इराक के पास कर्ज चुकाने और तनख्वाह देने तक के पैसे नहीं
कच्चे तेल से लबालब होने के बावजूद इराक इन दिनों बड़े आर्थिक संकट की ओर फिसलता जा रहा है। आलम यह है कि सरकार पास कर्ज चुकाने से लेकर कर्मचारियों को तनख्वाह देने तक के पैसे नहीं बचे हैं।
अर्थशास्त्रियों का कहना है कि पूर्व राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन के कार्यकाल के बाद पहली दफा देश की हालात इतनी खराब हुई है। मौजूदा वित्तीय संकट के पीछे बड़ी वजह कोरोना महामारी से धराशायी अर्थव्यवस्था और तेल-गैस के दामों कों गिरावट बताई जा रही है।
वहीं कुछ जानकार लंबे समय से व्याप्त भ्रष्टाचार और बेरोजगारी को वित्तीय संकट के लिए जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। खास बात यह है कि इराक की खराब हालत का सबसे ज्यादा फायदा पड़ोसी ईरान उठा रहा है।
भ्रष्टाचार घटाकर मिलेगी निजात
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने पिछले साल दिसंबर में ही इराक की अर्थव्यवस्था के 11 फीसदी गिरने का अनुमान जताया था। साथ ही सरकार से प्रशासन सुधारने और भ्रष्टाचार घटाने पर जोर देने के लिए कहा था।
ईरान ने रोकी बिजली आपूर्ति, अंधेरे में देश
- पिछले हफ्ते ईरान ने भुगतान न होने के कारण इराक को भेजी जाने वाली बिजली और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति में भी कटौती कर दी। इसके चलते देश का बड़ा हिस्सा अंधेरे में डूब गया।
- ईरान पहले भी कमजोर इराकी सरकार द्वारा दिए गए अवसरों का लाभ उठाते हुए अपनी राजनीतिक और सन्य ताकत मजबूत करता रहा है।
करना पड़ा मुद्र अवमूल्यन
जानकारों का कहना है कि इराक को 90 फीसदी राजस्व तेल गैस की बिक्री से मिलता है। लेकिन कोरोना काल में कीमत गिरने से खजाने को भारी नुकसान हुआ है। हालत ऐसी हो गई है कि दशको बाद पिछले माह उसे अपनी मुद्रा दीनार का अवमूल्यन करना पड़ा। इसके बाद बाजार में करीब सभी वस्तुओं की कीमतें तेजी से बढ़ गईं।
खर्च पांच अरब डॉलर, कमाई साढ़े तीन अरब ही.... तनख्वाह व पेंशन में हर माह पांच अरब डॉलर खर्च होते हैं। जबकि पिछले कुछ माह से तेल से मिलने वाला राजस्व घटकर साढ़े तीन अरब डॉलर रह गया है। नुकसान की भरपाई सरकार खजाने से पैसा निकालकर रही है।