे हैं। अधिकतर ईसाई लोग उत्तरी इराक के कुर्दिश क्षेत्र में बस गए हैं, लेकिन कुछ अब भी त्योहारों और प्रार्थना के लिए मोसुल लौटते हैं।
यह भी पढ़ें - SCO Tianjin: भारत चीन की 'बेल्ट एंड रोड पहल' के खिलाफ अडिग; एससीओ देश विकास बैंक बनाने पर सहमत; जानिए सबकुछ
इस्लामिक स्टेट की हिंसा
आईएस ने अपने चरम दौर में इराक और सीरिया के इतने बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया था, जिसका आकार लगभग ब्रिटेन के आधे क्षेत्रफल के बराबर था। इस दौरान उन्होंने यजीदी समुदाय की महिलाओं को गुलाम बनाकर उनके साथ दुष्कर्म किया, नागरिकों का सिर कलम किया, चर्चों और मस्जिदों को ध्वस्त किया, इसाइयों की संपत्ति कब्जाई और जबरन धर्म परिवर्तन कराए। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, यह सब युद्ध अपराध की श्रेणी में आता है।